'किस-किस को कैद करोगे' - राष्ट्रीय PUCL के आह्वाहन पर 28 अगस्त को अभियान में जुड़ने की अपील

Written by sabrang india | Published on: August 28, 2020
झारखंड जनाधिकार महासभा ने प्रेस को जारी एक बयान में कहा कि आज देश अघोषित आपातकाल से गुज़र रहा है। दिन-पर-दिन लोगों की अभिव्यक्ति की आज़ादी और अन्य लोकतान्त्रिक अधिकारों पर हमले बढ़ते जा रहे हैं। केंद्र सरकार देश को धर्मनिरपेक्षता और समानता के संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध धार्मिक बहुसंख्यकवाद की ओर ले जा रही है। साथ ही, सरकार की जन विरोधी नीतियों और विफ़लताओं पर सवाल उठाने वालों पर लगातार दमन कर रही है। 



बयान में आगे कहा गया, 'इसका एक स्पष्ट उदहारण है भीमा-कोरेगांव मामला जिसमें विभिन्न राज्यों के 12 सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों, लेखकों व शिक्षकों को फ़र्ज़ी आरोपों पर महीनों से जेल में डाला हुआ है। ये ऐसे नागरिक हैं जो लगातार भाजपा व मोदी सरकार की हिंदुत्व की राजनीति पर सवाल उठाते रहे हैं और वर्षों से आदिवासी, दलित, अल्पसंख्यकों व अन्य वंचित समुदायों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे हैं। इस दौरान झारखंड में दशकों से आदिवासियों के अधिकारों के लिए संघर्षरत स्टैन स्वामी के आवास पर कई बार छापा मारा गया और उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है।'

झारखंड जनाधिकार महासभा ने कहा कि इन सभी कार्यकर्ताओं पर कई फ़र्ज़ी मामले दर्ज किए गए जिनमें मुख्यतः विधि विरुद्ध क्रिया-कलाप (निवारण) अधिनियम (UAPA) और देशद्रोह की धाराएं शामिल हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं के दमन के लिए यूएपीए (UAPA) व 124क (राजद्रोह) जैसे जन विरोधी कानून व धाराओं का इस्तेमाल लगातार बढ़ते जा रहा है। पिछले कुछ सालों में झारखंड में भी अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं पर इनका इस्तेमाल किया गया है।

महासभा ने राष्ट्रीय PUCL ने भीमा-कोरेगांव मामले में फंसाए गए सामाजिक कार्यकर्ताओं की रिहाई, सामाजिक कार्यकर्ताओं पर दमन के विरुद्ध एवं शांतिपूर्ण विरोध के लोकतांत्रिक अधिकारों के संरक्षण के लिए 28 अगस्त से 5 सितम्बर तक एक राष्ट्रव्यापी अभियान का आव्हान दिया है। झारखंड जनाधिकार महासभा ने राज्य के सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं और जन संगठनों से अपील की है कि वे भी इस अभियान से जुडें।

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