चिन्मयानंद मामले में आज के अखबारों में भी एक जैसे शीर्षक

Written by संजय कुमार सिंह | Published on: September 25, 2019
चिन्मयानंद मामले में आज भी ज्यादातर अखबारों में खबरों की मुख्य बात एक जैसी है, पीड़िता को गिरफ्तारी से राहत, 26 को सुनवाई। वैसे तो इस खबर के और भी कई पहलू हैं और भिन्न अखबारों के मुख्य बिन्दु अलग हो सकते थे पर सब में लगभग एक ही है जो टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर से बिल्कुल अलग है। दिलचस्प यह है कि कम से कम कर्मचारी रखने के इस दौर में भी टाइम्स ऑफ इंडिया और नवभारत टाइम्स की खबरें अलग हैं।



पहले नवभारत टाइम्स की खबर का शीर्षक पढ़िए फिर टाइम्स की खबर पर आता हूं। नभाटा में अंदर राजनीति की खबरों के पन्ने पर भाषा की खबर का शीर्षक है, चिन्मयानंद केस में पीड़िता को गिरफ्तारी से राहत, 26 को सुनवाई। मेरी इस टिप्पणी को पूरी तरह पढ़ने के बाद सोचिए कि सभी अखबार ये कैसे तय करते होंगे कि खबर के किस हिस्से को महत्व देना है। अलग अखबारों के लिए अलग हिस्से महत्वपूर्ण क्यों नहीं है और सब सबसे कमजोर हिस्से को महत्वपूर्ण क्यों मानते हैं? क्या एजेंसी की खबर संवाददाता को श्रेय देकर छापी जा रही है या यह खबरों की धार खत्म करने की साजिश है?

आज टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर बिल्कुल अलग है। पहले पन्ने पर छपी इस खबर का शीर्षक है, चिन्मयानंद मामला : एसआईटी ने लॉ छात्रा को उठा ले जाने की कोशिश की तो हंगामा। टाइम्स ऑफ इंडिया ने शाहजहांपुर से कंवरदीप सिंह की बाइलाइन खबर छापी है इसके मुताबिक भाजपा नेता चिन्मयानंद से संबंधित दो मामलों को जांच करने के लिए बनाई गई स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम ने 23 साल की शिकायतकर्ता जो एक संबद्ध वसूली मामले में भी अभियुक्त है को डरा दिया। जब वह अदालत के रास्ते में थी तो उसे रोका गया और उठा ले जाने की कोशिश हुई। हालांकि कानून की छात्रा अपनी बात पर अड़ी रही और कहा कि वह उनके साथ नहीं जाएगी क्योंकि उसे अग्रिम जमानत के लिए अदालत में उपस्थित होना है।

दस मिनट तक चले जोरदार हंगामे के बाद उसके पिता अपने वकील के साथ वहां पहुंचे और एसआईटी सदस्यों से तर्क किया। इस बीच कई मीडिया वाले भी पहुंच गए और इससे मजबूर होकर एसआईटी वालों को यूटर्न लेना पड़ा। और उसके साथ कोर्ट गए। कुछ ही मिनट बाद स्थानीय अदालत ने अंतरिम जमानत की उसकी याचिका स्वीकार कर ली। अदालत इस मामले में कल सुनावई करेगी। अखबार ने आगे एसआईटी का पक्ष भी छापा है कि वे उसे सिर्फ पूछताछ के लिए अपने साथ चलने को कह रहे थे और हमारा इरादा सबूत इकट्ठा करने के लिए उसे घर ले जाने भर का था जबकि छात्रा ने कहा कि वह अपने भाई के साथ अदालत जा रही थी तभी एसआईटी के अधिकारियों ने उसे रोका।

इसके मुकाबले दैनिक भास्कर की खबर का शीर्षक है, चिन्मयानंद पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली लॉ छात्रा को एसआईटी ने हिरासत में लिया। खबर के मुताबिक, एसआईटी ने युवती से पूछताछ शुरू की है। उसे चिन्मयानंद को ब्लैकमेल करने और जबरन वसूली के मामले में गिरफ्तार किया जा सकता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट छात्रा की अग्रिम जमानत की अर्जी सोमवार को ही खारिज कर दी थी। वहीं शाहजहांपुर की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने छात्रा की अग्रिम जमानत याचिका पर 26 सितंबर को सुनवाई की तारीख दी है। कहने की जरूरत नहीं है कि टाइम्स ऑफ इंडिया और दैनिक भास्कर दोनों की खबर सही नहीं हो सकती है। कोई एक ही सही होगी और आज मुझे भिन्न कारणों से टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर सही या यथार्थ के करीब लग रही है।

मुमकिन है यह खबर पहले की हो। हालांकि, टाइम्स में जब ताजी खबर छपी है तो भास्कर में क्यों नहीं? इंटरनेट पर भास्कर की खबर है, मंगलवार को दिन में छात्रा को एसआईटी द्वारा हिरासत में लेने की चर्चा रही, लेकिन पुलिस का कहना है कि कोर्ट गई छात्रा को सुरक्षा प्रदान की गई थी। यह भी टाइम्स की खबर से भिन्न है और जाहिर है एसआईटी से बात किए बगैर लिखी गई है। रोकने और गिरफ्तारी के संबंध में भास्कर ने लिखा है, मंगलवार की दोपहर छात्रा सुरक्षा में लगे जवानों के साथ शाहजहांपुर में अदालत जा रही थी। लेकिन खिरनीबाग चौराहे पर एसआईटी ने रोक लिया और जबरन अपनी गाड़ी में बिठा लिया। इसके बाद एसआईटी उसे अदालत ले गई। एसआईटी अधिकारियों ने कहा कि, सुरक्षा कारणों के चलते छात्रा को गाड़ी में बिठाया गया था। अब आप कैसे तय करेंगे कि सही क्या है?

दैनिक जागरण में संवाददाता की खबर का शीर्षक है, छात्र (अंग्रेजी के स्टूडेंट के लिए जागरण छात्र लिख रहा है, अच्छी बात है) ने दी अग्रिम जमानत की अर्जी, 26 को होगी सुनवाई। इसमें भी एसआईटी की जबरदस्ती शीर्षक में नहीं है और होती तो यह पहले पन्ने की खबर थी। लेकिन अखबार लिखता है, ".... कोर्ट में पेश होने के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर एसआइटी ने पूरे समय छात्र को अपनी निगरानी में रखा।" अब आप एसआईटी की भूमिका के बारे में क्या कहेंगे? जब छात्रा को सुरक्षा मिली हुई है तो एसआईटी को इसमें टांग अड़ाने की जरूरत है? मैं नहीं जानता।

अमर उजाला में ब्यूरो की यह खबर सिंगल कॉलम में अंदर के पन्ने पर है जिसका शीर्षक है, चिन्मयानंद पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली छात्रा को राहत, गिरफ्तारी दो दिन टली। हिन्दुस्तान संवाद की खबर हिन्दुस्तान अखबार में तीन कॉलम में है। दो कॉलम में जबरन वसूली के आरोप में पकड़े गए सचिव व विक्रम की तस्वीर एक पुलिस वाले के साथ है। इस खबर का शीर्षक भी वही, 'छात्रा की जमानत पर सुनवाई 26 को' है। इस खबर में लिखा है, कोर्ट से निकलने के बाद एसआईटी ने छात्रा को अपनी गाड़ी में बैठाकर घर छोड़ा।

नवोदय टाइम्स में आज यह खबर पहले पन्ने पर है और शीर्षक है, चिन्मयानंद की जमानत की अर्जी नामंजूर। यह खबर आज और किसी अखबार में नहीं दिखी और पढ़ने से पता चला कि चिन्मयानंद के वकील ने अखबार को मंगलवार को पुरानी खबर दी जो वैसी ही है जैसी कल इस मामले में आरोपी छात्रा के बारे में छपी थी – जमानत रद्द जबकि अदालत ने कहा कि क्षेत्राधिकार वाली अदालत में मामला दायर किया जाए।

नवभारत टाइम्स ने भी इस खबर को अंदर के पन्ने पर छापा है। अदालत ने पूर्व केंद्रीय मंत्री चिन्मयानंद की जमानत की अर्जी नामंजूर कर दी है। उनके वकील ने बताया कि जमानत याचिका को अदालत ने यह कहते हुए नामंजूर कर दिया कि यह अर्जी सेशन कोर्ट में लगाई जानी चाहिए। अदालत ने रंगदारी मांगने के मामले में तीन आरोपियों- संजय, सचिन और विक्रम की जमानत याचिका भी नामंजूर कर दी। पहले पन्ने पर छपी नवोदय टाइम्स की खबर आज बताती है कि चिन्मयानंद को कल जमानत इसी कारण नहीं मिली थी। अखबार ने छात्रा की खबर इसी के साथ सिंगल कॉलम में छापी है, पीड़ित छात्रा की अग्रिम जमानत पर सुनवाई कल।

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