बनारस में दिखेगा सांप्रदायिक सद्भाव का नजारा, दिन में होली, रात में रौशन होंगे चिराग

Written by Sabrangindia Staff | Published on: March 5, 2022
इस बार होली के रंग-गुलाल संग शब ए बारात भी निकाली जाएगी। वाराणसी के लोग होली के त्यौहार को हिंदू-मुस्लिम एकता का मिसाल बनाने की तैयारी कर चुके हैं। यूपी के चुनावी सीजन में चले व्यंग्य बाणों और राजनीतिक दलों द्वारा किए गए वैमनस्यता के माहौल को यह दिन खास बना देगा। 



शुक्रवार को शिया समुदाय ने 30 रजब 1443 हिजरी जुमे को नमाज पर चांद की तस्दीक हुई। चांद के दिखते ही शिया समुदाय के लोगों ने इमाम हुसैन की बहन जनाबे ज़ैनब की जयंती का जश्न मनाना शुरू कर दिया है। शहर भर में कई महफिलें सजीं। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता और हज़रत अली समिति के सचिव हाज़ी फरमान हैदर ने बताया की इस वर्ष 18 मार्च को शब्बारात और होली एक साथ गंगा-जमुनी तहजीब को दर्शाएगा।

हाजी फरमान हैदर ने बताया कि 7 मार्च को इमाम हुसैन और 8 मार्च को हज़रत अब्बास की जयंती पूरी अकीदत से मनाई जाएगी। इस्लामिक कैलेंडर का 8वां महीना प्यारे नबी हज़रत मोहम्मद के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि हम इस वर्ष दिन में होली खेलेंगे और रात में कब्रिस्तान पर चिरागों को रोशन करेंगे। शाम होते ही हिंदू भाई अबीर खेलेंगे तो हम कब्रिस्तान में दुआख्वानी के लिए जुटेंगे। 

वाराणसी में हजारों साल से हिंदू-मुस्लिम एकता का इतिहास रहा है। लिहाजा, आगे भी यह कायम रहेगा। कबीर की धरती पर यह मिसाल उस रोज कायम होगा। इस दिन दो त्योहार को लेकर वाराणसी का प्रशासन भी काफी मुस्तैद रहेगा। चुनाव के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारियां की जाएंगी।
 
शब ए बारात गुनाहों की माफी की रात होती है। एक रात की इबादत को एक हजार रात की इबादत के समान बताया जाता है। इस रात में तोबा को भी कबूल करने का रिवाज है। अल्लाह ताला रहमतों और नेकियों के दरवाजे इस रात खोल देते हैं। बरकत बरसेगा।

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