सहारनपुर में भूख से 19 वर्षीय प्रवासी मजदूर की मौत, मानवाधिकार आयोग ने योगी सरकार को भेजा नोटिस

Published on: May 28, 2020
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में भूख से एक उन्नीस वर्षीय प्रवासी मजदूर विपिन कुमार की मौत का संज्ञान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इसको लेकर यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार को नोटिस भी भेजा है। आयोग ने विपिन की भूख से हुई मौत को मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मुद्दा बताया है। 



मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, प्रवासी मजदूर लॉकडाउन के बीच पंजाब के लुधियाना से पैदल ही निकला था और 6 दिनों में उसने करीब  350 किलोमीटर की दूरी तय की थी। इस दौरान उसके पास खाने को कुछ न रहा और भूख से उसकी मौत हो गई। इसी रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है।

एनएचआरसी ने देखा है कि लॉकडाउन में यह पहली बार नहीं है जब प्रवासी  मजदूर की दर्दनाक मौत हुई। कई लोगों की बीमारी तो कई की घर वापस जाने क चलते रास्ते में मौत हो गई। कई गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी तो रास्ते में ही हो गई। कई मजदूरों की घर पहुंचने के बाद मौत हो गई।

कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लागू देशव्यापी लॉकडाउन के बीच देश में फंसे प्रवासी श्रमिकों को हो रही समस्याओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि प्रवासी मजदूरों के आवागमन, रहने और खाने-पीने में केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से की गई व्यवस्था में कई खामियां हैं। यह अपर्याप्त है। प्रवासी मजदूर कठिन दौर में हैं जिसके लिए प्रभावकारी कदम उठाने की आवश्यकता है।

कोर्ट ने कहा कि अखबार की रिपोर्ट और मीडिया रिपोर्ट में लगातार प्रवासी मजदूरों के दुर्भाग्यपूर्ण और दयनीय हालात को लंबे समय से दिखाया जा रहा है। श्रमिक पैदल और साइकिल से चलने को मजबूर हैं। कोर्ट ने कहा कि प्रवासी मजदूरों को प्रशासन द्वारा उन स्थानों पर भोजन और पानी उपलब्ध नहीं कराए जाने की शिकायत की गई है जहां वे फंसे हुए थे। राजमार्ग पर पैदल, साइकिल या अन्य अव्यवस्थित परिवहन से श्रमिक बिना अन्न और पानी के जाने को विवश हैं।

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