आदिवासी

September 2, 2026
डी. थंकप्पन के तीन साथियों- जावेद आनंद, रोमा और तीस्ता सेतलवाड़- ने भारत के ट्रेड यूनियन आंदोलन के एक प्रमुख और प्रभावशाली व्यक्ति को श्रद्धांजलि दी है। कुछ समय से बीमार चल रहे डी. थंकप्पन का आज सुबह (2 सितंबर) नई मुंबई के ऐरोली स्थित उनके घर पर निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे। वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता जावेद आनंद की यह श्रद्धांजलि...
September 1, 2026
संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, गुजरात में वर्ष 2022 से 2024 के बीच अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों के खिलाफ अत्याचार के कुल 4,890 मामले दर्ज किए गए। इन तीन वर्षों में दर्ज मामलों में करीब 81 फीसदी मामले एससी समुदाय से जुड़े थे। हालांकि, इन मामलों में दोषसिद्धि की दर अब भी काफी कम है। गुजरात में वर्ष 2022 से 2024 के बीच अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति...
September 1, 2026
गांव वालों ने मांग की कि मौजूदा जगहों पर नए क्लासरूम बनाने के लिए डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT), CSR स्कीम और समग्र शिक्षा अभियान के तहत तुरंत बजट दिया जाए। उन्होंने कहा कि वे उन मनमाने आदेशों का विरोध करते रहेंगे जिनके तहत स्कूलों को बच्चों के रहने की जगह पर दोबारा बनाने के बजाय दूसरी जगहों पर शिफ्ट किया जा रहा है। साभार: द मूकनायक अमरथुन ग्राम पंचायत के तहत खेदली पाडा में...
August 31, 2026
पुणे के मांजरी में पिछले 17 दिनों से जारी आदिवासी छात्रों की भूख हड़ताल महाराष्ट्र सरकार द्वारा उनकी मांगें स्वीकार किए जाने के बाद 29 अगस्त को स्थगित कर दी गई। फोटो साभार : द मूकनायक  बॉम्बे हाईकोर्ट ने शनिवार को महाराष्ट्र सरकार को पुणे जिले के मांजरी स्थित सरकारी आदिवासी छात्रावास में भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा...
July 31, 2026
मैसूरु में पिछले छह महीनों से पोषण किट और सामाजिक सुरक्षा पेंशन से वंचित करीब 48 हजार आदिवासी परिवारों ने अपनी मांगों को लेकर उपायुक्त (डीसी) कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। साभार : द न्यू इंडियन एक्सप्रेस मैसूरु जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए आदिवासी परिवारों ने मंगलवार को मैसूरु के उपायुक्त (डीसी) कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी...
June 29, 2026
भाजपा सरकार पर आदिवासियों की अनदेखी का आरोप, 66 हजार वनाधिकार आवेदन निरस्त; अब ‘करो या मरो’ के संघर्ष का समय। जंगलों की रक्षा के नाम पर सरकार की नजर उन आदिवासी समुदायों पर है, जो सदियों से जंगलों के साथ सहअस्तित्व में जीवन जीते आए हैं। सच तो यह है कि आदिवासियों के बिना जंगलों की कल्पना अधूरी है। ऐसे समय में आदिवासी समाज को अपने जीवन, सम्मान और सांस्कृतिक अस्तित्व की रक्षा के...
June 26, 2026
इस कार्रवाई ने, खासकर कमजोर भील आदिवासी समुदायों के संदर्भ में, अतिक्रमण हटाने और मानवीय चिंताओं के बीच संतुलन को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है। साभार : द मूकनायक राजस्थान के बाड़मेर में जिला प्रशासन द्वारा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच गुरुवार को तिलक नगर इलाके में गरीब भील आदिवासी परिवारों के विस्थापन को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ, जिससे नई चिंताएं पैदा हो गई...
June 25, 2026
नगांव जिले के चार टौंग्या गांवों को जारी बेदखली नोटिसों ने ऐतिहासिक अन्याय, वन प्रशासन और विस्थापन से पहले वन अधिकारों को मान्यता देने की राज्य की जिम्मेदारी को लेकर बहस को फिर से तेज कर दिया है। ऑल इंडिया यूनियन ऑफ फ़ॉरेस्ट वर्किंग पीपल (AIUFWP) ने असम सरकार से नगांव जिले के लुटुमारी लॉन्गजाप रिज़र्व फॉरेस्ट में मौजूद चार 'टौंग्या' गांवों से लोगों को हटाने की प्रस्तावित कार्रवाई...
June 22, 2026
उन पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया, उन्होंने जेल में समय बिताया और उन्हें विश्वविद्यालय से निष्कासित भी किया गया। इन तमाम परिस्थितियों के बीच तैयार की गई उनकी पीएचडी थीसिस जुलाई 2018 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज़ में जमा की गई थी। तब से यह शोध विद्वानों और इतिहासकारों के बीच व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में बेहद कठिन...
June 20, 2026
SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के 30 वर्षों की व्यापक समीक्षा यह दिखाती है कि कानून के परिवर्तनकारी वादे और हिंसा, भेदभाव तथा दंडहीनता का सामना कर रहे दलितों-आदिवासियों की वास्तविक जिंदगी के बीच आज भी गहरी खाई बनी हुई है। संसद द्वारा 'अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989' (जो भेदभाव-विरोधी कानूनों में भारत के सबसे महत्वपूर्ण कानूनों में से एक है) को लागू...