शर्मनाक: अंतिम संस्कार के पैसे नहीं थे, इसलिए तीन दिनों तक पति के शव के पास बैठी रही पत्नी

Written by sabrang india | Published on: July 29, 2026
अंतिम संस्कार के लिए पैसे न होने के कारण पत्नी तीन दिनों तक अपने पति के शव के पास बैठी रही।



बिहार के खगड़िया से मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। जिले के गंगौर थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 5 के रहने वाले मनु साह की बीमारी से मौत हो गई। लेकिन मौत के बाद भी परिवार की परेशानियां खत्म नहीं हुईं। घर की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय थी कि परिवार के पास अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं थे।

ईटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, मृतक मनु साह की पत्नी लगातार तीन दिनों तक अपने पति के शव के पास बैठी रही। इस दौरान किसी ने उसकी सुध नहीं ली। न कोई सामाजिक कार्यकर्ता मदद के लिए पहुंचा और न ही कोई जनप्रतिनिधि। प्रशासन की ओर से भी कोई सहायता नहीं मिली। तीन दिनों तक शव घर में ही पड़ा रहा।

एक स्थानीय निवासी राहुल कुमार ने बताया कि शव से दुर्गंध आने पर उन्हें घटना की जानकारी हुई। इसके बाद उन्होंने तुरंत प्रशासन को सूचना दी। सूचना मिलते ही नगर प्रशासन हरकत में आया और महिला के मृत पति के अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई। इसके बाद अंतिम संस्कार कराया जा सका।

मृतक की पत्नी ने बताया कि मनु साह दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाते थे। बीमारी के चलते वे बिस्तर पर आ गए। जो थोड़ी-बहुत जमा-पूंजी थी, वह इलाज में खत्म हो गई। आखिरकार बीमारी ने उनकी जान ले ली। लेकिन मौत के बाद भी परिवार की परीक्षा खत्म नहीं हुई। अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक राशि तक जुटाना संभव नहीं था।

वहीं, खगड़िया जिले के कार्यपालक अधिकारी सिंधु कमल ने बताया, "घटना की जानकारी मिलने के बाद महिला को मदद उपलब्ध कराई गई और शव का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया गया।"

एक स्थानीय व्यक्ति राजू शाह ने बताया कि मृतक मनु साह खगड़िया जिले के गंगौर थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 5 में बांध पर बनी एक झोपड़ी में अपने परिवार के साथ रहते थे और मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। कुछ महीने पहले उन्हें कैंसर होने का पता चला था। उनका सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा था, लेकिन कुछ दिन पहले उनकी मौत हो गई।

मृतक मनु साह के परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि उनका बेटा बाहर काम करने गया हुआ है। उसके पास संपर्क करने के लिए उनका मोबाइल नंबर नहीं था, इसलिए उसे इस घटना की जानकारी नहीं दी जा सकी।

मृतक की मौत के बाद उसकी पत्नी के पास अंतिम संस्कार कराने के लिए पैसे नहीं थे। तीन दिनों तक वह बांध के पास बनी अपनी झोपड़ी में अपने पति के शव के पास बैठी रही। इस दौरान वहां से गुजर रहे लोगों को दुर्गंध महसूस हुई, तो उन्होंने झोपड़ी के अंदर झांककर देखा।

जब घटना की जानकारी लोगों को हुई, तो उन्होंने स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं को इसकी सूचना दी। नगर प्रशासन को भी अवगत कराया गया। इसके बाद स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से महिला के पति का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया गया।

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