मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर एक पत्र भी जारी किया। इसमें उन्होंने ठेका प्रथा के नाम पर हो रहे कथित अन्याय को समाप्त करने और शोषण पर रोक लगाने की मांग की। पत्र में यह भी कहा गया कि 8 घंटे की ड्यूटी के लिए न्यूनतम 15,000 रुपये वेतन तय किया जाए और हर महीने चार छुट्टियां दी जाएं।

वाराणसी के करखियांव स्थित अमूल बनास डेयरी प्लांट में शनिवार को मजदूरों का गुस्सा भड़क गया। वेतन कटौती और ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे कथित शोषण के विरोध में सैकड़ों महिला-पुरुष मजदूरों ने प्लांट के मेन गेट पर ‘चक्का जाम’ कर दिया। सुबह 8 बजे शुरू हुए इस प्रदर्शन में दोपहर की शिफ्ट के कर्मचारी भी शामिल हो गए, जिससे प्लांट का काम पूरी तरह ठप हो गया। इस हड़ताल के चलते कंपनी को करीब 10 लाख रुपये से ज्यादा के आर्थिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, आक्रोशित मजदूरों ने प्लांट के गेट पर धरना देते हुए दूध की आपूर्ति बाधित कर दी, जिससे दर्जनों टैंकर घंटों सड़क पर खड़े रहे। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन मजदूरों की नाराजगी के चलते बात नहीं बन पाई। बाद में इंस्पेक्टर फूलपुर अतुल कुमार सिंह और इंस्पेक्टर बड़ागांव प्रवीण सिंह भी पहुंचे। उन्होंने भी समझाने की कोशिश की, लेकिन मजदूर नहीं माने और टैंकर बाहर खड़े रहे।
हालात तनावपूर्ण होते देख एडीसीपी नृपेन्द्र मौके पर पहुंचे। उन्होंने मजदूरों को भरोसा दिलाया कि उनके साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और श्रम विभाग के साथ मिलकर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इस आश्वासन के बाद मजदूरों ने दूध के टैंकरों को अंदर जाने का रास्ता दे दिया, लेकिन वे स्वयं काम पर नहीं लौटे और गेट पर ही डटे रहकर शाम तक धरना जारी रखा।
मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर एक पत्र भी जारी किया। इसमें उन्होंने ठेका प्रथा के नाम पर हो रहे कथित अन्याय को समाप्त करने और शोषण पर रोक लगाने की मांग की। पत्र में यह भी कहा गया कि 8 घंटे की ड्यूटी के लिए न्यूनतम 15,000 रुपये वेतन तय किया जाए और हर महीने चार छुट्टियां दी जाएं। इसके अलावा, श्रम कानूनों के तहत पीएफ और ईएसआई जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, कर्मचारियों को जॉइनिंग लेटर और सैलरी स्लिप दी जाए, तथा महिला कर्मचारियों को मासिक अवकाश भी सुनिश्चित किया जाए।
कंपनी के अधिकारी आलोकमणि त्रिपाठी का कहना है कि श्रमिकों की नियुक्ति ठेकेदारों के माध्यम से की जाती है, इसलिए वेतन से जुड़े विवादों की जिम्मेदारी ठेकेदारों की है। फिलहाल, पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में प्रबंधन, ठेकेदारों और मजदूरों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत कर मामले का समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, शाम तक मजदूर अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और प्लांट में उत्पादन कार्य बाधित बना हुआ है।
Related

वाराणसी के करखियांव स्थित अमूल बनास डेयरी प्लांट में शनिवार को मजदूरों का गुस्सा भड़क गया। वेतन कटौती और ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे कथित शोषण के विरोध में सैकड़ों महिला-पुरुष मजदूरों ने प्लांट के मेन गेट पर ‘चक्का जाम’ कर दिया। सुबह 8 बजे शुरू हुए इस प्रदर्शन में दोपहर की शिफ्ट के कर्मचारी भी शामिल हो गए, जिससे प्लांट का काम पूरी तरह ठप हो गया। इस हड़ताल के चलते कंपनी को करीब 10 लाख रुपये से ज्यादा के आर्थिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, आक्रोशित मजदूरों ने प्लांट के गेट पर धरना देते हुए दूध की आपूर्ति बाधित कर दी, जिससे दर्जनों टैंकर घंटों सड़क पर खड़े रहे। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन मजदूरों की नाराजगी के चलते बात नहीं बन पाई। बाद में इंस्पेक्टर फूलपुर अतुल कुमार सिंह और इंस्पेक्टर बड़ागांव प्रवीण सिंह भी पहुंचे। उन्होंने भी समझाने की कोशिश की, लेकिन मजदूर नहीं माने और टैंकर बाहर खड़े रहे।
हालात तनावपूर्ण होते देख एडीसीपी नृपेन्द्र मौके पर पहुंचे। उन्होंने मजदूरों को भरोसा दिलाया कि उनके साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और श्रम विभाग के साथ मिलकर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इस आश्वासन के बाद मजदूरों ने दूध के टैंकरों को अंदर जाने का रास्ता दे दिया, लेकिन वे स्वयं काम पर नहीं लौटे और गेट पर ही डटे रहकर शाम तक धरना जारी रखा।
मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर एक पत्र भी जारी किया। इसमें उन्होंने ठेका प्रथा के नाम पर हो रहे कथित अन्याय को समाप्त करने और शोषण पर रोक लगाने की मांग की। पत्र में यह भी कहा गया कि 8 घंटे की ड्यूटी के लिए न्यूनतम 15,000 रुपये वेतन तय किया जाए और हर महीने चार छुट्टियां दी जाएं। इसके अलावा, श्रम कानूनों के तहत पीएफ और ईएसआई जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, कर्मचारियों को जॉइनिंग लेटर और सैलरी स्लिप दी जाए, तथा महिला कर्मचारियों को मासिक अवकाश भी सुनिश्चित किया जाए।
कंपनी के अधिकारी आलोकमणि त्रिपाठी का कहना है कि श्रमिकों की नियुक्ति ठेकेदारों के माध्यम से की जाती है, इसलिए वेतन से जुड़े विवादों की जिम्मेदारी ठेकेदारों की है। फिलहाल, पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में प्रबंधन, ठेकेदारों और मजदूरों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत कर मामले का समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, शाम तक मजदूर अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और प्लांट में उत्पादन कार्य बाधित बना हुआ है।
Related
बिशप ने दलित ईसाइयों के लिए आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट से पुनर्विचार की मांग की
बिहार : पति की लिंचिंग के बाद महिला ने की आत्महत्या, दो बच्चों की हालत गंभीर