स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद निशु आजाद पर नई मुसीबत, सोसाइटी से घर खाली करने का दबाव क्यों बढ़ा?

Written by sabrang india | Published on: September 9, 2026
पड़ोसियों के अनुसार, शनिवार को बाहर कुछ लोग जरूर खड़े थे, लेकिन पत्थरबाजी नहीं हुई। निशु के घर से सटी बालकनी वाली एक पड़ोसी ने बताया कि उनके घर पर एक कंकड़ तक नहीं आया। न कोई शीशा टूटा और न ही उन्हें किसी तरह की आवाज सुनाई दी।



दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी संजय कुमार पर जानलेवा हमले के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के जेल जाने के बाद भी पीड़ित परिवार की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। खासकर 14 वर्षीय दलित कंटेंट क्रिएटर निशु आजाद को लगातार विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

अंबेडकरवादी और नास्तिक विचारों के लिए पहले हिंदुत्ववादी समूहों की ऑनलाइन ट्रोलिंग, धमकियों और रेप थ्रेट का सामना कर चुकीं निशु अब अपनी ही सोसाइटी के कुछ लोगों के विरोध के बीच हैं।

यूट्यूब चैनल ‘भारत गान’ ने विक्रम एन्क्लेव इलाके में पड़ोसियों से बात की। कैमरे पर सामने आई ज्यादातर आवाजों में एक बात समान थी- वे नहीं चाहते कि निशु और उनका परिवार इस सोसाइटी में रहे।

द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, निशु ने 5 सितंबर की रात सोशल मीडिया पर क्लिप डालकर आरोप लगाया था कि अज्ञात लोगों ने घर पर पत्थर फेंके। उन्होंने दिल्ली पुलिस और गाजियाबाद पुलिस को टैग कर अपने परिवार के लिए सुरक्षा मांगी, दूसरे पोस्ट में उसने पूछा “अगर आज रात हमारे साथ कुछ हुआ तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?” निशु ने अज्ञात लोगों द्वारा उसके घर पर पत्थर-ईंट फेंकने और खिड़की पर निशाना लगाने की बात कही। एसीपी शालीमार गार्डन ने तब कहा था कि सूचना मिल गई है और संबंधित एसएचओ मामले को देख रहे हैं।

‘भारत गान’ के साथ बातचीत में पड़ोसियों ने पथराव के आरोप को सिरे से खारिज किया। सोसाइटी की महिलाओं का कहना था कि इलाका “एकदम क्लीन” है और पिछले दस वर्षों में ऐसी कोई घटना नहीं हुई। उनके मुताबिक, शनिवार को बाहर कुछ लोग जरूर खड़े थे, लेकिन पथराव नहीं हुआ।

निशु के घर से सटी बालकनी वाली एक पड़ोसी ने दावा किया कि उनके घर पर एक कंकड़ तक नहीं आया, न शीशा टूटा और न ही उन्हें किसी तरह की आवाज सुनाई दी। उनका तर्क था, “अगर पत्थर आते तो कांच फूटता।”

सुमन ने बताया कि उस रात सोसाइटी के मंदिर में कार्यक्रम था और वह रात करीब दो बजे तक वहीं थीं। उनके मुताबिक, वहां पथराव जैसी कोई घटना नहीं हुई।

छाया सोनी ने कहा कि निशु करीब एक महीने पहले यहां नहीं थीं। उनका दावा था कि सोसाइटी में बाहर से किसी के घुसने की गुंजाइश नहीं है और कैमरों में भी ऐसा कुछ दिखाई नहीं दिया। उन्होंने कहा कि किसी खिड़की का शीशा भी नहीं टूटा।

वहीं, नेहा मिश्रा ने बताया कि वह रातभर जाग रही थीं और उन्हें कथित हमले की जानकारी बाद में मिली। उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों में सोसाइटी में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। उनके मुताबिक, कैमरा फुटेज से ही स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में पत्थर फेंके गए थे या नहीं।

भारत गान’ चैनल से बातचीत में सोसाइटी के निवासी बार-बार तीन प्रमुख बातें दोहराते नजर आए। पहली चिंता सोसाइटी की बदनामी को लेकर है। उनका कहना है कि कल पथराव का जो वीडियो सामने आया, वे उस पर विश्वास नहीं करते और नहीं चाहते कि इस घटना के कारण पूरी सोसाइटी और मोहल्ले की बदनामी हो।

दूसरी चिंता पुलिस की गाड़ियों और लगातार हो रही आवाजाही को लेकर है। निवासियों के मुताबिक, सोसाइटी में सात-आठ पुलिस गाड़ियां आने के बाद बच्चों में डर का माहौल है। माताओं का कहना है कि बच्चे अब पार्क और मंदिर तक नहीं जा रहे और घर से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं। एक महिला ने कहा, “डर 14 साल की लड़की से नहीं है, पुलिस की गाड़ियां देखकर बच्चे डरते हैं। उन्होंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा।”

तीसरी चिंता निशु के सोशल मीडिया पर व्यक्त विचारों के बच्चों पर पड़ने वाले असर को लेकर है। कई अभिभावकों का कहना है कि उनके बच्चे किशोर उम्र के हैं और सोशल मीडिया पर वीडियो देखकर वे उन्हीं बातों को सीख सकते हैं।

इसी वजह से कुछ निवासी निशु के व्यवहार और सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए कहते हैं, “ऐसा इंसान जो पूरी सोसाइटी को स्पॉइल कर रहा हो, बच्चों को स्पॉइल कर रहा हो, इस सोसाइटी में नहीं चाहिए।”

साक्षात्कार के दौरान धार्मिक मुद्दे को लेकर आपत्ति सबसे तीखी नजर आई। पड़ोसियों ने निशु की उन कथित सोशल मीडिया टिप्पणियों का हवाला दिया, जिन्हें वे देवी-देवताओं और प्रधानमंत्री से जुड़ा बताते हैं। एक निवासी ने कहा, “जो भगवान को नहीं मानते, उनके लिए कुछ कहा नहीं जा सकता।” इसके बाद उन्होंने निष्कर्ष निकाला, “तभी भावना आई कि यहां से खाली हो जाए।”

एक अन्य निवासी का कहना था कि जो लोग हिंदू धर्म में विश्वास नहीं रखते, उन्हें ऐसी सोसाइटी में नहीं रहना चाहिए, जहां सामने मंदिर है और अधिकांश लोग धार्मिक आस्थाओं को मानते हैं।

कैमरे पर कुछ महिलाओं ने भी इसी तरह की नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था, “जो हिंदू देवी-देवताओं पर टिप्पणी करते हैं और गलत माहौल बनाते हैं, इसलिए नहीं चाहते कि वे कॉलोनी में रहें। जल्द खाली करके जाएं।”

बातचीत के दौरान SC/ST एक्ट का जिक्र भी सामने आता है। कुछ निवासी कहते हैं, “हमारे हाथ बंधे हैं, SC/ST भी लग सकता है।” उनका तर्क है कि जो व्यक्ति “भगवान को नहीं छोड़ सकता, वह हममें से किसी को क्या छोड़ेगा।”

कुछ निवासी यह आशंका भी जताते हैं कि भारद्वाज पर लगाई गई धाराएं उनके बच्चों पर भी लागू हो सकती हैं। इसी वजह से वे उन्हें सोसाइटी से बाहर भेजने को लेकर हिचकिचाहट की बात करते हैं।

एक महिला कहती हैं कि आजकल इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं और उन्हें डर है कि जो व्यक्ति धर्म में विश्वास नहीं रखता, वह आगे चलकर कुछ भी कर सकता है या किसी पर मामला दर्ज करा सकता है। पड़ोस में रहने वाले छह और बारह साल के बच्चों का जिक्र करते हुए कुछ महिलाएं कहती हैं कि वे नहीं चाहतीं कि बच्चों के आसपास का माहौल इस तरह का हो।

किरायेदारी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ निवासियों का कहना है कि उन्हें पहले यह जानकारी नहीं थी कि निशु कौन हैं। उनके मुताबिक, वीडियो वायरल होने और पुलिस के आने के बाद ही उनकी पहचान के बारे में पता चला।

कुछ लोग यह आशंका भी जताते हैं कि मकान मालिक ने शायद उनकी कथित वास्तविक पहचान के आधार पर मकान किराए पर नहीं दिया होगा और रेंट एग्रीमेंट किसी दूसरे नाम से किया गया हो सकता है। हालांकि, बातचीत के दौरान ऐसे दस्तावेज कैमरे पर नहीं दिखाए गए।

कई महिलाओं का कहना है कि सोसाइटी में वे एक परिवार की तरह रहती हैं और निशु को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानतीं। बातचीत में कई निवासी एक ही बात दोहराते हैं—“जहाँ घर मिले, चली जाएँ, यहाँ नहीं रहें।”

स्वतंत्र भारद्वाज को लेकर क्यों है विवाद?

मामला जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन से जुड़ा है। आरोप है कि स्वतंत्र भारद्वाज ने निशु के पिता संजय कुमार के सिर पर वार किया था। इस मामले में संसद मार्ग थाने में FIR संख्या 62/2026 भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 126(2) और 3(5) के तहत दर्ज की गई। FIR में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार को आरोपी बताया गया।

एक पॉडकास्ट में भारद्वाज ने हमले की बात स्वीकार करने का दावा किया और कहा कि मामले में धारा 307 लगनी चाहिए थी, लेकिन इसके बावजूद वे जेल नहीं गए। यह क्लिप वायरल होने के बाद निशु ने राहुल गांधी और चंद्रशेखर आजाद से मदद की गुहार लगाई।

4 सितंबर को सीजेपी, आजाद समाज पार्टी और युवा कांग्रेस के प्रतिनिधि संसद मार्ग थाने पहुंचे। इसके बाद पुलिस ने भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में लिया। पुरानी FIR में SC/ST एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं। नाबालिग होने और ऑनलाइन रेप की धमकियों से जुड़े मामले में POCSO के तहत अलग शिकायत या FIR किए जाने की भी खबर सामने आई।

भारद्वाज का पक्ष आत्मरक्षा का रहा है। इससे पहले दिल्ली पुलिस चोट को कड़े से लगी साधारण चोट बता चुकी थी। 6 सितंबर को एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ परिवार से मिले और उन्हें सहयोग तथा सुरक्षा का भरोसा दिया।
सोमवार, 7 सितंबर को दिल्ली की एक अदालत ने भारद्वाज की जमानत याचिका खारिज कर उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस बीच, कई हिंदूवादी समूह भारद्वाज के समर्थन में सामने आए और उनकी गिरफ्तारी का विरोध किया। मामला फिलहाल अदालत में है।

इसी बीच, सोसाइटी से घर खाली करने के सामाजिक दबाव के आरोपों को लेकर परिवार का पक्ष जानने के लिए ‘द मूकनायक’ ने निशु से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।

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