कांचा इलैया की किताब पर बैन लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

Written by सबरंग इंडिया स्टाफ | Published on: October 16, 2017

इलैया पिछले एक महीने से अपनी किताब ‘पोस्ट हिंदू’ इंडिया’ के अनुवादित अंश ‘सामाजिका स्मगलर्लु कोमाटोल्लू’ को लेकर आलोचकों से घिरे हैं।


कांचा इलैया

मशहूर लेखक व चिंतक कांचा इलैया की किताब पर बैन लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। इलैया पिछले एक महीने से अपनी किताब ‘पोस्ट हिंदू’ इंडिया’ के अनुवादित अंश ‘सामाजिका स्मगलर्लु कोमाटोल्लू’ को लेकर आलोचकों से घिरे हैं। इसको लेकर उन्हें जान से मारने तक की धमकियां दी गई। आर्य वैश्य समुदाय की ओर से समुदाय को ‘सोशल स्मगलर’ कहे जाने पर काफी आपत्ति जताई गई थी और इस किताब पर बैन लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई थी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने लेखक के अभिव्यक्ति के अधिकार का हवाला देते हुए इस याचिका को ख़ारिज कर दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने कहा कि किताबों पर प्रतिबंध लगाना उसकी क्षमताओं में नहीं आता क्योंकि ये लेखक के उसके आस-पास समाज के बारे में विचार हैं जिसे व्यक्त करने के लिए वे स्वतंत्र हैं। अदालत से किसी मुक्त अभिव्यक्ति को रोकने के लिए नहीं कहा जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने अभिव्यक्ति के मौलिक अधिकार को हमेशा सबसे ऊपर रखा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली एक पीठ ने किताब पर बैन की मांग करने वाले वकील से कहा कि वे किसी किताब को सिर्फ इसलिए बैन नहीं कर सकते क्योंकि वह विवादित है। अदालत ने लेखक की रचनात्मक स्वतंत्रता की पैरवी करते हुए कहा कि इस तरह के प्रतिबंध लगाना उनकी बोलने और अभिव्यक्त करने की स्वतंत्रता को घटाना होगा। हालांकि अदालत ने कहा कि वह लेखकों को केवल थोड़ा संयमित होकर लिखने की सलाह दे सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि पोस्ट हिंदू इंडिया नाम की यह किताब वर्ष 2009 में आई थी। इस किताब में विभिन्न जातियों के बारे में लेखों की एक श्रृंखला थी, जिसका हाल ही में तेलुगू अनुवाद किया गया है।

इस किताब के एक लेख में आर्य-वैश्य समाज को ‘सोशल स्मगलर’ (सामाजिक तस्कर) कहा गया है। इसके बाद कांचा इलैया के ख़िलाफ़ इस समुदाय ने कड़ा विरोध शुरू किया और उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। इलैया पर हमले की कोशिश भी की गई। उल्लेखनीय है कि इस किताब पर बान लगाने की जनहित याचिका आर्य वैश्य एसोसिएशन के नेता और वकील रामनजनेयुलू दायर ने की थी। उनका कहना था कि ये किताब पूरे आर्य वैश्य समाज को बदनाम करने की कोशिश है इसलिए इसे बैन करना चाहिए।

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