वसुंधरा सरकार के बजट में दलितों के लिए निराशा के अलावा कुछ नहीं- भंवर मेघवंशी

Published on: February 13, 2018
जयपुर. राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा आज प्रस्तुत बजट को राजस्थान के अनुसूचित जाति वर्ग के लिये निराशाजनक बताते हुये संयुक्त दलित संगठनों ने इसकी आलोचना की है.


दलित संगठनों की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में सामाजिक कार्यकर्ता एवं दलित चिन्तक भंवर मेघवंशी ने कहा कि चुनावी वर्ष में आये इस अंतिम बजट में भी दलित समुदाय को कुछ नहीं मिला है, इसी से जाहिर होता है कि राज्य सरकार इस समुदाय के प्रति एकदम संवेदनहीन है. कोई भी बड़ी घोषणा नहीं की गई है, दलित वर्ग के लोगों की आजीविका, रोजी रोजगार और सुरक्षा के प्रश्नों पर बजट मौन है.

मेघवंशी ने कहा कि बजट की जिन दो घोषणाओं को दलित वर्ग के लिये तोहफा बता कर मुख्यमंत्री का आभार प्रकट कर रहे कतिपय लोग इस बजटीय चालाकी को समझ नहीं पा रहे है कि सरकार ने बिना कुछ वास्तविक दिये ही श्रेय लेने में महारत हासिल कर ली है, जैसे कि प्रत्येक नगरपालिका क्षेत्रों में अम्बेडकर भवन का निर्माण की घोषणा, इसमें नया कुछ भी नहीं है, हर नगरीय निकाय अपने इलाकों में सामुदायिक भवनों का निर्माण करता है, अब ऐसे भवन को अम्बेडकर का नाम दे दिया जायेगा, मगर वह सिर्फ दलितों के लिये नहीं बल्कि सार्वजानिक उपयोग के भवन होंगे.

इसमें दलितों को अलग से क्या विशेष फायदा होगा, यह स्पष्ट नहीं है, इसी तरह बजट की दूसरी महत्वपूर्ण घोषणा अनुसूचित जाति जनजाति वित्त एवं सहकारी निगम द्वारा प्रदत्त 2 लाख तक के ऋणों एवं ब्याज की माफ़ी की घोषणा, इसकी भी हकीकत यह है कि यह निगम के वो कर्जे है जो चुकाये नहीं गये है, यह लगभग डूबा हुआ अवधिपार धन है, जो वैसे भी नहीं आने वाला था, उसे माफ़ करने की घोषणा करके सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है.

दलित चिन्तक मेघवंशी ने जानना चाहा है कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि डूब चुके ऋणों को माफ़ करने और सामुदायिक भवनों को अम्बेडकर भवन का नाम दे दिये जाने मात्र से राजस्थान के दलितों का क्या भला होगा ? सिर्फ शब्दों की बाजीगरी करके राजस्थान की 18 फीसदी अनुसूचित वर्ग की आबादी को गुमराह करने की कोशिस इस बजट में हुई है, इस बजट में दलित समुदाय के रोजगार, उद्यमिता बढ़ाने, सामाजिक न्याय विभाग के छात्रावासों में सुविधाओं में बढ़ोतरी, अत्याचार पीड़ितों के पुनर्वास, मुआवजे का सही समय पर भुगतान, छात्रवृतियों में बढ़ोतरी, कोचिंग एवं केरियर काउंसलिंग, दलित कृषकों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं, बेरोजगारों आदि के लिये किसी प्रकार की कोई योजना नहीं दिखाई देती है, इसलिये इस बजट को अत्यंत निराश करने वाला और अनुसूचित जाति वर्ग के साथ धोखा करने वाला बजट ही कहा जा सकता है.

 

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