बिशप ने दलित ईसाइयों के लिए आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट से पुनर्विचार की मांग की

Written by sabrang india | Published on: April 4, 2026
खम्मम कैथोलिक डायोसीज़ के बिशप सगीली प्रकाश ने कहा कि दलितों को पीढ़ियों से छुआछूत और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा है, जिससे उनकी सामाजिक-आर्थिक प्रगति प्रभावित हुई है। इसी संदर्भ में उन्होंने इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है।


फोटो साभार : डेक्कन क्रोनिकल

खम्मम कैथोलिक डायोसीज़ के बिशप सगीली प्रकाश ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि वह दलित ईसाइयों के लिए अनुसूचित जाति आरक्षण पर अपने फैसले की समीक्षा करे।

उन्होंने गुड फ्राइडे के मौके पर खम्मम के पुराने बस स्टैंड सेंटर से 'वे ऑफ द क्रॉस' जुलूस को हरी झंडी दिखाई। यह रैली ZP सेंटर, NTR सर्कल और नए बस स्टैंड इलाके से गुजरते हुए कनिगिरी में जाकर खत्म हुई।

डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट के अनुसार, इस मौके पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 13, 14 और 25 व्यक्तियों को अपनी पसंद का धर्म मानने की आजादी की गारंटी देते हैं। उन्होंने कहा कि दलित ईसाइयों ने अपनी मर्जी से ईसाई धर्म अपनाया है, लेकिन उन्हें अभी भी सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि दलितों ने पीढ़ियों से छुआछूत और सामाजिक बहिष्कार का सामना किया है, जिससे उनकी सामाजिक-आर्थिक प्रगति पर असर पड़ा है, और इसी संदर्भ में उन्होंने फैसले की समीक्षा करने की अपील की।

इस जुलूस में सुरेपल्ली इसाक, विजय कुमार, जी. सुरेश, गोवा शौर्य और टी. एंथनी जैसे पादरियों ने हिस्सा लिया।

कैथोलिक कनेक्ट की रिपोर्ट के अनुसार, बिशप ने 1950 के राष्ट्रपति आदेश के प्रावधानों की आलोचना की, जो SC (अनुसूचित जाति) का दर्जा सिर्फ उन दलितों तक सीमित रखते हैं जो हिंदू धर्म मानते हैं; बाद में इसे सिखों और बौद्धों तक बढ़ाया गया, लेकिन ईसाइयों या मुसलमानों तक नहीं। उन्होंने कहा कि इस तरह बाहर रखे जाने के कारण दलित ईसाइयों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

ये बातें बिशप ने "वे ऑफ द क्रॉस" (Way of the Cross) जुलूस को हरी झंडी दिखाने के बाद कहीं, जिसमें 5,000 से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। अंबेडकर सेंटर में जमा लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने शांति और एकता के व्यापक संदेश पर भी बात की और 'वसुधैव कुटुंबकम' यानी 'पूरी दुनिया एक परिवार है' के विचार का जिक्र किया।

बिशप प्रकाश ने आगे कहा कि उन्होंने पहले भी प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और संसद सदस्यों जैसे वरिष्ठ राजनेताओं के सामने यह मुद्दा उठाया है और दलित ईसाई समुदायों की उन पुरानी शिकायतों को उजागर किया है, जिन्हें उन्होंने 'लंबे समय से चली आ रही शिकायतें' बताया।

इस कार्यक्रम में कई स्थानीय धार्मिक और सामाजिक नेताओं ने भी हिस्सा लिया।

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