कोविड के चलते प्रवासी श्रमिकों की चिकित्सा की योजना बनाए सरकार: दिल्ली हाईकोर्ट

Written by Sabrangindia Staff | Published on: May 6, 2021
नई दिल्ली। कोरोना महामारी के मद्देनजर उच्च न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को राजधानी में असंगठित क्षेत्र की विभिन्न श्रेणियों में काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों सहित समाज के बेजुबान एवं हाशिये पर रहने वाले तबकों को उपयुक्त एवं पर्याप्त राहत प्रदान करने के लिए एक योजना तैयार करने को कहा है। जस्टिस मनमोहन और आशा मेनन की पीठ ने कहा कि ‘महामारी की भयावहता के मद्देनजर प्रशासन की ओर से ठोस कदम उठाने की जरूरत है ताकि समाज के उस तबके को उपयुक्त और पर्याप्त राहत मिल सके जो अपनी आवाज नहीं उठा सकते और जो हाशिये पर हैं।



पीठ ने अधिवक्ता अभिजीत पांडे की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की है। पांडे ने याचिक में कहा है कि सभी प्रवासी श्रमिकों का असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा अधिनियम के तहत पंजीकरण करने एवं उन्हें मुफ्त दवाइयां एवं चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने के लिए सरकार को आदेश देने की मांग की है। 

याचिका में केंद्र एवं दिल्ली सरकार को यह भी निर्देश देने की मांग की है कि वह राजधानी में सभी प्रवासी श्रमिकों को अंतर-राज्यीय प्रवासी अधिनियम की आय अंतरण योजना के तहत वित्तीय सहायता दें। इसके साथ ही न्यायालय ने इस मामले में केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

पीठ ने दिल्ली के मुख्य सचिव से कहा कि वह याचिका को बतौर प्रतिवेदन स्वीकार करते हुए योजना तैयार करने को कहा है। पीठ ने मुख्य सचिव से घर से काम करने वाले श्रमिकों, स्वरोजगार श्रमिकों और असंगठित श्रमिकों के लिए दो सप्ताह के अंदर योजना बनाने पर निर्णय लेने और रिपोर्ट पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 20 मई को होगी।

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