द वायर का कार्टून हटाने पर एडिटर्स गिल्ड ने आईटी मंत्रालय की आलोचना की

Written by sabrang india | Published on: February 14, 2026
Editors Guild of India ने Ministry of Electronics and Information Technology द्वारा ‘द वायर’ के इंस्टाग्राम मंच से प्रधानमंत्री पर आधारित एक कार्टून हटाने के निर्देश की कड़ी आलोचना की है। गिल्ड का कहना है कि बिना स्पष्ट और सार्वजनिक कारण बताए किसी सामग्री को हटाना तथा पृष्ठ को ब्लॉक करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।



एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा द वायर के इंस्टाग्राम पेज से पीएम नरेंद्र पर प्रकाशित कार्टून हटाने के आदेश की कड़ी निंदा करते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है।

द वायर ने लिखा, कार्टून हटाने के साथ-साथ ‘द वायर’ का इंस्टाग्राम पेज लगभग दो घंटे के लिए ब्लॉक भी कर दिया गया था, जिसे बाद में मेटा ने बहाल किया। उल्लेखनीय है कि कार्टून हटाए जाने और पेज ब्लॉक किए जाने के करीब 22 घंटे बाद ‘द वायर’ से अपने ‘आचरण की व्याख्या’ करने को कहा गया।

बयान में कहा गया कि ‘द वायर’ को आधिकारिक तौर पर यह जानकारी नहीं दी गई कि कार्टून हटाने का कारण क्या था। मौखिक रूप से जो स्पष्टीकरण दिया गया, उसमें कहा गया कि यह कार्टून देश की सुरक्षा और सम्मान को प्रभावित कर सकता है। गिल्ड ने इस तर्क को ‘निरर्थक’ बताते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान द्वारा प्रदत्त एक मौलिक अधिकार है। साथ ही, उच्च पदों पर कार्यरत सार्वजनिक पदाधिकारी भी संपादकीय समीक्षा और टिप्पणी के वैध विषय होते हैं, जिनमें कार्टून जैसी अभिव्यक्तियां भी शामिल हैं।

गिल्ड ने इस घटना को सरकार और उसके प्रतिनिधियों में आलोचना के प्रति बढ़ती असहिष्णुता का प्रतीक बताया। उसने कहा कि ऐसी कार्रवाइयाँ भारत की एक समावेशी लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में स्थापित छवि को आघात पहुंचाती हैं, जहां मीडिया, व्यंग्य और हास्य को उचित स्थान और सम्मान प्राप्त है।

वक्तव्य में हाल ही में जारी सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम, 2026 का भी संदर्भ दिया गया। इसमें Internet Freedom Foundation के हवाले से कहा गया कि नए प्रावधान अत्यधिक व्यापक और अस्पष्ट हैं, जिससे व्यंग्य, पैरोडी, राजनीतिक टिप्पणी तथा कलात्मक अभिव्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

एडिटर्स गिल्ड ने सरकार से आग्रह किया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल सामग्री के विनियमन के नाम पर प्रस्तावित नए नियमों की गहन और निष्पक्ष समीक्षा की जाए। गिल्ड का कहना है कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ये प्रावधान मीडिया की स्वतंत्रता को कमजोर करने या अभिव्यक्ति की आज़ादी को सीमित करने का साधन न बनें।

इस प्रकरण में DIGIPUB News India Foundation और Press Club of India ने भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। डिजीपब ने अपने वक्तव्य में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के अंतर्गत प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला है। संगठन ने स्पष्ट किया कि व्यंग्य और आलोचनात्मक प्रश्न लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर नहीं करते, बल्कि उसे सशक्त और जीवंत बनाए रखते हैं।

डिजीपब ने पूछा है कि सरकार ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि कार्टून किस कानून का उल्लंघन करता है।

वहीं, Press Club of India ने भी ‘द वायर’ के इंस्टाग्राम पृष्ठ को अस्थायी रूप से अवरुद्ध किए जाने तथा 52 सेकंड की व्यंग्यात्मक वीडियो क्लिप हटाए जाने की कड़ी आलोचना की। क्लब का कहना है कि वेबसाइट को न तो सरकार की ओर से और न ही सोशल मीडिया कंपनियों की ओर से कोई पूर्व सूचना दी गई थी। बयान में यह भी कहा गया कि बिना स्पष्ट कारण बताए किसी मीडिया संस्थान की सामग्री को सेंसर करना और उसे सार्वजनिक दृश्य से हटाना अब चिंताजनक रूप से सामान्य होता जा रहा है।

क्लब ने याद दिलाया कि व्यंग्य और कार्टून भारतीय पत्रकारिता की दीर्घकालिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा रहे हैं, और ऐसे सामग्री को दबाना संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कमजोर करता है। साथ ही, उसने यह प्रश्न भी उठाया कि वीडियो को किस आधार पर सेंसर किया गया तथा इंस्टाग्राम पृष्ठ को अवरुद्ध करने का निर्णय किन कारणों से लिया गया।

उल्लेखनीय है कि 9 फरवरी को ‘द वायर’ का इंस्टाग्राम पृष्ठ, जिसके 13 लाख से अधिक अनुयायी हैं, भारत में लगभग दो घंटे तक उपलब्ध नहीं रहा। इस दौरान उपयोगकर्ताओं को एक संदेश प्रदर्शित हो रहा था, जिसमें लिखा था कि ‘कानूनी अनुरोध का पालन करने के कारण यह सामग्री भारत में उपलब्ध नहीं है।’

इन घटनाक्रमों के उपरांत मीडिया संगठनों ने सरकार और डिजिटल मंच संचालित करने वाली कंपनियों से पारदर्शिता अपनाने तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप और निष्पक्ष ढंग से कार्रवाई करने की अपील की है। 

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