ओडिशा के राजगांगपुर में खदान विस्तार को लेकर तनाव, ग्रामीणों ने माइनिंग एरिया में किया विरोध प्रदर्शन  

Written by sabrang india | Published on: March 5, 2026
MLA ने दावा किया कि गांववालों की खेती की जमीन कंपनी अधिकारियों की भारी मशीनरी के इस्तेमाल से खराब हो गई थी, वे तनाव बढ़ने पर अपने खेतों का मुआयना करने गए थे।


साभार : द न्यूज इंडियन एक्सप्रेस, प्रतीकात्मक तस्वीर

ओडिशा के राजगांगपुर में डालमिया सीमेंट भारत लिमिटेड (DCBL) की लांजीबेरना डोलोमाइट और लाइमस्टोन माइंस में गुरुवार को दूसरे दिन भी तनाव बना रहा, क्योंकि ग्रामीण आंदोलनकारी पुलिस की मौजूदगी को नजरअंदाज करते हुए जबरन माइनिंग एरिया में घुस गए।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बीते सप्ताह राजगांगपुर के MLA सीएस रज़ेन एक्का के साथ आंदोलनकारियों ने माइंस के पास पहला प्रदर्शन किया। दोपहर करीब 2.30 बजे हालात तब तनावपूर्ण हो गए, जब प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए। पुलिसकर्मियों द्वारा उन्हें रोकने की कोशिशों के बावजूद गांववाले माइनिंग एरिया में घुस गए और लाल झंडे फहराए। बाद में वे माइंस के बाहर ही खड़े रहे।

आंदोलनकारियों ने कहा कि जिला प्रशासन को तुरंत माइनिंग का काम रोक देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि लांजीबेरना माइंस के विस्तार के लिए हाल ही में गैर-कानूनी तरीके से करीब 36 एकड़ जमीन ली गई थी।

MLA ने दावा किया कि जिन ग्रामीणों की खेती की जमीन कंपनी अधिकारियों की भारी मशीनरी के इस्तेमाल से खराब हो गई थी, वे तनाव बढ़ने पर अपने खेतों का मुआयना करने गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित गांववालों ने विवादित जमीन पर फसल उगाई थी, लेकिन कंपनी के अधिकारियों ने बुधवार को दूसरी बार खेतों को नुकसान पहुंचाया। DIG (वेस्टर्न रेंज) बृजेश राय ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और एहतियात के तौर पर मौके पर पुलिस की 12 प्लाटून तैनात की गई हैं।

26 फरवरी की रिपोर्ट के अनुसार, सुबह जब कंपनी ने भारी मशीनरी के साथ काम फिर से शुरू किया तो हालात बिगड़ गए, जिससे साइट पर तैनात पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। गांववालों ने आरोप लगाया कि खदान के विस्तार के लिए जमीन का अधिग्रहण गैर-कानूनी तरीके से किया गया था और जिला प्रशासन पर तय गाइडलाइंस का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।

हालांकि सूरज डूबने के बाद माइनिंग का काम रोक दिया गया, लेकिन पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच शाम तक टकराव जारी रहा। अनुमान के मुताबिक विरोध स्थल पर 2,000 से 2,500 गांववाले मौजूद थे। शाम तक राजगांगपुर कांग्रेस MLA सीएस रज़ेन एक्का भी अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शनकारियों के साथ शामिल हो गए।

राजगांगपुर ग्राम सभा कमेटी फोरम के कन्वीनर बिनय भूषण बारला ने कहा कि लांजीबेरना खदानों के विस्तार के हिस्से के तौर पर DCBL ने 13 दिसंबर, 2025 को कुतरा तहसील के लांजीबेरना मौज़ा में 27.26 एकड़ जमीन और राजगांगपुर तहसील के बिहाबंध में 9.22 एकड़ जमीन पर कब्जा कर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तय नियमों का उल्लंघन हुआ।

MLA एक्का ने कहा था कि कई प्रभावित जमीन मालिकों को मुआवजा नहीं मिला है और उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया है। उनके अनुसार 27.26 एकड़ जमीन का आधा हिस्सा पहले बिसरा स्टोन लाइम कंपनी (BSLC) को लीज पर दिया गया था और 2009 में ग्राम सभा की जरूरी मंजूरी के बिना लीज़-टू-लीज़ अरेंजमेंट के जरिए DCBL को ट्रांसफर कर दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि बाकी हिस्से में तय गाइडलाइंस का उल्लंघन करते हुए नया अधिग्रहण किया गया।

सुंदरगढ़ ADM (रेवेन्यू) अभिमन्यु माझी ने कहा कि जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में सही प्रक्रिया का पालन किया गया था और उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बातचीत में हिस्सा लेने की अपील की, यह भरोसा दिलाते हुए कि वास्तविक शिकायतों पर ध्यान दिया जाएगा। आखिरी रिपोर्ट आने तक विरोध प्रदर्शन जारी रहा।

दिसंबर 2025 में कंपनी ने जमीन के दो हिस्सों पर कब्जा कर लिया था और शुरुआती माइनिंग गतिविधियां शुरू की थीं। हालांकि गांववालों के विरोध के बाद काम रोक दिया गया था। इसी मुद्दे पर सैकड़ों आदिवासी प्रदर्शनकारियों ने झगरपुर में स्टेट हाईवे-10 को लगभग 12 घंटे तक जाम कर दिया था।

Related

भारत: लेफ्ट समेत पूरा विपक्ष और बड़ी संख्या में लोगों ने ईरान पर US-इजराइल हमलों का विरोध किया

बाकी ख़बरें