"ज्ञानेश कुमार को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं, ECI में सुधार करें"

Written by sabrang india | Published on: September 23, 2026
CPI(M) के पोलित ब्यूरो ने SIR प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की है। पार्टी ने कहा कि ECI की ईमानदारी और लोकतांत्रिक कामकाज को बहाल किया जाना चाहिए और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा कानून को खत्म करके एक नया कानून बनाना होगा।


फोटो साभार : ईटीवी

सीपीआईएम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। पार्टी ने आगे कहा कि चुनाव आयोग में सुधार करने की जरूरत है।

इसमें कहा गया कि इंडियन एक्सप्रेस (23 सितंबर) में वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) को लेकर हुए चौंकाने वाले खुलासे न सिर्फ इस प्रक्रिया पर, बल्कि उससे भी ज्यादा अहम बात, खुद चुनाव आयोग (ECI) की ईमानदारी और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

पार्टी ने कहा कि, इन खुलासों ने उन शक और चिंताओं को और मजबूत किया है जिन्हें CPI(M), दूसरे विपक्षी दलों और सिविल सोसाइटी संगठनों ने SIR प्रक्रिया शुरू होने के समय से ही उठाया था।

प्रेस को संबोधित करते हुए कहा गया कि, "रिपोर्ट्स से पता चलता है कि तीन चुनाव आयुक्तों में से दो ने वोटर लिस्ट में बदलाव और SIR प्रक्रिया से जुड़े कई फैसलों पर आपत्ति जताई है। कानून के मुताबिक, तीनों चुनाव आयुक्त बराबर होते हैं और किसी भी मतभेद को बहुमत या आम सहमति से सुलझाया जाना चाहिए। CEC ने इस नियम का पालन नहीं किया, बल्कि अपने साथी चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की परवाह किए बिना अपनी बात थोपते रहे। अहम बात यह है कि ये मतभेद इस बात से जुड़े बुनियादी सवालों पर हैं कि वोटर लिस्ट में वोटरों को कैसे जोड़ा या हटाया जा रहा है और SIR को कैसे लागू किया जा रहा है।"

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि अब यह बात सामने आ रही है कि CEC ने हमेशा गलत दावा किया है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और विकेंद्रीकृत (decentralised) है। अब यह साफ हो गया है कि पिछले कुछ महीनों में पूरा सिस्टम इतना केंद्रीकृत (centralised) हो गया है कि यह पता ही नहीं चलता कि असल में फैसले कौन ले रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी टेक्नोलॉजी पर बहुत ज्यादा निर्भरता और नोटिस जारी करने के "मैकेनिकल" तरीके पर सवाल उठाए हैं।

इसमें कहा गया कि, दो चुनाव आयुक्तों द्वारा उठाए गए मुद्दे SIR प्रक्रिया से कहीं आगे के हैं। यह चुनाव आयोग की संस्थागत ईमानदारी और लोकतांत्रिक कामकाज, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता, बहुत ज्यादा केंद्रीकरण और सभी वयस्कों को वोट देने के अधिकार की सुरक्षा से जुड़ा है। एक निष्पक्ष संस्था के तौर पर चुनाव आयोग की विश्वसनीयता दांव पर है। लोगों का भरोसा एक ऐसे चुनाव आयोग से उठ गया है जिसकी निष्पक्षता पर सवालिया निशान लग गया है, और इसके लिए CEC ज्ञानेश कुमार को ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। वे अब और अपने पद पर नहीं बने रह सकते।

CPI(M) का पोलित ब्यूरो भी SIR प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग करता है। ECI की ईमानदारी और लोकतांत्रिक कामकाज को बहाल किया जाना चाहिए। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा कानून को खत्म करके एक नया कानून बनाना होगा। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के उन दिशानिर्देशों को अपनाना होगा जिनके तहत एक चयन समिति बनाई जाएगी, जिसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होंगे।

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