मणिपुर हिंसा: बम धमाके में 2 बच्चों की मौत, CRPF कैंप पर हमले में कथित दो प्रदर्शनकारियों को गोली मारी गई  

Written by sabrang india | Published on: April 8, 2026
बम हमले के विरोध में लोगों के एक समूह ने दो तेल टैंकरों और एक ट्रक में आग लगा दी, एक पुलिस चौकी में तोड़फोड़ की और मुख्य सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही रोक दी। मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने राज्य में मौजूदा हालात का जायजा लेने के लिए एक सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की।


साभार : हाईलैंड पोस्ट

पुलिस ने बताया कि मंगलवार को मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में हिंसा भड़क उठी। एक बम हमले में दो बच्चों की मौत हो गई, जबकि धमाके के विरोध में CRPF कैंप में घुसने वाली भीड़ पर गोलीबारी में दो और लोग मारे गए।

बम हमले के विरोध में लोगों के एक समूह ने दो तेल टैंकरों और एक ट्रक में आग लगा दी, एक पुलिस चौकी में तोड़फोड़ की और मुख्य सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही रोक दी। मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने राज्य में मौजूदा हालात का जायजा लेने के लिए एक सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की।

पुलिस के मुताबिक, यह सब तब शुरू हुआ जब कुछ संदिग्ध उग्रवादियों ने मोइरांग ट्रोंगलाओबी में एक घर पर बम फेंका। उस समय घर में मौजूद सभी लोग सो रहे थे। इस हमले में पांच साल के एक लड़के और उसकी छह महीने की बहन की मौत हो गई, जबकि उनकी मां घायल हो गईं।

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना से गुस्साए करीब 400 लोगों ने CRPF कैंप पर हमला कर दिया। इसके जवाब में सुरक्षा बलों को गोली चलानी पड़ी, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और करीब 20 अन्य घायल हो गए।

प्रदर्शनकारी सुरक्षा बलों से नाराज थे, क्योंकि उनका आरोप था कि सुरक्षा बलों ने उग्रवादियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

मुख्यमंत्री ने बम हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपी जाएगी।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह घटना रात करीब 1 बजे हुई, जब संदिग्ध उग्रवादियों ने बच्चों के घर पर बम फेंका। इस हमले में दोनों भाई-बहन मारे गए और उनकी मां गंभीर रूप से घायल हो गईं।

एक अधिकारी के अनुसार, मारे गए बच्चों के पिता केंद्रीय बल में तैनात थे और राज्य से बाहर ड्यूटी पर थे।

घटना के बाद सुबह स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और इलाके में एक पेट्रोल पंप के पास दो तेल टैंकरों और एक ट्रक में आग लगा दी। उन्होंने मोइरांग पुलिस थाने के सामने टायर जलाए और एक अस्थायी पुलिस चौकी को भी तोड़ दिया।

प्रदर्शनकारियों ने इंफाल पूर्वी जिले के पांगेई और खुराई तथा इंफाल पश्चिमी जिले के लांगथाबल में भी गाड़ियों की आवाजाही रोक दी और सड़कों के बीचों-बीच टायर जलाए।

अधिकारी ने बताया कि हालात पर काबू पाने के लिए इलाके में सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने इस हमले को "बर्बर कृत्य" करार दिया और कहा कि यह "मानवता पर सीधा हमला और मणिपुर में बड़ी मुश्किल से हासिल की गई शांति को भंग करने की एक सोची-समझी साजिश है। मैं इसकी कड़े से कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए कि जो लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं, उनकी पहचान की जाएगी, उन्हें ढूंढ़ निकाला जाएगा और कानून के तहत उनके साथ सख्ती से निपटा जाएगा। आतंकवाद के ऐसे कृत्यों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

मुख्यमंत्री इंफाल के एक निजी अस्पताल में गए, जहां मारे गए दोनों बच्चों की घायल मां का इलाज चल रहा था।

निचले इलाके में स्थित मोइरांग ट्रोंगलाओबी, चुराचांदपुर के पहाड़ी इलाकों के करीब है और 2023 तथा 2024 में मैतेई और कुकी-जो समूहों के बीच हुए जातीय संघर्ष के दौरान यहां लगातार गोलीबारी होती रही थी।

एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंगलवार को ट्रोंगलाओबी के पास के इलाके से एक विस्फोटक उपकरण भी बरामद किया गया।

दिन में बाद में जिले के गेलमोल में एक भीड़ ने CRPF कैंप पर धावा बोल दिया, गाड़ियों में आग लगा दी और कैंप के कुछ हिस्सों में तोड़फोड़ की। इसके जवाब में सुरक्षाकर्मियों को गोली चलानी पड़ी, जिसमें दो लोगों की जान चली गई।

घटना के तुरंत बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम ने शुरू में दावा किया कि गोलीबारी में दो लोग मारे गए और पांच अन्य घायल हो गए।

मंत्री ने कहा, “मैंने प्रदर्शनकारियों से आग्रह किया था कि वे CRPF कैंप में प्रवेश न करें और सुरक्षा बलों को बम हमले में शामिल लोगों को पकड़ने के लिए ऑपरेशन चलाने पर ध्यान केंद्रित करने दें।”

लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इस अपील पर कोई ध्यान नहीं दिया।

राज्य के गृह मंत्री ने कहा, “उन्होंने CRPF कैंप पर धावा बोल दिया, गाड़ियों में आग लगा दी और कैंप के कुछ हिस्सों में तोड़फोड़ की, जिसके कारण सुरक्षाकर्मियों को गोली चलानी पड़ी। उन्होंने या तो आत्मरक्षा में या गुस्से में गोली चलाई। दुर्भाग्य से, गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य को गोली लगी।”

देर शाम मणिपुर पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि इस घटना में 20 लोग घायल हुए हैं।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए CM सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने बम हमले की जांच NIA को सौंपने का फैसला किया है।

उन्होंने कहा कि यह फैसला राज्य के गृह मंत्री और अन्य विधायकों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद लिया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है और इस समय एक बड़ा तलाशी अभियान (combing operation) चल रहा है।

उन्होंने कहा, “पुलिस, असम राइफल्स और CRPF सहित सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। हेलीकॉप्टरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाएगा।”

जनता से अपील करते हुए CM ने लोगों से शांत रहने और भावनाओं में न बहने का आग्रह किया।

उन्होंने नागरिकों से चल रहे ऑपरेशनों में सहयोग करने और सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयासों का समर्थन करने को कहा। सिंह ने मौजूदा स्थिति की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय में एक सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता भी की।

CMO की एक विज्ञप्ति के अनुसार, बैठक में ट्रोंगलाओबी घटना पर विस्तार से चर्चा की गई।

राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने हाल की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और शांति, एकता तथा सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। मई 2023 से मणिपुर में इम्फाल घाटी के मैतेई और पहाड़ी इलाकों के कुकी-जो समूहों के बीच हुई जातीय हिंसा में कम से कम 260 लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। फरवरी 2025 से यहां राष्ट्रपति शासन लागू है।

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