जामिया के छात्रों की याचिका पर हाईकोर्ट ने सुदर्शन न्यूज के विवादित शो के प्रसारण पर लगाई रोक

Written by sabrang india | Published on: August 28, 2020
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने सुदर्शन न्यूज के विवादित शो के प्रसारण पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों की अपील पर यह रोक लगाई है। बता दें कि सुदर्शन न्यूज ने गुरुवार 27 अगस्त को अपने एक कार्यक्रम का प्रोमो जारी किया था जिसमें वह 'नौकरशाही में मुसलमानों की घुसपैठ के षडयंत्र का बड़ा खुलासा' करने का दावा करते हुए नजर आ रहे थे।



न्यायमूर्ति नवीन चावला की एकल पीठ ने एक तत्काल सुनवाई में स्थगन आदेश पारित किया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट शादान फरसाट ने सुदर्शन न्यूज पर "बिंदास बोल" नामक कार्यक्रम के प्रस्तावित प्रसारण पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसे आज रात 8 बजे प्रसारित किया जाना था, जिसमें कथित रूप से जामिया मिल्लिया इस्लामिया, इसके पूर्व छात्र और बड़े पैमाने पर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ घृणा, हमला और भड़काने वाली सामग्री शामिल है।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उन्होंने पत्रकार सुरेश चव्हाणके द्वारा शो के ट्रेलर को देखा है, जिसमें चव्हाणके खुलेआम जामिया मिल्लिया इस्लामिया और मुस्लिम समुदाय के छात्रों के खिलाफ अभद्र भाषा और मानहानि में लिप्त हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से शो के उन दावों को प्रस्तुत किया गया जिसमें कहा गया था कि सिविल सेवा परीक्षा 2020 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों की सफलता "मुसलमानों द्वारा सिविल सेवा को समाप्त करने की साजिश" का प्रतिनिधित्व करती है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से दावा प्रस्तुत किया गया था कि चव्हाणके ने खुले तौर पर गैर-मुस्लिम दर्शकों को अपने लक्ष्य से भड़का कर कहा था कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया के जिहादी या आतंकवादी जल्द ही कलेक्टर और सचिव की तरह सत्ता और सत्ता के पदों पर आसीन होंगे।


सुदर्शन न्यूज ने 27 अगस्त को अपने एक कार्यक्रम का प्रोमो जारी किया। इस कार्यक्रम को आज प्रसारित होना था। इसमें चैनल के मालिक सुरेश चव्हाणके 'नौकरशाही में मुसलमानों की घुसपैठ के षडयंत्र का बड़ा खुलासा' करने का दावा कर रहे हैं। 

जैसे ही यह प्रोमो सामने आया चौतरफा चैनल और इसके मालिक की आलोचना शुरू हो गई थी। गुरुवार को ट्विटर पर दिनभर 'सस्पेंड सुरेश चव्हाणके' ट्रेंड करता रहा। कार्यक्रम का लहजा सांप्रदायिक होने के कारण इस पर तत्काल कार्रवाई की मांग की जा रही थी।

वहीं इस बीच आईपीएस एसोसिएशन ने भी इसकी निंदा की और इसे सांप्रदायिक एवं गैर-जिम्मेदाराना बताया। एसोसिएशन ने ट्वीट में लिखा, ‘सुदर्शन टीवी पर एक न्यूज स्टोरी में धर्म के आधार पर सिविल सेवा के कर्मचारियों को टारगेट किया जा रहा है। हम इस तरह के सांप्रदायिक और गैर जिम्मेदाराना पत्रकारिता की निंदा करते हैं।’

इसके अलावा एक स्वतंत्र थिंक टैंक इंडियन पुलिस फाउंडेशन ने भी ट्रेलर की टोन के खिलाफ ट्वीट किया है और इसे ‘नफरत फैलाने’ तथा ‘कट्टरता का उदाहरण’ बताया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘आईएएस/आईपीएस में शामिल होने वाले अल्पसंख्यक व्यक्तियों के खिलाफ नोएडा के टीवी चैनल पर चलाई जा रही हेट स्टोरी खतरनाक कट्टरता है। हम इसे रीट्वीट नहीं कर रहे हैं क्योंकि यह पूर्णतया जहर है। हमें उम्मीद है कि न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी, यूपी पुलिस और संबंधित सरकारी अथॉरिटी सख्त कार्रवाई करेगी।’

वहीं, सुरेश चव्हाणके ने आईपीएस एसोसिएशन के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा था कि मुद्दे को जाने बगैर वे इस तरह की टिप्पणी कर रहे हैं। चव्हाणके ने कहा है कि यदि संगठन चाहता है तो वे उनके शो में आकर अपनी बात रख सकते हैं।

अन्य कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने सुदर्शन न्यूज के इस ट्रेलकर पर कड़ी आपत्ति जताई थी और इसे सांप्रदायिक बताया था। टीवी पर्सनैलिटी तहसीन पूनावाला ने भी दिल्ली पुलिस और नेशनल ब्रॉडकास्टिंग एसोशिएशन के अध्यक्ष रजत शर्मा के पास शिकायत दायर कर इस पर कार्रवाई की मांग की। पूनावाला ने अपना शिकायत पत्र ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है।

इसके जवाब में चव्हाणके ने कहा कि इस तरह के षड्यंत्र के पीछे ‘आतंकी समूह के मुखिया जाकिर नाईक’ शामिल हैं। यह पहला मौका नहीं है जब सुदर्शन टीवी और सुरेश चव्हाणके भड़काऊ और नफरती कार्यक्रम करने के कारण आलोचनाओं के घेरे में हैं।

जून 2018 में दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग (डीएमसी) ने सुदर्शन न्यूज़ को एक नोटिस जारी कर उस रिपोर्ट पर माफी मांगने को कहा था जिसमें उन्होंने उत्तरी दिल्ली के बवाना इलाके के कुछ स्थानीय लोगों को कथित तौर पर ‘रोहिंग्या’ और ‘बांग्लादेशी ‘ बताया गया था। आयोग ने चैनल से कहा था कि इसका सबूत पेश करें, वरना बिना शर्त लिखित माफी मांगें।

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