त्रुटियों की सूची में वर्तनी संबंधी गलतियों के अलावा मशहूर हस्तियों के नामों में त्रुटियां, तथ्यात्मक गलतियां और गलत तस्वीरों का इस्तेमाल भी शामिल है।

साभार : द न्यू इंडियन एक्सप्रेस
ओडिशा में पहली से आठवीं कक्षा तक की नई संशोधित पाठ्यपुस्तकों में बड़ी संख्या में पाई गई त्रुटियों को लेकर शिक्षकों और अभिभावक संगठनों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। इन पाठ्यपुस्तकों का संशोधन राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत किया गया था।
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, त्रुटियों की सूची में वर्तनी संबंधी गलतियों के अलावा मशहूर हस्तियों के नामों में त्रुटियां, तथ्यात्मक गलतियां और गलत तस्वीरों का इस्तेमाल भी शामिल है।
ओडिशा प्राथमिक विद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष ब्रह्मानंद महाराणा ने द हिंदू से कहा, “ओडिशा विधानसभा की तस्वीर के स्थान पर कर्नाटक विधानसभा की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है। एक अन्य मामले में बरहामपुर को गलत तरीके से एक जिला बताया गया है, जबकि वह वास्तव में गंजाम जिले का एक शहर है। बरहामपुर नाम का कोई जिला नहीं है।”
महाराणा ने आरोप लगाया कि छपी हुई किताबों में कुल 1,678 गलतियां हैं।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तकों में सबसे अधिक 705 त्रुटियां पाई गई हैं।
अन्य त्रुटियों में डोंगरिया कोंध जनजाति के निवास क्षेत्र नियमगिरि पहाड़ियों को ओडिशा के बजाय झारखंड में दिखाया गया है। डोंगरिया कोंध एक विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) है।
इसी प्रकार, ओडिशा के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल कोणार्क सूर्य मंदिर के स्थान पर हम्पी स्थित विजया विट्ठल मंदिर की तस्वीर प्रकाशित कर दी गई है। इसके अलावा, डोंगरिया जनजाति का नाम गलत तरीके से ‘डोंग्रिया’ लिखा गया है। वहीं, एक अंग्रेजी पाठ्यपुस्तक में ‘greatest’ शब्द की वर्तनी भी त्रुटिपूर्ण रूप से ‘gretest’ छापी गई है।
द हिंदू ने ओडिशा पेरेंट्स फेडरेशन के अध्यक्ष वासुदेव भट्ट के हवाले से कहा, “ये सिर्फ गलतियां नहीं, बल्कि अपराध हैं। सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। वह छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकती।”
उन्होंने सुधारात्मक कदमों से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उनका कहना था कि यदि पाठ्यपुस्तकों को दोबारा छापने का निर्णय लिया जाता है, तो केवल मुद्रण प्रक्रिया में ही लगभग तीन महीने लगेंगे, जबकि उनके वितरण में भी अतिरिक्त तीन महीने का समय लगेगा।
द वायर ने लिखा है कि ओडिशा स्कूल शिक्षा कार्यक्रम प्राधिकरण (OSEPA) के अनुसार, ये पाठ्यपुस्तकें राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ‘प्रायोगिक संस्करण’ (Experimental Edition) के रूप में तैयार की गई थीं। ये पुस्तकें राज्य के सभी जिलों में प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के बीच पहले ही वितरित की जा चुकी हैं।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में महाराणा ने कहा, “आवश्यक प्रूफरीडिंग किए बिना पाठ्यपुस्तकों को छापने और वितरित करने की इतनी जल्दबाजी विभाग ने क्यों दिखाई? इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और इन गंभीर त्रुटियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।”
स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने इन कमियों को स्वीकार करते हुए इन्हें केवल “प्रिंटिंग की गलतियां” बताया।
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, गोंड ने कहा, “चूंकि ये किताबें नई तैयार की गई थीं, इसलिए संभव है कि इनमें कुछ प्रिंटिंग संबंधी त्रुटियां रह गई हों।”
वहीं, इसे “राष्ट्रीय शर्मिंदगी” बताते हुए बीजू जनता दल (बीजद) के प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने मांग की कि सभी “त्रुटिपूर्ण पाठ्यपुस्तकों” को वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि “ऐसी गलतियां न केवल ओड़िया भाषा, साहित्य और संस्कृति को कमजोर करती हैं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य को भी खतरे में डालती हैं।”
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साभार : द न्यू इंडियन एक्सप्रेस
ओडिशा में पहली से आठवीं कक्षा तक की नई संशोधित पाठ्यपुस्तकों में बड़ी संख्या में पाई गई त्रुटियों को लेकर शिक्षकों और अभिभावक संगठनों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। इन पाठ्यपुस्तकों का संशोधन राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत किया गया था।
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, त्रुटियों की सूची में वर्तनी संबंधी गलतियों के अलावा मशहूर हस्तियों के नामों में त्रुटियां, तथ्यात्मक गलतियां और गलत तस्वीरों का इस्तेमाल भी शामिल है।
ओडिशा प्राथमिक विद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष ब्रह्मानंद महाराणा ने द हिंदू से कहा, “ओडिशा विधानसभा की तस्वीर के स्थान पर कर्नाटक विधानसभा की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है। एक अन्य मामले में बरहामपुर को गलत तरीके से एक जिला बताया गया है, जबकि वह वास्तव में गंजाम जिले का एक शहर है। बरहामपुर नाम का कोई जिला नहीं है।”
महाराणा ने आरोप लगाया कि छपी हुई किताबों में कुल 1,678 गलतियां हैं।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तकों में सबसे अधिक 705 त्रुटियां पाई गई हैं।
अन्य त्रुटियों में डोंगरिया कोंध जनजाति के निवास क्षेत्र नियमगिरि पहाड़ियों को ओडिशा के बजाय झारखंड में दिखाया गया है। डोंगरिया कोंध एक विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) है।
इसी प्रकार, ओडिशा के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल कोणार्क सूर्य मंदिर के स्थान पर हम्पी स्थित विजया विट्ठल मंदिर की तस्वीर प्रकाशित कर दी गई है। इसके अलावा, डोंगरिया जनजाति का नाम गलत तरीके से ‘डोंग्रिया’ लिखा गया है। वहीं, एक अंग्रेजी पाठ्यपुस्तक में ‘greatest’ शब्द की वर्तनी भी त्रुटिपूर्ण रूप से ‘gretest’ छापी गई है।
द हिंदू ने ओडिशा पेरेंट्स फेडरेशन के अध्यक्ष वासुदेव भट्ट के हवाले से कहा, “ये सिर्फ गलतियां नहीं, बल्कि अपराध हैं। सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। वह छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकती।”
उन्होंने सुधारात्मक कदमों से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उनका कहना था कि यदि पाठ्यपुस्तकों को दोबारा छापने का निर्णय लिया जाता है, तो केवल मुद्रण प्रक्रिया में ही लगभग तीन महीने लगेंगे, जबकि उनके वितरण में भी अतिरिक्त तीन महीने का समय लगेगा।
द वायर ने लिखा है कि ओडिशा स्कूल शिक्षा कार्यक्रम प्राधिकरण (OSEPA) के अनुसार, ये पाठ्यपुस्तकें राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ‘प्रायोगिक संस्करण’ (Experimental Edition) के रूप में तैयार की गई थीं। ये पुस्तकें राज्य के सभी जिलों में प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के बीच पहले ही वितरित की जा चुकी हैं।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में महाराणा ने कहा, “आवश्यक प्रूफरीडिंग किए बिना पाठ्यपुस्तकों को छापने और वितरित करने की इतनी जल्दबाजी विभाग ने क्यों दिखाई? इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और इन गंभीर त्रुटियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।”
स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने इन कमियों को स्वीकार करते हुए इन्हें केवल “प्रिंटिंग की गलतियां” बताया।
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, गोंड ने कहा, “चूंकि ये किताबें नई तैयार की गई थीं, इसलिए संभव है कि इनमें कुछ प्रिंटिंग संबंधी त्रुटियां रह गई हों।”
वहीं, इसे “राष्ट्रीय शर्मिंदगी” बताते हुए बीजू जनता दल (बीजद) के प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने मांग की कि सभी “त्रुटिपूर्ण पाठ्यपुस्तकों” को वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि “ऐसी गलतियां न केवल ओड़िया भाषा, साहित्य और संस्कृति को कमजोर करती हैं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य को भी खतरे में डालती हैं।”
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