एएमयू महिला प्रोफेसर ने विभागाध्यक्ष पर आरोप लगाया है कि वह कहते हैं “तुम हिंदू हो, बीएचओ चली जाओ”। विभागाध्यक्ष ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। मामले में यूनिवर्सिटी इंतजामिया ने जांच के आदेश दिए हैं।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के राजनीति विज्ञान विभाग की प्रो. रचना कौशल ने अपने ही विभाग के अध्यक्ष पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है। प्रो. रचना का कहना है कि उनसे कहा कि गया कि “तुम हिंदू हो, बीएचओ चली जाओ”। पांच महीने पुराने इस मामले का वीडियो अब वायरल हो रहा है। मामले में यूनिवर्सिटी इंतजामिया ने जांच के आदेश दिए हैं।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, प्रो. रचना ने बताया कि उनके साथ अन्याय हो रहा है। उन्हें सांप्रदायिक कहा जा रहा है। 22 सितंबर 2025 को इसकी शिकायत कुलपति से की थी। कुलपति ने उन्हें बुलाकर उनकी बात सुनी। विभागाध्यक्ष द्वारा कही सांप्रदायिक बातों की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सुनी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। शिकायत के एक महीने के बाद उन्होंने 22 अक्तूबर 2025 को सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत कुलपति की टिप्पणी और संबंधित कार्यालयों द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी।
उन्होंने बताया कि 11 नवंबर 2025 को मिले उत्तर में कहा गया कि पत्र कुलपति के विचाराधीन हैं। प्रो. कौशल ने कहा कि उन्हें सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन की ओर से दो सितंबर 2025 को छात्रों के एक पत्र के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया, जबकि वह पत्र उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया। प्रो. रचना ने कहा कि एएमयू शिक्षक संघ द्वारा कुलपति की टिप्पणी पर इंतजामिया ने संघ को नोटिस दे दिया, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। विभागाध्यक्ष प्रो. नफीस अंसारी ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में कई हिंदू छात्र पीएचडी कर रहे हैं।
न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, सीनियर प्रोफेसर ने आरोप लगाया है कि उन्हें लगभग तीन दशकों से धार्मिक भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। उनका दावा है कि लगातार तनाव के कारण उन्हें पर्सनल और प्रोफेशनल लेवल पर बहुत ज्यादा परेशानी हुई, जिसमें मिसकैरेज भी शामिल है।
पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट की प्रोफेसर रचना कौशल ने सीनियर अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि उन्हें इसलिए टारगेट किया जा रहा है क्योंकि वह हिंदू हैं। उन्होंने वाइस चांसलर को ऑडियो रिकॉर्डिंग और डॉक्यूमेंट्स के साथ एक फॉर्मल शिकायत दी है और कहा है कि वह इस मामले में FIR दर्ज कराने की योजना बना रही हैं।
प्रोफेसर कौशल के अनुसार, उत्पीड़न तब शुरू हुआ जब उन्होंने 1998 में AMU में लेक्चरर के तौर पर जॉइन किया था। उन्होंने कहा, "मेरी नियुक्ति के तुरंत बाद भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न शुरू हो गया। मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी में मेरी धार्मिक पहचान का इस्तेमाल मेरे खिलाफ किया जाएगा।"
उन्होंने आरोप लगाया कि यह दबाव सालों तक जारी रहा और उनकी जिंदगी के मुश्किल समय में यह और बढ़ गया। 2004 में, जब वह प्रेग्नेंट थीं, तो कथित तौर पर उन पर बहुत ज्यादा काम का दबाव डाला गया और मानसिक तनाव दिया गया, जिसके कारण उनका मिसकैरेज हो गया। प्रोफेसर कौशल ने बताया कि उनके पति डॉ. डी.के. पांडे का 2012 में निधन हो गया। वह AMU के JN मेडिकल कॉलेज में सीनियर प्रोफेसर थे।
प्रोफेसर ने फैकल्टी ऑफ सोशल साइंसेज के मौजूदा डीन, प्रोफेसर मोहम्मद नफीस अहमद अंसारी पर भी उनके धर्म के बारे में बार-बार कमेंट करने का आरोप लगाया है।
उन्होंने आरोप लगाया, "डीन ने मुझसे कहा, 'तुम हिंदू हो, BHU जाओ।' उन्होंने यह भी दावा किया कि हिंदू टीचर जानबूझकर मुस्लिम स्टूडेंट्स को पढ़ाने से बचते हैं और कॉन्फ्रेंस में उनकी एक्टिविटीज़ पर सवाल उठाए।"
उन्होंने कहा, "ये कमेंट पर्सनल तौर पर अपमानजनक हैं और यूनिवर्सिटी के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को कमजोर करते हैं।" उन्होंने आगे कहा कि ऐसे कमेंट से काम करने का माहौल खराब होता है। प्रोफेसर कौशल ने कथित कमेंट की ऑडियो रिकॉर्डिंग सबूत के तौर पर वाइस चांसलर प्रोफेसर नईमा खातून को सौंपी है।
कथित उत्पीड़न के बावजूद, प्रोफेसर कौशल ने कहा कि उन्होंने सालों तक पढ़ाना जारी रखा, इस उम्मीद में कि स्थिति सुधरेगी। हालांकि, अब उनका मानना है कि कानूनी कार्रवाई ही एकमात्र विकल्प बचा है। उन्होंने कहा है कि वह इस मामले को पब्लिक करना चाहती हैं और पुलिस से संपर्क करेंगी।
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अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, प्रो. रचना ने बताया कि उनके साथ अन्याय हो रहा है। उन्हें सांप्रदायिक कहा जा रहा है। 22 सितंबर 2025 को इसकी शिकायत कुलपति से की थी। कुलपति ने उन्हें बुलाकर उनकी बात सुनी। विभागाध्यक्ष द्वारा कही सांप्रदायिक बातों की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सुनी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। शिकायत के एक महीने के बाद उन्होंने 22 अक्तूबर 2025 को सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत कुलपति की टिप्पणी और संबंधित कार्यालयों द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी।
उन्होंने बताया कि 11 नवंबर 2025 को मिले उत्तर में कहा गया कि पत्र कुलपति के विचाराधीन हैं। प्रो. कौशल ने कहा कि उन्हें सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन की ओर से दो सितंबर 2025 को छात्रों के एक पत्र के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया, जबकि वह पत्र उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया। प्रो. रचना ने कहा कि एएमयू शिक्षक संघ द्वारा कुलपति की टिप्पणी पर इंतजामिया ने संघ को नोटिस दे दिया, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। विभागाध्यक्ष प्रो. नफीस अंसारी ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में कई हिंदू छात्र पीएचडी कर रहे हैं।
न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, सीनियर प्रोफेसर ने आरोप लगाया है कि उन्हें लगभग तीन दशकों से धार्मिक भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। उनका दावा है कि लगातार तनाव के कारण उन्हें पर्सनल और प्रोफेशनल लेवल पर बहुत ज्यादा परेशानी हुई, जिसमें मिसकैरेज भी शामिल है।
पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट की प्रोफेसर रचना कौशल ने सीनियर अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि उन्हें इसलिए टारगेट किया जा रहा है क्योंकि वह हिंदू हैं। उन्होंने वाइस चांसलर को ऑडियो रिकॉर्डिंग और डॉक्यूमेंट्स के साथ एक फॉर्मल शिकायत दी है और कहा है कि वह इस मामले में FIR दर्ज कराने की योजना बना रही हैं।
प्रोफेसर कौशल के अनुसार, उत्पीड़न तब शुरू हुआ जब उन्होंने 1998 में AMU में लेक्चरर के तौर पर जॉइन किया था। उन्होंने कहा, "मेरी नियुक्ति के तुरंत बाद भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न शुरू हो गया। मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी में मेरी धार्मिक पहचान का इस्तेमाल मेरे खिलाफ किया जाएगा।"
उन्होंने आरोप लगाया कि यह दबाव सालों तक जारी रहा और उनकी जिंदगी के मुश्किल समय में यह और बढ़ गया। 2004 में, जब वह प्रेग्नेंट थीं, तो कथित तौर पर उन पर बहुत ज्यादा काम का दबाव डाला गया और मानसिक तनाव दिया गया, जिसके कारण उनका मिसकैरेज हो गया। प्रोफेसर कौशल ने बताया कि उनके पति डॉ. डी.के. पांडे का 2012 में निधन हो गया। वह AMU के JN मेडिकल कॉलेज में सीनियर प्रोफेसर थे।
प्रोफेसर ने फैकल्टी ऑफ सोशल साइंसेज के मौजूदा डीन, प्रोफेसर मोहम्मद नफीस अहमद अंसारी पर भी उनके धर्म के बारे में बार-बार कमेंट करने का आरोप लगाया है।
उन्होंने आरोप लगाया, "डीन ने मुझसे कहा, 'तुम हिंदू हो, BHU जाओ।' उन्होंने यह भी दावा किया कि हिंदू टीचर जानबूझकर मुस्लिम स्टूडेंट्स को पढ़ाने से बचते हैं और कॉन्फ्रेंस में उनकी एक्टिविटीज़ पर सवाल उठाए।"
उन्होंने कहा, "ये कमेंट पर्सनल तौर पर अपमानजनक हैं और यूनिवर्सिटी के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को कमजोर करते हैं।" उन्होंने आगे कहा कि ऐसे कमेंट से काम करने का माहौल खराब होता है। प्रोफेसर कौशल ने कथित कमेंट की ऑडियो रिकॉर्डिंग सबूत के तौर पर वाइस चांसलर प्रोफेसर नईमा खातून को सौंपी है।
कथित उत्पीड़न के बावजूद, प्रोफेसर कौशल ने कहा कि उन्होंने सालों तक पढ़ाना जारी रखा, इस उम्मीद में कि स्थिति सुधरेगी। हालांकि, अब उनका मानना है कि कानूनी कार्रवाई ही एकमात्र विकल्प बचा है। उन्होंने कहा है कि वह इस मामले को पब्लिक करना चाहती हैं और पुलिस से संपर्क करेंगी।
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