पति के इलाज के लिए त्रिपुरा की आदिवासी महिला को बेचना पड़ा कलेजे का टुकड़ा

Published on: April 21, 2017
अगरतला। आदिवासियों की हालत की सूद सरकार कम ही लेती है। वेस्ट त्रिपुरा में एक आदिवासी महिला ने पति के इलाज के लिए नवजात बेटे को बेच दिया। ऐसा कहा जा रहा है कि पति के इलाज के लिए उसके पास पैसा नहीं था। बता दें कि पिछले साल सितंबर में भी राज्य में एक बच्ची को 650 रुपए में बेचने का मामला सामने आया था। त्रिपुरा में लेफ्ट की सरकार है। यहां 8 महीने बाद विधानसभा इलेक्शन होने हैं। 

आदिवासी
 
न्यूज एजेंसी यूएनआई के अनुसार यह घटना वेस्ट त्रिपुरा में तेलिमुरा पुलिस स्टेशन के रंगीया तिला गांव की है। यहां आदिवासी महिला दिनामाला देबबर्मा का पति उषा रजंन देबबर्मा मजदूर है और काफी दिनों से बीमार है। पति के बीमार होने से दिनामाला के सामने परिवार को पालने का संकट था, साथ ही वह पति का इलाज भी नहीं करा पा रही थी, इसलिए उसने 7600 रुपए में बेटे को बेच देने का रास्ता चुना। अब यह मामला सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट की जानकारी में है, लेकिन अभी तक बच्चे को रेस्क्यू नहीं किया गया है।
 
बताया जा रहा है कि देबबर्मा परिवार में पहले से ही 3 बेटे हैं। दिनामाला ने 17 अप्रैल को चौथे बेटे को जन्म दिया। उसके पड़ोसी ने उसे पैसे के बदले बच्चा देने का ऑफर दिया था। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पड़ोसी ने दिनमाला के साथ डील पक्की कर ली और भरोसा दिलाया कि जब उसे अपने पति के इलाज के पैसों की जरूरत होगी, वह उसे दे देगा।

मामला सामने आने के बाद एसडीएम जयंत डे ने कहा, " यह घटना मेरी जानकारी में आने के बाद एक टीम को उस परिवार से मिलने के लिए भेजा गया। ताकि दिनामाला के पति को हॉस्पिटल में भर्ती किया जा सके। लेकिन उन्होंने आने से मना कर दिया। उसके घर वाले और पड़ोसी बच्चा बेचने की बात से इनकार किया है।"
 
संपादन- भवेंद्र प्रकाश

Courtesy: National Dastak
 

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