कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनका नियमितीकरण नहीं किया जाता, तब तक नई भर्ती परीक्षा पर रोक लगाई जाए।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में 199 जूनियर क्लर्क पदों की भर्ती परीक्षा को लेकर उठा विवाद अब आंदोलन का रूप ले चुका है। अपनी मांगों को लेकर डटे तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी पिछले 24 घंटे से केंद्रीय कार्यालय के बाहर धरना दे रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनका नियमितीकरण नहीं किया जाता, तब तक नई भर्ती परीक्षा पर रोक लगाई जाए।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पहले उन्हें केंद्रीय कार्यालय से हटाकर मधुबन क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया। स्थिति तब और बिगड़ गई जब बीती रात धरना स्थल की बिजली काट दी गई। तेज गर्मी और अंधेरे के कारण कर्मचारियों का आक्रोश बढ़ गया और वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। बाद में भारी विरोध के चलते प्रशासन को बिजली आपूर्ति बहाल करनी पड़ी।
कर्मचारियों का कहना है कि प्रशासन ने नियमितीकरण के लिए एक समिति का गठन किया, जिसे उन्होंने सकारात्मक कदम माना। लेकिन समिति की रिपोर्ट और प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही 7 अप्रैल 2026 को नई भर्ती की अधिसूचना जारी कर दी गई। अप्रैल के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित इस परीक्षा को कर्मचारी अपने भविष्य के साथ अन्याय मान रहे हैं।
कर्मचारियों की मुख्य मांगें
● परीक्षा स्थगित करने की मांग: कर्मचारियों का कहना है कि जब तक संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मियों के नियमितीकरण पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक क्लर्क भर्ती परीक्षा को टाल दिया जाए।
● अनुभव को प्राथमिकता: लंबे समय से संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों को सीधी भर्ती की लिखित परीक्षा के बजाय उनके अनुभव के आधार पर प्राथमिकता दी जाए।
● उत्पीड़न पर रोक: धरना स्थल पर बुनियादी सुविधाएं बाधित करने और कर्मचारियों के बार-बार स्थानांतरण की नीति को तुरंत बंद किया जाए।
कुलपति को ज्ञापन सौंपा
कर्मचारियों ने कुलपति को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए कहा है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे हैं। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि कनिष्ठ लिपिक भर्ती परीक्षा को तुरंत स्थगित नहीं किया गया और नियमितीकरण को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। वर्तमान में विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा के मद्देनज़र भारी पुलिस बल और सुरक्षाकर्मी तैनात हैं।
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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पहले उन्हें केंद्रीय कार्यालय से हटाकर मधुबन क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया। स्थिति तब और बिगड़ गई जब बीती रात धरना स्थल की बिजली काट दी गई। तेज गर्मी और अंधेरे के कारण कर्मचारियों का आक्रोश बढ़ गया और वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। बाद में भारी विरोध के चलते प्रशासन को बिजली आपूर्ति बहाल करनी पड़ी।
कर्मचारियों का कहना है कि प्रशासन ने नियमितीकरण के लिए एक समिति का गठन किया, जिसे उन्होंने सकारात्मक कदम माना। लेकिन समिति की रिपोर्ट और प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही 7 अप्रैल 2026 को नई भर्ती की अधिसूचना जारी कर दी गई। अप्रैल के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित इस परीक्षा को कर्मचारी अपने भविष्य के साथ अन्याय मान रहे हैं।
कर्मचारियों की मुख्य मांगें
● परीक्षा स्थगित करने की मांग: कर्मचारियों का कहना है कि जब तक संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मियों के नियमितीकरण पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक क्लर्क भर्ती परीक्षा को टाल दिया जाए।
● अनुभव को प्राथमिकता: लंबे समय से संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों को सीधी भर्ती की लिखित परीक्षा के बजाय उनके अनुभव के आधार पर प्राथमिकता दी जाए।
● उत्पीड़न पर रोक: धरना स्थल पर बुनियादी सुविधाएं बाधित करने और कर्मचारियों के बार-बार स्थानांतरण की नीति को तुरंत बंद किया जाए।
कुलपति को ज्ञापन सौंपा
कर्मचारियों ने कुलपति को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए कहा है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे हैं। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि कनिष्ठ लिपिक भर्ती परीक्षा को तुरंत स्थगित नहीं किया गया और नियमितीकरण को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। वर्तमान में विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा के मद्देनज़र भारी पुलिस बल और सुरक्षाकर्मी तैनात हैं।
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