अयोध्या में मस्जिदों को अपवित्र करने के प्रयास में सात गिरफ्तार, जालीदार टोपी लगाकर करना चाहते थे गुमराह

Written by Sabrangindia Staff | Published on: April 29, 2022
पुलिस ने कहा कि गिरफ्तार किए गए सात लोगों की पहचान महेश कुमार मिश्रा, प्रत्यूष श्रीवास्तव, नितिन कुमार, दीपक कुमार गौर उर्फ गुंजन, बृजेश पांडे, शत्रुघ्न प्रजापति और विमल पांडे के रूप में हुई है।


 प्रतीकात्मक तस्वीर

अयोध्या में गुरुवार को सात लोगों को तीन मस्जिदों के बाहर आपत्तिजनक पोस्टर और धार्मिक ग्रंथों के फटे पन्ने फेंकने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और पुलिस ने कहा कि "दिल्ली में हाल की घटना" के विरोध में शांति भंग करने का उनका प्रयास था।
 
आरोपियों की पहचान महेश कुमार मिश्रा, प्रत्यूष श्रीवास्तव, नितिन कुमार, दीपक कुमार गौर उर्फ गुंजन, बृजेश पांडे, शत्रुघ्न प्रजापति और विमल पांडे के रूप में हुई है। पुलिस ने कहा कि सबसे छोटा गौर 22 साल का है, जबकि सबसे बड़ा मिश्रा 37 साल का है।
 
आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 295 (किसी भी वर्ग के धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थलों को नुकसान पहुंचाना या अपवित्र करना), और 295-ए (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य, किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को उसके धर्म का अपमान करने के इरादे से या धार्मिक विश्वास) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है।

साजिश के मास्टरमाइंड का नाम महेश कुमार मिश्रा है। उसने कबूल किया है कि वह और उसके साथी दिल्ली के जहांगीरपुरी में हुई हिंसा से नाराज थे। गुरुवार को पुलिस सभी आरोपियों को मीडिया के सामने लेकर आई।
 
मास्टरमाइंड चाहता था कि उसकी यह करतूत CCTV में कैद हो और पुलिस के हाथ भी आए। इसलिए आरोपियों ने दो ऐसी मस्जिदें चुनीं जहां CCTV लगे थे। SSP शैलेश पांडेय ने बताया कि इस घटना में 11 लोग शामिल थे। मुख्य आरोपी ने अपने साथियों के साथ घटना को अंजाम दिया। फरार चल रहे 4 अन्य लोगों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
 
आरोपियों ने अयोध्या के मस्जिद कश्मीरी मोहल्ला, टाटशाह मस्जिद, घोसियाना रामनगर मस्जिद, ईदगाह सिविल लाइन मस्जिद और दरगाह जेल के पीछे मांस और आपत्तिजनक पोस्टर फेंके थे। कुछ जगह पर धार्मिक पुस्तक फेंककर सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। पुलिस ने जिस मुस्लिम धर्म गुरु से बयान लिए थे, उन्होंने रात 2 बजे चार बाइक पर 8 लोगों को देखा था। उस समय वे नमाज पढ़ने जा रहे थे। उन्होंने सबसे पहले आपत्तिजनक पोस्टर देखे और पुलिस और एडमिनिस्ट्रेशन के अफसरों तक ये मामला पहुंचाया।
 
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (अयोध्या) शैलेश कुमार पांडे ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “मिश्रा के नेतृत्व में चार मोटरसाइकिलों पर कुल आठ लोगों ने मस्जिदों और दरगाह के बाहर आपत्तिजनक पोस्टर और वस्तुएं फेंकी। सामान बरामद कर लिया गया है और मोटरसाइकिलों को जब्त कर लिया गया है। सबूत इकट्ठा करने के बाद, पुलिस दल घटनाओं की श्रृंखला को एक साथ जोड़ने में सक्षम थे।”


 
उन्होंने कहा, “जबकि सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है, चार अन्य फरार हैं। हम जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लेंगे। गिरफ्तार लोगों से पूछताछ के दौरान यह बात सामने आई कि वे इस शहर के सौहार्दपूर्ण माहौल और शांतिपूर्ण परंपरा को बर्बाद करना चाहते हैं, कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में है और घटना के बाद से कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है।"
 
मिश्रा के खिलाफ पूर्व में चार मामले हैं, जिनमें समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना और आपराधिक धमकी देना शामिल है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "उसके खिलाफ सभी चार मामले अयोध्या कोतवाली पुलिस स्टेशन में दर्ज हैं।"
 
पुलिस ने कहा, “बुधवार को रात करीब 10 बजे वे मिश्रा के घर पर थे, जहां उन्होंने आपत्तिजनक पोस्टर बनाए। वे एक मस्जिद में अपनी योजना को अंजाम नहीं दे सके क्योंकि वहां एक पुलिस वैन तैनात थी। इसलिए वे तीन अलग-अलग मस्जिदों में गए और आपत्तिजनक सामान बाहर फेंक दिया।”
 
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि सातों ने "हिंदू योद्धा संगठन" नामक एक समूह के सदस्य होने का दावा किया। “मूल ​​रूप से, मिश्रा इस तथाकथित संगठन को चलाता है। यह संगठन पंजीकृत नहीं है, और इसका कोई कार्यालय भी नहीं है। अधिकारी ने कहा, मिश्रा ने ही दूसरों को उकसाया। आरोपी का किसी राजनीतिक दल या किसी पंजीकृत संगठन से कोई संबंध नहीं है। वे सभी निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों से हैं।"  

पूर्व में भी मुस्लिमों को बनाया गया है निशाना
बता दें कि इस साल अप्रैल माह की शुरूआत से ही कई धार्मिक अवसर पड़े हैं। इऩमें हिंदू नव वर्ष, राम नवमी, हनुमान जयंती आदि शामिल हैं। इसके अलावा यह रमजान का भी महीना है। डीजे और लाउडस्पीकर को लेकर कई तरह की बातें सामने आई हैं। हिंदुओं द्वारा शोभायात्रा को इस बार मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से तो निकाला ही गया है बल्कि डीजे पर मुस्लिमों को टारगेट करने वाले आपत्तिजनक गाने बजाए गए हैं जिसकी परिणति हिंसा के रूप में सामने आई है। शासन की मूक सहमति के चलते कथित हिंदुत्ववादी संगठनों की बाढ़ सी आ गई है और वे खुलेआम मुसलमानों को निशाना बनाकर सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ रहे हैं। इसके अलावा राज्य सरकारों द्वारा मुस्लिमों के घरों और प्रतिष्ठानों पर बुलडोजर चलाए जाने से उनका मनोबल और बढ़ गया है। 

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