आकाश विजयवर्गीय का बल्ला चलने के बाद सियासत गर्म; समर्थकों ने लगाया पोस्टर तो कोर्ट ने रद्द की याचिका

Written by sabrang india | Published on: June 28, 2019
इंदौर के विधायक आकाश विजयवर्गीय द्वारा नगर निगम अधिकारी को बल्ले से पीटने के बाद सियासत गर्म हो गई है। एक ओर पिता कैलाश विजयवर्गीय उनका समर्थन कर हैं, वहीं दूसरी ओर इंदौर की सभी अदालतों ने उनकी जमानत याचिका निरस्त कर दी है और उनपर एक और मामले को लेकर केस दर्ज कर दिया गया है। 

akash vijayvargiya

आकाश विजयवर्गीय बीजेपी नेता होने के साथ इंदौर तीन से विधायक हैं। नगर निगम के कर्मचारियों के साथ मारपीट के आरोप में इंदौर कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस ने कोर्ट के समक्ष केस डायरी पेश की। वहीं निगम ने सेशन कोर्ट में विधायक के खिलाफ 7 पेज की आपत्ति लगाई। जिसके बाद उनकी जमानत कराने के लिए गुरूवार को दिन भर कानूनी प्रक्रिया चली। हालांकि, लोअर कोर्ट से याचिका निरस्त होने के बाद, जब सेशन कोर्ट में अपील की गई तो सुनवाई के दौरान मामला एससी-एसटी के विशेष जज बीके द्विवेदी के यहां स्थानांतरित कर दिया था। परन्तु, वहां भी सुनवाई के दौरान याचिका अधिकार क्षेत्र में नहीं होने के कारण याचिका खारिज कर दी गई। 

बता दें कि, इस मामले को लेकर आकाश विजयवर्गी के खिलाफ धारा 353, 294, 506, 147, 148 के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही, बेल निरस्त होने के बाद उनके समर्थकों ने कोर्ट के बाहर जमकर हंगामा किया, परन्तु पुलिस ने उन्हें पीछे खदेड़ दिया था। साथ ही, उनके समर्थन में पोस्टर लगाएं गए थे, जिन पर आकाश विजयवर्गीय की तस्वीर के नीचे लिखा है 'सैल्यूट आकाश'। लेकिन बाद में नगर निगम प्रशासन ने इन पोस्टरों को हटवा दिया था। अभी मिली खबरों के अनुसार, विधायक ने नगर निगम के जिस अधिकारी (भवन निरीक्षक धीरेंद्र सिंह) को क्रिकेट बैट से पीटा था, उन्हें एक निजी अस्पताल के ICU में भर्ती कराया गया है। पलासिया क्षेत्र स्थित अस्पताल के एक डॉक्टर ने शुक्रवार को इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि धीरेंद्र सिंह को गुरुवार देर शाम उच्च रक्तचाप की शिकायत के बाद ICU में भर्ती किया गया, और अभी उनकी हालत ठीक है।  
 
इंदौर पुलिस ने आकाश विजयवर्गीय पर एक और मामला दर्ज किया है। उनपर चार जून को बिजली कटौती पर बिना अनुमति विरोध प्रदर्शन करने का आरोप है। इसी मामले में गुरुवार को आकाश की एमजी रोड थाना पुलिस ने औपचारिक गिरफ्तारी कर ली। पुलिस ने पांच जून को आकाश सहित कई भाजपा नेताओं के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था। इसमें आकाश विजयवर्गीय फरार बताए जा रहे थे। 

गौरतलब है कि, आकाश विजयवर्गीय की निगम कर्मचारियों से झड़प उस वक्त हुई जब अधिकारी गंजी कंपाउंड स्थित एक पुराने मकान को तोड़ने पहुंचे थे। इस दौरान आकाश पहुंचे और कर्मचारियों को धमकी दी कि अगर वो पांच मिनट में वहां से नहीं निकले तो जो कुछ होगा उसके लिए जिम्मेदारी वे खुद ही होंगे। इसके बाद आकाश ने जेसीबी मशीन की चाभी निकाल ली और हाथ में क्रिकेट का बैट लेकर निगम कर्मचारियों को पीटना शुरू कर दिया। आकाश विजयवर्गीय का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो गया था।

नगर निगम अधिकारियों के साथ मापीट के मामले को लेकर गृहमंत्री अमित शाह ने रिपोर्ट मंगाई है। सूत्रों के हवाले पता चला है कि अमित शाह ने 'सिक्वेंस ऑफ इंवेंट' के हिसाब से रिपोर्ट मांगी है। साथ ही, आकाश विजयवर्गीय की जहां सभी निंदा कर रहे हैं, वहीं, पिता कैलाश विजयवर्गीय उनका समर्थन करते हुए नज़र आ रहे हैं। एंकर के सवाल करने पर भड़कते हुए उन्होंने कहा “तुम्हारी हैसियत ही क्या है?’ 
  
आपको बता दें कि, मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने मामले में कुछ भी कहने से कतराते हुए नज़र आ रहे हैं। मीडिया द्वारा सवाल करने पर शिवराज सिंह ने बात घूमाते हुए कहा कि ‘आज वह सदस्यता के काम से महाराष्ट्र में थे, कल तेलंगाना में थे और इस मामले में आकाश ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है, इसके अलावा मुझे कुछ नहीं कहना है।’   

मामले को लेकर विपक्ष आकाश विजयवर्गीय के साथ बीजेपी पर भी निशाना साधते हुए दिख रहे हैं। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मामले की कड़ी आलोचना करते हुए ट्वीट कर बीजेपी के सिद्धांतों पर सवाल खड़ा किया है। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी आकाश विजयवर्गीय के बहाने बीजेपी पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया पर ट्वीट किया है। साथ ही कुमार विश्वास ने आकाश विजयवर्गीय को आलोचना करने के साथ, उनके पिता कैलाश विजयवर्गीय को बेटे को समझाने की हिदायत दी है।  

फिलहाल, विधायक आकाश विजयवर्गीय को 7 जुलाई तक पुलिस की हिरासत में बिताना होगा। वहीं, प्रदेश सरकार ने घटना स्थल पर मौजूद निगम के उन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है, जो वीडियो में आकाश विजयवर्गीय का साथ देते हुए नज़र आ रहे थे।      

 

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