इस गठबंधन ने उन मजदूरों के साथ बिना शर्त एकजुटता जाहिर की, जो उचित मजदूरी, सम्मानजनक कामकाजी परिस्थितियां, आठ घंटे का कार्यदिवस और श्रमिक-हितैषी श्रम कानूनों की मांग कर रहे हैं।

साभार : द स्टेट्समेन, फाइल फोटो
नेशनल अलायंस ऑफ पीपल्स मूवमेंट्स (NAPM) ने जन-विरोध का आह्वान किया है, ताकि उस व्यवस्था को वापस लिया जा सके जिसे उसने “कमजोर श्रम कानून व्यवस्था” बताया है। साथ ही, संगठन ने पिछले एक महीने में पूरे उत्तर प्रदेश और हरियाणा में 1,150 से अधिक मजदूरों और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की निंदा की है।
द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को जारी एक बयान में इस गठबंधन ने उन मजदूरों के साथ बिना शर्त एकजुटता जाहिर की, जो उचित मजदूरी, सम्मानजनक कामकाजी परिस्थितियां, आठ घंटे का कार्यदिवस और श्रमिक-हितैषी श्रम कानूनों की मांग कर रहे हैं।
माइग्रेंट वर्कर्स सॉलिडेरिटी नेटवर्क के अनुसार, जनवरी और मार्च 2026 के बीच कम से कम 28 बड़ी हड़तालें और विरोध प्रदर्शन दर्ज किए गए, जो मुख्य रूप से बिजली और निर्माण क्षेत्रों में हुए। नोएडा-मानेसर, पानीपत और खनन केंद्र सिंगरौली के औद्योगिक इलाकों में मजदूरों को मजदूरी की चोरी और बेहद कठिन कामकाजी परिस्थितियों के विरोध में सड़कों पर उतरते देखा गया।
NAPM ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने मूल कारणों को सुलझाने के बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपनाया। 9 अप्रैल को हरियाणा पुलिस ने IMT मानेसर में हड़ताल कर रहे मजदूरों के खिलाफ बल प्रयोग किया और 20 महिलाओं सहित 55 से अधिक मजदूरों को गिरफ्तार कर लिया। 12 से 15 अप्रैल के बीच उत्तर प्रदेश पुलिस ने नोएडा से 1,100 से अधिक मजदूरों को गिरफ्तार किया। NAPM ने दावा किया कि कई मामलों में गिरफ्तारी मेमो जारी नहीं किए गए और परिवार अब भी हिरासत में लिए गए लोगों का पता लगाने में असमर्थ हैं।
गठबंधन ने इंकलाबी मजदूर केंद्र से जुड़े लोगों— श्यामवीर, हरीश, अजीत, पिंटू यादव, आकाश, राजू और निरंजन लाल— की गिरफ्तारी की भी निंदा की, जिन पर हत्या के प्रयास, दंगा करने और आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। NAPM ने कहा कि श्रम अधिकार कार्यकर्ता आदित्य आनंद, रूपेश, मनीषा, सृष्टि, आकृति, हिमांशु, वरिष्ठ पत्रकार सत्यम वर्मा, कलाकार राम बाबू और कवि कात्यायनी को भी गिरफ्तार किया गया है।
NAPM ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान पर गहरी चिंता जताई, जिसमें उन्होंने चल रहे विरोध प्रदर्शनों को एक “बड़ी साजिश” का हिस्सा बताया और इसमें शामिल लोगों पर “गुमराह करने वाले और अशांति फैलाने वाले तत्व” होने का आरोप लगाया, जो “नक्सलवाद को फिर से जिंदा करने” की कोशिश कर रहे हैं। गठबंधन ने कहा कि इस तरह की बयानबाजी आजीविका से जुड़े मुद्दों पर हो रहे शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध को अवैध ठहराने का जोखिम पैदा करती है।
पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे 2025 का हवाला देते हुए NAPM ने बताया कि कार्यबल में केवल 23.6% लोग ही नियमित वेतनभोगी कर्मचारी हैं, जबकि 76.4% लोग स्वरोजगार या असंगठित श्रमिक हैं। वेतनभोगी कर्मचारियों में से 50% से अधिक लोग हर महीने 15,000 रुपये से कम कमाते हैं और लगभग 60% लोगों के पास नौकरी का कोई लिखित अनुबंध नहीं है।
नवंबर 2025 में केंद्र सरकार ने 29 श्रम कानूनों की जगह चार श्रम संहिताएं अधिसूचित कीं। NAPM ने आरोप लगाया कि ये श्रम संहिताएं हड़ताल के अधिकार को सीमित करती हैं, कार्यस्थल की सुरक्षा को कमजोर करती हैं, “हायर एंड फायर” नीतियों की अनुमति देती हैं और काम के घंटों को आठ से बढ़ाकर 12 घंटे तक कर देती हैं।
हाल के औद्योगिक हादसे
गठबंधन ने दो बड़े औद्योगिक हादसों की ओर भी ध्यान दिलाया। 14 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट में एक बॉयलर ट्यूब फटने से कम से कम 21 मजदूरों की मौत हो गई और 23 गंभीर रूप से घायल हो गए। ज्यादातर पीड़ित उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूर थे।
जुलाई 2025 में तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में सिगाची फैक्ट्री में हुए हादसे में 54 मजदूरों की मौत हो गई थी, जिनमें अधिकांश प्रवासी मजदूर थे। NAPM ने कहा कि 10 महीने बीत जाने के बाद भी मजदूर और उनके परिवार पूरे मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं।
NAPM ने कहा कि 16 फरवरी 2026 को हुई अखिल भारतीय आम हड़ताल में भारी भागीदारी देखने को मिली, लेकिन मजदूरों की मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। गठबंधन ने यह भी बताया कि मोदी सरकार ने एक दशक से अधिक समय से वार्षिक “इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस” आयोजित नहीं की है। ITUC ग्लोबल राइट्स इंडेक्स ने भारत को उन देशों में वर्गीकृत किया है जहां श्रमिक अधिकारों की कोई गारंटी नहीं है। इसके लिए उसने मजदूरों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई और हड़ताल के अधिकार के उल्लंघन का हवाला दिया है।
NAPM ने निम्नलिखित मांगों को दोहराया:
● गिरफ्तार किए गए सभी श्रमिकों और कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई तथा उन पर लगाए गए झूठे मुकदमों की वापसी।
● सभी क्षेत्रों और राज्यों में वैधानिक न्यूनतम एवं उचित मजदूरी का शीघ्र कार्यान्वयन।
● सभी श्रमिकों के लिए आठ घंटे के कार्यदिवस का कड़ाई से पालन।
● ओवरटाइम मजदूरी का शीघ्र भुगतान।
● कार्यस्थल पर पूर्ण सुरक्षा, उचित मुआवजा, रोजगार की गारंटी और नियमों का उल्लंघन करने वालों की जवाबदेही तय करना।
● काम के घंटे बढ़ाने वाले और श्रम सुरक्षा को कमजोर करने वाले कानूनों को वापस लेना।
● श्रमिकों के संघ बनाने, संगठित होने और विरोध प्रदर्शन करने के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा।
संगठन ने भारत सरकार और सभी राज्य सरकारों से अपने संवैधानिक दायित्वों का पालन करने का आह्वान करते हुए कहा कि श्रमिकों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा करना लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।
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साभार : द स्टेट्समेन, फाइल फोटो
नेशनल अलायंस ऑफ पीपल्स मूवमेंट्स (NAPM) ने जन-विरोध का आह्वान किया है, ताकि उस व्यवस्था को वापस लिया जा सके जिसे उसने “कमजोर श्रम कानून व्यवस्था” बताया है। साथ ही, संगठन ने पिछले एक महीने में पूरे उत्तर प्रदेश और हरियाणा में 1,150 से अधिक मजदूरों और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की निंदा की है।
द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को जारी एक बयान में इस गठबंधन ने उन मजदूरों के साथ बिना शर्त एकजुटता जाहिर की, जो उचित मजदूरी, सम्मानजनक कामकाजी परिस्थितियां, आठ घंटे का कार्यदिवस और श्रमिक-हितैषी श्रम कानूनों की मांग कर रहे हैं।
माइग्रेंट वर्कर्स सॉलिडेरिटी नेटवर्क के अनुसार, जनवरी और मार्च 2026 के बीच कम से कम 28 बड़ी हड़तालें और विरोध प्रदर्शन दर्ज किए गए, जो मुख्य रूप से बिजली और निर्माण क्षेत्रों में हुए। नोएडा-मानेसर, पानीपत और खनन केंद्र सिंगरौली के औद्योगिक इलाकों में मजदूरों को मजदूरी की चोरी और बेहद कठिन कामकाजी परिस्थितियों के विरोध में सड़कों पर उतरते देखा गया।
NAPM ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने मूल कारणों को सुलझाने के बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपनाया। 9 अप्रैल को हरियाणा पुलिस ने IMT मानेसर में हड़ताल कर रहे मजदूरों के खिलाफ बल प्रयोग किया और 20 महिलाओं सहित 55 से अधिक मजदूरों को गिरफ्तार कर लिया। 12 से 15 अप्रैल के बीच उत्तर प्रदेश पुलिस ने नोएडा से 1,100 से अधिक मजदूरों को गिरफ्तार किया। NAPM ने दावा किया कि कई मामलों में गिरफ्तारी मेमो जारी नहीं किए गए और परिवार अब भी हिरासत में लिए गए लोगों का पता लगाने में असमर्थ हैं।
गठबंधन ने इंकलाबी मजदूर केंद्र से जुड़े लोगों— श्यामवीर, हरीश, अजीत, पिंटू यादव, आकाश, राजू और निरंजन लाल— की गिरफ्तारी की भी निंदा की, जिन पर हत्या के प्रयास, दंगा करने और आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। NAPM ने कहा कि श्रम अधिकार कार्यकर्ता आदित्य आनंद, रूपेश, मनीषा, सृष्टि, आकृति, हिमांशु, वरिष्ठ पत्रकार सत्यम वर्मा, कलाकार राम बाबू और कवि कात्यायनी को भी गिरफ्तार किया गया है।
NAPM ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान पर गहरी चिंता जताई, जिसमें उन्होंने चल रहे विरोध प्रदर्शनों को एक “बड़ी साजिश” का हिस्सा बताया और इसमें शामिल लोगों पर “गुमराह करने वाले और अशांति फैलाने वाले तत्व” होने का आरोप लगाया, जो “नक्सलवाद को फिर से जिंदा करने” की कोशिश कर रहे हैं। गठबंधन ने कहा कि इस तरह की बयानबाजी आजीविका से जुड़े मुद्दों पर हो रहे शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध को अवैध ठहराने का जोखिम पैदा करती है।
पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे 2025 का हवाला देते हुए NAPM ने बताया कि कार्यबल में केवल 23.6% लोग ही नियमित वेतनभोगी कर्मचारी हैं, जबकि 76.4% लोग स्वरोजगार या असंगठित श्रमिक हैं। वेतनभोगी कर्मचारियों में से 50% से अधिक लोग हर महीने 15,000 रुपये से कम कमाते हैं और लगभग 60% लोगों के पास नौकरी का कोई लिखित अनुबंध नहीं है।
नवंबर 2025 में केंद्र सरकार ने 29 श्रम कानूनों की जगह चार श्रम संहिताएं अधिसूचित कीं। NAPM ने आरोप लगाया कि ये श्रम संहिताएं हड़ताल के अधिकार को सीमित करती हैं, कार्यस्थल की सुरक्षा को कमजोर करती हैं, “हायर एंड फायर” नीतियों की अनुमति देती हैं और काम के घंटों को आठ से बढ़ाकर 12 घंटे तक कर देती हैं।
हाल के औद्योगिक हादसे
गठबंधन ने दो बड़े औद्योगिक हादसों की ओर भी ध्यान दिलाया। 14 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट में एक बॉयलर ट्यूब फटने से कम से कम 21 मजदूरों की मौत हो गई और 23 गंभीर रूप से घायल हो गए। ज्यादातर पीड़ित उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूर थे।
जुलाई 2025 में तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में सिगाची फैक्ट्री में हुए हादसे में 54 मजदूरों की मौत हो गई थी, जिनमें अधिकांश प्रवासी मजदूर थे। NAPM ने कहा कि 10 महीने बीत जाने के बाद भी मजदूर और उनके परिवार पूरे मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं।
NAPM ने कहा कि 16 फरवरी 2026 को हुई अखिल भारतीय आम हड़ताल में भारी भागीदारी देखने को मिली, लेकिन मजदूरों की मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। गठबंधन ने यह भी बताया कि मोदी सरकार ने एक दशक से अधिक समय से वार्षिक “इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस” आयोजित नहीं की है। ITUC ग्लोबल राइट्स इंडेक्स ने भारत को उन देशों में वर्गीकृत किया है जहां श्रमिक अधिकारों की कोई गारंटी नहीं है। इसके लिए उसने मजदूरों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई और हड़ताल के अधिकार के उल्लंघन का हवाला दिया है।
NAPM ने निम्नलिखित मांगों को दोहराया:
● गिरफ्तार किए गए सभी श्रमिकों और कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई तथा उन पर लगाए गए झूठे मुकदमों की वापसी।
● सभी क्षेत्रों और राज्यों में वैधानिक न्यूनतम एवं उचित मजदूरी का शीघ्र कार्यान्वयन।
● सभी श्रमिकों के लिए आठ घंटे के कार्यदिवस का कड़ाई से पालन।
● ओवरटाइम मजदूरी का शीघ्र भुगतान।
● कार्यस्थल पर पूर्ण सुरक्षा, उचित मुआवजा, रोजगार की गारंटी और नियमों का उल्लंघन करने वालों की जवाबदेही तय करना।
● काम के घंटे बढ़ाने वाले और श्रम सुरक्षा को कमजोर करने वाले कानूनों को वापस लेना।
● श्रमिकों के संघ बनाने, संगठित होने और विरोध प्रदर्शन करने के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा।
संगठन ने भारत सरकार और सभी राज्य सरकारों से अपने संवैधानिक दायित्वों का पालन करने का आह्वान करते हुए कहा कि श्रमिकों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा करना लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।
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