"चुनाव आयोग ने 2003 बिहार एसआईआर आदेश की प्रति देने से किया इनकार"

Written by sabrang india | Published on: August 29, 2025
चुनाव आयोग ने सूचना के अधिकार के तहत पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में 2003 के बिहार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रति उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया है। इसके बजाय, वर्तमान चुनावी प्रक्रिया से संबंधित जून 2025 के आदेश का लिंक दिया गया है।


साभार : द  हिंदू

चुनाव आयोग ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में 2003 में जारी बिहार विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) आदेश की प्रति देने से इंकार कर दिया है। इसके बजाय, आयोग ने चुनावी राज्य में वर्तमान में चल रही प्रक्रिया से संबंधित जून 2025 के आदेश का लिंक साझा किया है।

सतर्क नागरिक संगठन और राष्ट्रीय जन सूचना अधिकार अभियान से जुड़ी ट्रांस्पेरेंसी एक्टिविस्ट अंजलि भारद्वाज ने एक आरटीआई आवेदन के जरिए चुनाव आयोग से अनुरोध किया था कि वह वह आदेश या अधिसूचना उपलब्ध कराए, जिसके आधार पर 2003 में बिहार में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) किया गया था।

इसके साथ ही, RTI आवेदन में यह भी अनुरोध किया गया था कि आयोग इस प्रक्रिया से संबंधित वह दिशानिर्देश भी उपलब्ध कराए, जिसमें संशोधन की विधि और प्रक्रिया, निर्धारित प्रपत्रों तथा प्रस्तुत किए जाने वाले आवश्यक दस्तावेजों की सूची का उल्लेख हो।

चुनाव आयोग ने 27 अगस्त को दिए गए अपने जवाब में बिहार में एसआईआर की घोषणा से संबंधित 24 जून, 2025 के आदेश का लिंक दिया।

आरटीआई के जवाब में कहा गया, ‘इस संदर्भ में आप 24 जून, 2025 को जारी आयोग के आदेश का संदर्भ ले सकते हैं। संबंधित आदेश का लिंक नीचे दिया गया है।’ साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि यह लिंक चुनाव आयोग की वेबसाइट पर पहले से ही उपलब्ध है।

द वायर ने अपनी एक पूर्व रिपोर्ट में बताया था कि 2003 का वह आदेश, जो न तो चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है और न ही वेब आर्काइव में, 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में संदर्भित किया गया है। हालांकि, उस हलफनामे में 22 साल पुरानी इस प्रक्रिया से जुड़े प्रमुख विवरणों का उल्लेख नहीं किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में चुनाव आयोग ने 2003 के एसआईआर आदेश की प्रति संलग्न नहीं की है। हालांकि, आयोग ने 2003 की प्रक्रिया का हवाला देते हुए यह दर्शाने का प्रयास किया है कि उस समय संशोधन की अवधि वर्तमान प्रक्रिया जैसी थी। लेकिन हलफनामे में केवल गणना प्रपत्र जमा करने की समयसीमा का उल्लेख किया गया है, जबकि दावे और आपत्तियां दर्ज करने, मसौदा सूची प्रकाशित करने और अंतिम सूची जारी करने की तारीखों का कोई उल्लेख नहीं है।

हलफनामे में कहा गया है, ‘जैसा कि 24 जून, 2025 के एसआईआर आदेश में भी जिक्र किया गया है, चुनाव आयोग पूर्व में भी कई बार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) करा चुका है। बिहार में पिछली बार ऐसा सर्वेक्षण 2002-2003 में किया गया था, जिसमें गणना की अवधि 15 जुलाई 2002 से 14 अगस्त 2002 तक निर्धारित की गई थी।’

हलफनामे में यह भी कहा गया है, ‘वर्तमान विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की गणना अवधि 25 जून 2025 से 26 जुलाई 2025 तक निर्धारित की गई है। अतः यह आरोप कि चुनाव आयोग यह प्रक्रिया जल्दबाजी में कर रहा है, गलत है।

वर्तमान प्रक्रिया में विवाद का बड़ा मुद्दा वह 11 दस्तावेजों की सूची है जो चुनाव आयोग मतदाताओं से उनकी पात्रता प्रमाणित करने के लिए मांग रहा है। हलफनामे में चुनाव आयोग ने 2003 की प्रक्रिया में मांगे गए चार दस्तावेजों का उल्लेख करते हुए बताया है कि अब उसने 11 दस्तावेजों की सूची तैयार की है, जिन्हें मतदाता अपनी पात्रता सिद्ध करने के लिए प्रस्तुत कर सकते हैं।

हलफनामे में दिशानिर्देशों की प्रति उपलब्ध कराए बिना, चुनाव आयोग ने बताया कि बिहार में 2003 के एसआईआर के दौरान दिशानिर्देशों में नागरिकता के समर्थन में चार दस्तावेज निर्धारित किए गए थे (जहां उपलब्ध हो, एनआरसी रजिस्टर, नागरिकता प्रमाण पत्र, वैध पासपोर्ट या जन्म प्रमाण पत्र)।

इसके विपरीत, इसमें बताया गया है कि बिहार में 2025 के एसआईआर के दौरान, अनुच्छेद 326 के तहत पात्रता के किसी भी दावे का समर्थन करने के लिए 11 दस्तावेज निर्धारित किए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 17 अगस्त को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी 2003 की इस प्रक्रिया का उल्लेख किया था। जब उनसे पूछा गया कि एसआईआर विधानसभा चुनावों के इतने करीब और बाढ़ के मौसम में क्यों किया जा रहा है, तो उन्होंने बताया कि 2003 में भी इसका अंतिम चरण जुलाई में ही संपन्न हुआ था। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उस समय विधानसभा चुनाव अक्टूबर 2005 से पहले होने वाले नहीं थे।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में चुनाव आयोग ने यह भी बताया कि एक स्वतंत्र मूल्यांकन के आधार पर ही चुनाव आयोग ने पूरे देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराने का निर्णय लिया था।

भारद्वाज ने अपनी आरटीआई अर्जी में स्वतंत्र विश्लेषण की प्रति तथा उन सभी फाइलों के संदर्भ संख्या की जानकारी मांगी थी, जिनमें देशभर में एसआईआर शुरू करने के निर्णय को तैयार और अनुमोदित किया गया था, साथ ही निर्णय से संबंधित फाइलों की प्रतियां भी मांगी थीं। लेकिन निर्वाचन आयोग ने अपने जवाब में केवल 24 जून के दिशानिर्देशों का ही हवाला दिया।

आयोग ने लिंक संलग्न करते हुए कहा, ‘जानकारी के लिए आप आयोग के 24 जून 2025 के दिशानिर्देश देख सकते हैं, जो स्वाभाविक रूप से स्पष्ट हैं और आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

आयोग ने कहा, ‘उसके पास इस संबंध में और कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।’

इन जवाबों को लेकर भारद्वाज ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि आयोग के पास ऐसी कोई फाइल उपलब्ध नहीं है।

भारद्वाज ने कहा, ‘आमतौर पर, राष्ट्रव्यापी एसआईआर जैसी प्रक्रिया के दायरे और स्वरूप को देखते हुए यह अपेक्षा की जाती है कि आयोग के भीतर तथा विभिन्न मंत्रालयों समेत अन्य संस्थाओं के साथ पत्राचार और विचार-विमर्श हुआ होगा, जो आयोग की फाइलों का हिस्सा होगा।’

उन्होंने कहा, ‘इसलिए यह आश्चर्य की बात है कि आयोग ने बताया है कि उनके पास ऐसी कोई फाइल उपलब्ध नहीं है, जिससे यह साबित हो कि 2025 में देश भर में एसआईआर शुरू करने का निर्णय लिया गया और उसे निर्वाचन आयोग द्वारा अनुमोदित किया गया।

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