किसानों की मांगें मानने तक सरकार को चैन से नहीं बैठने देंगे: राकेश टिकैत

Written by Navnish Kumar | Published on: February 15, 2021
सरकार के खिलाफ रुख और कड़ा करते हुए भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता राकेश टिकैत ने रविवार को कहा कि जब तक किसानों की मांगें नहीं मान ली जाती हैं तब तक सरकार को चैन से बैठने नहीं देंगे। 



करनाल जिले की इंद्री अनाज मंडी में किसानों की ‘महापंचायत’ को संबोधित करते हुए टिकैत ने कहा कि केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे 40 नेता पूरे देश में घूम-घूम कर समर्थन मांगेंगे।

टिकैत ने कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए कहा, ‘‘जब तक सरकार हमारे पक्ष में फैसला नहीं करती, समिति (प्रदर्शनकारी नेताओं) से बात नहीं करती और हमारी मांगों पर सहमत नहीं होती, तब तक हम उसे चैन से बैठने नहीं देंगे।’’ 

टिकैत ने दोहराया कि हमारे ‘‘पंच और मंच वही रहेंगे।’’ कहा, ‘‘समिति द्वारा जो भी फैसला लिया जाएगा वह सभी को स्वीकार्य होगा। देश का किसान उसके साथ खड़ा है।’’



उन्होंने कहा कि कानून न केवल किसानों को बल्कि छोटे किसानों, दिहाड़ी मजदूरों और अन्य वर्गों को भी प्रभावित करेगा। कृषि कानूनों से ‘‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली भी खत्म हो जाएगी।’’

कानूनों को लाने की सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए टिकैत ने कहा, ‘‘गोदाम पहले बन गए और कानून बाद में आया। क्या किसान नहीं जानते कि ये कानून बड़े कॉरपोरेट के पक्ष में है? इस देश में भूख का कारोबार करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।’’

उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन नहीं बल्कि, वैचारिक क्रांति शुरू हुई है। यह विचारों से शुरू होकर विचारों से ही खत्म होगी। सरकार यदि मामला सुलझाना चाहती है तो अपना नंबर दे, हमारे नेता बात कर लेंगे। 



‘महापंचायत’ में किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि किसान महीनों से प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन सरकार उनकी मांग नहीं सुन रही है।

वहीं, किसान नेता दर्शनपाल ने कहा कि 200 से अधिक किसानों ने प्रदर्शन में अपना बलिदान दिया है और उनकी कुर्बानी बेकार नहीं जाएगी।

भाकियू नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने दावा किया कि 26 जनवरी को दिल्ली में हुए घटनाक्रम के बाद किसान आंदोलन और मजबूत हुआ है। उन्होंने उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला पर जनता से गद्दारी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने कुर्सी खरीदी है। वह सत्ता के लालच में ही इस्तीफा नहीं दे रहे हैं। 

महापंचायत में उमड़े जनसैलाब से किसान नेता और आयोजक गदगद दिखे। आयोजकों किसान नेता रामपाल चहल, ओमपाल मंढाण व मंजीत चौगामा आदि की ओर से दावा किया गया कि करीब 25 हजार लोगों के खाने की व्यवस्था अनाज मंडी में की गई है। 

पुलवामा के शहीद जवानों और आंदोलन के शहीद किसानों को किया याद 
इंद्री किसान महापंचायत में भारत के शहीद जवानों और वर्तमान आंदोलन में शहीद किसानों के बलिदान को सम्मानपूर्वक याद किया गया। खास यह भी कि संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने शहीद किसानों और पुलवामा के शहीद जवानों को याद में रविवार शाम 7 से 8 बजे के बीच पूरे देश के गांवों और कस्बों में मशाल जूलूस और कैंडल मार्च का आयोजन भी किया गया।

इस दौरान संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि भाजपा आरएसएस के छद्म राष्ट्रवाद के विपरीत, इस देश के किसान वास्तव में देश की संप्रभुता, एकता और प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए समर्पित हैं। मोर्चा नेताओं ने इस तथ्य की भी निंदा की कि सरकार संसद में बिना शर्म के स्वीकार कर रही है कि उनके पास उन किसानों का कोई डेटा नहीं है जिन्होंने चल रहे आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति दी थी। मोर्चा शहीद किसानों की जानकारी के बारे में एक ब्लॉग साइट चला रहा है। अगर सरकार को परवाह है तो वहां डेटा आसानी से उपलब्ध है। मोर्चा नेताओं ने कहा कि “यह वही कठोरता है जिससे अब तक लोगों की जान चली गई है”।
 

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