बिहार : पति की लिंचिंग के बाद महिला ने की आत्महत्या, दो बच्चों की हालत गंभीर

Written by sabrang india | Published on: April 2, 2026
रेशमा खातून ने कथित तौर पर 31 मार्च 2026 की देर रात अपने घर पर अपनी चार साल की बेटी और डेढ़ साल के बेटे के साथ जहर खा लिया।



बिहार के रोहतास जिले में 1 अप्रैल 2026 को एक मुस्लिम महिला ने अपने दो छोटे बच्चों के साथ जहर खाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना उसके पति की जमीन विवाद से जुड़े एक सार्वजनिक हमले में पीट-पीटकर हत्या (लिंचिंग) किए जाने के कुछ दिनों बाद हुई। महिला रेशमा खातून और उसके बच्चे अपने घर में बेहोश पाए गए, उन्हें एक क्लिनिक ले जाया गया, जहां बाद में महिला की मौत हो गई। उसके बच्चों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।

मकतूब मीडिया के अनुसार, रेशमा खातून ने कथित तौर पर 31 मार्च 2026 की देर रात अपने घर पर अपनी चार साल की बेटी और डेढ़ साल के बेटे के साथ जहर खा लिया। अगली सुबह पड़ोसियों ने घर में कोई हलचल न देखकर अंदर जाकर देखा, तो तीनों बेहोश पाए गए। उन्हें शुरू में सासाराम की राज कॉलोनी में एक निजी क्लिनिक में इलाज के लिए ले जाया गया, जिसके बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें वाराणसी रेफर कर दिया गया।

रोहतास के पुलिस अधीक्षक (SP) रोशन कुमार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, रेशमा खातून की मौत वाराणसी में इलाज के दौरान हुई, जबकि उसके बच्चे अभी भी डॉक्टरों की निगरानी में हैं। यह घटना उसके पति, हसन रजा खान की 24 मार्च 2026 को हुई लिंचिंग के बाद सामने आई है। हसन रजा खान पर एक राज्य राजमार्ग पर सरेआम हमला किया गया था और पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, हमलावरों ने कथित तौर पर हसन रजा खान के हाथ-पैर बांध दिए थे, उन्हें राजमार्ग पर घसीटा था और पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी थी। इस हमले का वीडियो भी बनाया गया, जो सोशल मीडिया पर तेजा से वायरल हुआ। आठ आरोपियों में से चार को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि बाकी आरोपी अभी भी फरार हैं। परिवार वालों ने बताया है कि जो आरोपी अभी तक पकड़े नहीं गए हैं, वे उन्हें लगातार धमकियां दे रहे हैं।

“परिवार वालों का आरोप है कि वे लगातार डर के साए में जी रहे हैं और फरार आरोपियों से उन्हें धमकियां मिल रही हैं। जिस व्यक्ति ने इस घटना का वीडियो बनाया था, उसे भी कथित तौर पर धमकियां दी गई हैं।”

बाकी आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है और उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। निजी क्लिनिक के डॉक्टरों ने इस बात की पुष्टि की है कि इन लोगों कीटनाशक खा लिया था। इस आत्महत्या की घटना को पति की लिंचिंग और उसके बाद मिली धमकियों से उपजे मानसिक आघात और डर से जोड़कर देखा जा रहा है।

विश्लेषण से पता चला है कि मुस्लिम परिवारों के खिलाफ हिंसा और धमकियों की घटनाओं ने कई क्षेत्रों में डर और हाशिए पर धकेले जाने का माहौल पैदा कर दिया है। समाज से अलग-थलग पड़ने और बुरे नतीजों की आशंका के ऐसे मामले लगातार देखने को मिल रहे हैं, जिसका असर लोगों के सार्वजनिक और धार्मिक जीवन में उनकी भागीदारी पर पड़ रहा है। हालिया निष्कर्षों में भारत में मुसलमानों के खिलाफ होने वाले अपराधों की व्यापक जांच में, न्याय मिलने में आने वाली व्यवस्थित बाधाओं और प्रभावित परिवारों के लिए लगातार बने रहने वाले जोखिमों की पहचान की गई है। इन रिपोर्टों में यह बात सामने आई है कि डराना-धमकाना, हिंसा और न्याय न मिल पाना जैसी समस्याएं कमजोर समुदायों को लगातार प्रभावित कर रही हैं।

“कथित आत्महत्या का संबंध, लिंचिंग की घटना और उसके बाद परिवार को डराए-धमकाए जाने के कारण पैदा हुए मानसिक आघात और डर से जोड़ा जा रहा है।”
उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में सामने आए हालिया मामलों से भी यह पता चलता है कि सांप्रदायिक हिंसा या कानूनी कार्रवाई से प्रभावित परिवारों को अक्सर लगातार धमकियों और विस्थापन का सामना करना पड़ता है, जैसा कि रिपोर्टों में बताया गया है। अधिकारियों ने कहा है कि जांच-पड़ताल जारी है और पीड़ितों की सुरक्षा तथा उन्हें न्याय दिलाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।

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