कांग्रेस और मुसलमानः बहुवादी समाज में धार्मिक समुदायों का एकीकरण

Written by राम पुनियानी | Published on: July 19, 2018
साध्वी प्रज्ञा और स्वामी असीमानंद को मालेगांव और मक्का मस्जिद बम धमाका प्रकरणों में कुछ माह पहले जमानत मिलने के तुरंत बाद भाजपा ने गला फाड़कर यह कहना शुरू कर दिया कि कांग्रेस हिन्दू विरोधी पार्टी है। इस दावे का आधार इस तथ्य को बनाया गया था कि इन दोनों की गिरफ्तारियां यूपीए शासनकाल में हुईं थीं। 



तथ्य यह है कि दोनों को पहले महाराष्ट्र और उसके बाद राजस्थान पुलिस के आतंकवाद-निरोधक दस्ते (एटीएस) की सूक्ष्म जांच के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। धमाकों की इस श्रृंखला की महाराष्ट्र एटीएस के प्रमुख हेमंत करकरे ने गहराई से जांच की थी। यह मात्र संयोग नहीं है कि करकरे की 26/11 के मुंबई हमले में मौत हो गई थी।

अब उर्दू दैनिक ‘इंकलाब‘ ने एक खबर छापी है, जिसमें यह कहा गया है कि राहुल गांधी ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ एक मुलाकात में कांग्रेस को मुस्लिम पार्टी बताया। तथ्य यह है कि इस मुलाकात में राहुल गांधी ने केवल इतना कहा था कि कांग्रेस, सभी समुदायों की पार्टी है और उसके लिए न तो कोई समुदाय बड़ा है और ना ही छोटा। बैठक में दरअसल क्या हुआ था, इसका विवरण उसमें मौजूद कई व्यक्तियों ने दिया है।

इतिहासविद् इरफान हबीब ने ट्वीट कर कहा, ‘‘मुझे यह जानकर धक्का लगा कि राहुल गांधी पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने कांग्रेस को मुस्लिम पार्टी बताया। इस बैठक में मैं भी मौजूद था। यह आरोप दुर्भावना से प्रेरित है। इस बैठक में ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई।‘‘ गजाला जमील, जो इस बैठक में मौजूद थीं, ने कहा कि राहुल गांधी ने एकदम अलग बात कही थी। ‘‘

उन्होंने यह स्वीकार किया कि कांग्रेस पार्टी ने बहुत सी गलतियां की हैं परंतु उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस ही वह ताकत है जो भारत के विभिन्न समुदायों और वर्गों को जोड़ती है। बैठक में उपस्थित लोगों को राहुल ने आश्वस्त किया कि कांग्रेस आगे भी यह भूमिका निभाती रखेगी और भारतीय समाज के सभी वर्गों के सरोकारों की फिक्र करेगी। 

बैठक में मौजूद लोगों ने उनके इस वक्तव्य की सराहना की और उनसे यह अनुरोध किया कि उनके नेतृत्व में कांग्रेस को न्याय और समानता के मूल्यों की रक्षा के लिए काम करना चाहिए।‘‘

‘इंकलाब‘ में प्रकशित समाचार की पुष्टि किए बगैर भाजपा नेतृत्व ने कांग्रेस पर हमला बोल दिया। एक के बाद एक प्रेसवार्ताएं आयोजित कर भाजपा नेताओं ने कांग्रेस को मुस्लिम पार्टी बताना शुरू कर दिया। 

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन ने कहा कि राहुल गांधी जनेऊ धारी से मुस्लिम धारी बन गए हैं। नरेन्द्र मोदी ने भी इस खबर का हवाला देते हुए फरमाया कि यद्यपि कांग्रेस यह दावा कर रही है कि वह मुस्लिम पार्टी है तथापि वह केवल मुस्लिम पुरूषों की पार्टी है और मुंहजुबानी तलाक जैसे मुसलमान महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर वह संवेदनशील नहीं है।

यह घटनाक्रम, राजनीति के साम्प्रदायिकीकरण का एक और उदाहरण है। राजनैतिक नेता अपनी नीतियों और कार्यक्रमों का निर्धारण करने के लिए विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श करते रहते हैं। राहुल गांधी भी ऐसा ही विचार-विमर्श कर रहे थे, जिसके दौरान उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की। 

उन्होंने जो कहा वह यह था कि जिस तरह कांग्रेस अन्य वर्गों की पार्टी है, उसी तरह वह मुसलमानों की पार्टी भी है। इंकलाब के संवाददाता ने इसे तोड़ मरोड़कर इस तरह प्रस्तुत किया मानो राहुल गांधी ने यह कहा हो कि कांग्रेस मुस्लिम पार्टी है।

शुरूआत से ही कांग्रेस सभी धार्मिक समुदायों और सभी भाषा-भाषियों की पार्टी रही है। उसका लक्ष्य धर्मनिरपेक्ष-प्रजातांत्रिक भारत की स्थापना रहा है। उसने स्वाधीनता संग्राम में सभी धर्मों, क्षेत्रों और भाषा-भाषियों की भागीदारी सुनिश्चित की। कांग्रेस के नेतृत्व में चले स्वाधीनता संग्राम में पुरूषों के साथ-साथ महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। निःसंदेह, कांग्रेस वर्तमान राजनैतिक दलों में से सबसे अधिक समावेशी है। 

परंतु फिर भी पहले उसे हिन्दू विरोधी बताया गया और अब उसे मुस्लिम पार्टी कहा जा रहा है। मोदी ने पहले यह आरोप लगाया था कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यह कहा था कि भारत के राष्ट्रीय संसाधानों पर पहला हक मुसलमानों का है। दरअसल, डॉ सिंह का आशय यह था कि समाज के कमजोर वर्गों, जिनमें दलित, महिलाएं, आदिवासी और मुसलमान शामिल हैं, का देश के संसाधनों पर पहला अधिकार है। कोई भी ऐसी सरकार जो कमजोर वर्गों के लिए सकारात्मक नीतियां अपनाने की पैरोकार होगी, वह यही कहेगी।

जमीनी हकीकत यह है कि मुस्लिम समुदाय को संसाधनों पर पहला हक मिलना तो दूर की बात रही, उन्हें समाज के हाशिए पर ढकेल दिया गया है। मुसलमानों पर गोहत्या से लेकर भारतमाता की जय तक के मुद्दों को लेकर शाब्दिक और शारीरिक हमले किए जा रहे हैं। रंगनाथ मिश्र आयोग और सच्चर समिति का यह निष्कर्ष है कि स्वाधीनता के बाद से मुसलमानों की स्थिति और कमजोर हुई है। राहुल गांधी ने विनम्रता से यह स्वीकार किया कि मुसलमानों के लिए उतना कुछ नहीं किया गया जितना किया जाना चाहिए था और कांग्रेस यह सुनिश्चित करेगी कि अन्य समुदायों के साथ-साथ, मुसलमानों की समस्याओं पर भी ध्यान दिया जाए।

भाजपा नेतृत्व, कांग्रेस पर यह दुर्भावनापूर्ण और निराधार आरोप क्यों लगा रहा है? यह पहली बार नहीं है कि भाजपा धर्म को राजनीति में घसीट रही है। बम धमाकों के मामलों में पुलिस की कार्यवाही के बाद उसने कांग्रेस को हिन्दू विरोधी बताया था। और अब वह उसे मुसलमानों की पार्टी कह रही है। भाजपा को यह अच्छी तरह से पता है कि सन् 2019 के लोकसभा चुनावों में विकास के नाम पर दिखाने के लिए उसके पास कुछ भी नहीं है। जाहिर है कि उसे राम मंदिर, गाय, हिन्दू राष्ट्रवाद आदि जैसे भावनात्मक मुद्दों का सहारा लेना होगा। यह दुष्प्रचार इसी की तैयारी है।

जहां तक मुस्लिम महिलाओं की समस्याओं का सवाल है, मुसलमानों में बढ़ता असुरक्षा भाव और उनके खिलाफ हो रही हिंसा उनके लिए कम बड़ी समस्या नहीं है। मुंहजुबानी तलाक के संबंध में प्रस्तावित विधेयक इसे अपराध घोषित करता है। यह अस्वीकार्य है क्योंकि इससे मुस्लिम महिलाओं के हालात और खराब होंगे।

यह सच है कि पूर्व में कांग्रेस ने मुल्लाओं और मुस्लिम समुदाय के पश्यगामी तत्वों को प्रश्रय और प्रोत्साहन दिया। आज ज़रूरत इस बात की है कि देश में इस तरह का राजनैतिक व सामाजिक वातावरण बनाया जाए जिसमें मुसलमान खुलकर सांस ले सकें और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें। उन्हें वे सभी अधिकार और सुविधाएं उपलब्ध करवाई जानी चाहिए जो अन्य समुदायों के लोगों को उपलब्ध हैं। 

(अंग्रेजी से हिन्दी रूपांतरण अमरीश हरदेनिया)