"विदेश की जेलों में बंद 10,000 से ज्यादा भारतीय नागरिक, सऊदी अरब में सबसे अधिक"

Written by sabrang india | Published on: April 3, 2025
कई देशों के साथ स्थानांतरण संधियों के बावजूद, 3 साल में सिर्फ 8 भारतीय कैदियों को वापस लाया गया।


प्रतीकात्मक तस्वीर ; साभार : इंडिया टूडे

विदेश मंत्रालय ने एक संसदीय पैनल को बताया है कि वर्तमान में 86 देशों की जेलों में 10,152 भारतीय बंद हैं। इनमें से चीन, कुवैत, नेपाल, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात सहित 12 देश ऐसे हैं, जहां यह संख्या 100 से ज्यादा है। यह जानकारी मंगलवार को जारी की गई विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति की छठी रिपोर्ट में दी गई है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, विचाराधीन कैदियों सहित सबसे ज्यादा भारतीय सऊदी अरब और यूएई में जेलों में बंद हैं, जहां इनकी संख्या 2,000 से ज्यादा है। जबकि बहरीन, कुवैत और कतर सहित अन्य खाड़ी देशों में भी बड़ी संख्या में भारतीय जेलों में बंद हैं, जहां बड़ी संख्या में ब्लू कॉलर भारतीय कामगार जाते हैं। इसके अलावा, नेपाल में 1,317 भारतीय जेल में हैं, जबकि मलेशिया में वर्तमान में 338 भारतीय नागरिक जेल में हैं। मंगलवार को दोनों सदनों में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, चीन में भी 173 भारतीय जेल में बंद हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, जिसमें एनआरआई, पीआईओ, ओसीआई और प्रवासी श्रमिकों सहित विदेशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों पर चर्चा की गई है, इन 12 देशों में से नौ पहले से ही सजा पाए व्यक्तियों के स्थानांतरण पर मौजूदा समझौतों के अंतर्गत आते हैं, जो किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति को जेल की सजा काटने के लिए उसके गृह देश में स्थानांतरित करने की अनुमति देता है।

हालांकि, इसके बावजूद, पिछले तीन वर्षों (2023 और मार्च 2025 के बीच) में केवल आठ कैदियों को भारत में जेल में वापस लाया जा सका, ईरान और यूनाइटेड किंगडम से तीन-तीन, और कंबोडिया और रूस से दो कैदियों को लाया गया है।

कांग्रेस नेता शशि थरूर की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा इन कैदियों की रिहाई के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में पूछे जाने पर मंत्रालय ने कहा कि विदेशी जेलों में बंद भारतीय नागरिकों की रिहाई और स्वदेश वापसी के मुद्दे पर विदेश में भारतीय मिशन और पोस्ट स्थानीय अधिकारियों के साथ नियमित रूप से बातचीत करते हैं।

हाल ही में, टेक महिंद्रा के क्षेत्रीय प्रमुख भारतीय नागरिक अमित गुप्ता, जो 12 साल से अधिक समय से दोहा में सेवारत थे, उनको कतर में हिरासत में लिया गया था। उनके परिवार ने दावा किया है कि उनसे वे बहुत कम मिल पीते हैं।

चूंकि इनमें से कई विचाराधीन कैदी हैं, इसलिए मंत्रालय ने पैनल को बताया कि विदेशों में कैद भारतीयों को हर संभव कांसुलर सहायता देने करने के अलावा, भारतीय मिशन और पोस्ट जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता प्रदान करने में भी सहायता करते हैं। मिशन और पोस्ट वकीलों का एक स्थानीय पैनल भी रखते हैं, जहां भारतीय समुदाय काफी संख्या में है।

उन्होंने कहा, "संबंधित भारतीय दूतावास द्वारा सुविधाएं प्रदान करने के लिए किसी भी भारतीय कैदी से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।" भारत ने ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, बांग्लादेश, ब्राजील, कंबोडिया, फ्रांस, हांगकांग, ईरान, इजरायल, इटली, कजाकिस्तान, कुवैत, रूस, सऊदी अरब, श्रीलंका, यूएई और यूके सहित कई देशों के साथ पहले ही स्थानांतरण संधियों पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन इसमें बहुत कम सफलता मिली है क्योंकि यह प्रक्रिया समय लेने वाली है और इसके लिए कई अनुमोदनों की आवश्यकता होती है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार: “टीएसपी समझौते के तहत स्थानांतरण के लिए कैदी, मेजबान देश और स्थानांतरित करने वाले देश की सहमति आवश्यक है। गृह मंत्रालय टीएसपी समझौते के तहत कैदियों के स्थानांतरण की देखरेख करने वाला नोडल प्राधिकरण है और वर्तमान में कई मामलों पर कार्रवाई कर रहा है।” मंत्रालय का कहना है कि गृह मंत्रालय कई अन्य देशों के साथ ऐसे समझौतों पर हस्ताक्षर करने के लिए बातचीत कर रहा है।

इन मामलों में प्रक्रिया के कई चरण शामिल हैं। इनमें स्थानांतरित करने वाले देश की सहमति प्राप्त करना, अनुरोध को संसाधित करने के लिए आवश्यक पूर्ण दस्तावेज की उपलब्धता, संबंधित राज्य सरकार की टिप्पणियां प्राप्त करना, उस विशिष्ट जेल की पहचान करना जहां कैदी को रखा जाना है, और दूसरे देश से भारत में स्थानांतरण के लिए संबंधित राज्य सरकार द्वारा अनुरक्षण व्यवस्था करना शामिल है। विदेश मंत्रालय ने पैनल को बताया कि ऐसे अनुरोधों को पूरा करने के लिए कोई सख्त समयसीमा तय नहीं की जा सकती है।

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