राजस्थान में बीएलओ ने मुस्लिम वोटर्स के नाम हटाने के कथित दबाव पर आत्महत्या की धमकी दी 

Written by sabrang india | Published on: January 17, 2026
जयपुर के हवामहल विधानसभा क्षेत्र के एक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) कीर्ति कुमार ने आरोप लगाया है कि उन्हें धमकाकर भाजपा द्वारा दायर की गई आपत्तियों पर कार्रवाई करने का दबाव बनाया जा रहा है। इन आपत्तियों में एसआईआर की ड्राफ्ट मतदाता सूची से 470 मतदाताओं-जो उनके बूथ के लगभग 40 प्रतिशत हैं-के नाम हटाने की मांग की गई है। कुमार का कहना है कि ये आपत्तियां विशेष रूप से मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाती हैं। 

 

राजस्थान में एक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) ने आत्महत्या की धमकी दी है। उनका आरोप है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के दौरान उन निर्वाचन क्षेत्रों में, जहां पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मामूली अंतर से जीत दर्ज की थी, पर मुस्लिम वोटर्स को हटाने के दबाव का हवाला दिया है.

न्यूजलॉन्ड्री की रिपोर्ट के अनुसार, जयपुर के हवामहल विधानसभा क्षेत्र के बीएलओ कीर्ति कुमार ने कहा है कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं और भाजपा द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों पर कार्रवाई करने के लिए उन पर अत्यधिक दबाव डाला जा रहा है। इन आपत्तियों में एसआईआर के बाद प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची से 470 मतदाताओं-जो उनके बूथ के लगभग 40 प्रतिशत हैं-के नाम हटाने की मांग की गई है। 

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की आपत्तियां विशेष रूप से मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बना रही हैं, जबकि उन्होंने इन सभी मतदाताओं का सत्यापन पहले ही पूरा कर लिया है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि राजस्थान में अब तक कम से कम तीन बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की मौत हो चुकी है। ये घटनाएं काम के अत्यधिक दबाव, एसआईआर के संचालन में कथित खामियों, तकनीकी ऐप की समस्याओं और अपर्याप्त प्रशिक्षण जैसे आरोपों के बीच सामने आई हैं। 

द वायर ने लिखा, ताजा मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो से जुड़ा है, जिसमें बीएलओ कीर्ति कुमार को कथित तौर पर फोन पर यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वह कलेक्टर कार्यालय जाएंगे और वहीं आत्महत्या कर लेंगे। 

वीडियो में कुमार को भाजपा पार्षद सुरेश सैनी से फोन पर यह कहते हुए भी सुना जा सकता है, “क्या पूरी बस्ती के नाम ही हटा दूं? केवल 50 नाम रहने दूं, ताकि आपको और महाराज को चुनाव जीतने में आसानी हो सके।” 

उल्लेखनीय है कि यहां ‘महाराज’ से आशय भाजपा विधायक बलमुकुंद आचार्य से है, जिन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम बहुल हवामहल विधानसभा क्षेत्र से मात्र 974 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। 

गौरतलब है कि जयपुर के दक्षिणमुखीजी बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी रहे आचार्य अपने कार्यों और बयानों को लेकर कई बार विवादों में रहे हैं, जिन पर मुसलमानों को निशाना बनाने के आरोप लगते रहे हैं। 

एसआईआर प्रक्रिया से प्रभावित छात्र 

इस मामले पर सरकारी स्कूल में शिक्षक कुमार ने बताया कि एसआईआर प्रक्रिया के कारण उनके छात्र भी प्रभावित हुए हैं और अब उन पर 470 फॉर्म ‘दो दिनों के भीतर’ निपटाने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया में लगभग 78 घंटे लगेंगे, जो उनके अनुसार ‘पूरी प्रक्रिया को फिर से दोहराने जैसा’ है। 

न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत में उन्होंने कहा, “इन मतदाताओं का सत्यापन करने के लिए मुझे दोबारा फील्ड में जाना पड़ेगा, जो पूरी प्रक्रिया को फिर से दोहराने जैसा है। मैं यह नहीं कर सकता। एसआईआर के दौरान हम पहले ही अत्यधिक दबाव झेल चुके हैं। भाजपा नेता हमें निलंबन की धमकियां दे रहे हैं। मैं उनकी राजनीति को भली-भांति समझता हूं और अपने वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट रूप से बता चुका हूं कि मैं यह काम नहीं कर पाऊंगा।” 

इस बीच, आस-पास के कम से कम पांच ऐसे बूथों-जहां अधिकांश मतदाता हिंदू हैं-के बूथ लेवल अधिकारियों ने बताया कि उन्हें किसी भी तरह की आपत्ति प्राप्त नहीं हुई है। 

इलाके के एक अन्य बूथ की बीएलओ सरस्वती मीणा ने बताया कि उनके यहां 158 मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां दर्ज की गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सभी आपत्तियां भाजपा के एजेंटों द्वारा उठाई गई हैं और इनमें मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाया गया है। 

मीणा ने कहा कि मतदाता इसी इलाके में रहते हैं और एसआईआर के तहत उनका सत्यापन पहले ही हो चुका है।

उन्होंने कहा, “हम एसआईआर के तहत इन मतदाताओं का सत्यापन पहले ही कर चुके हैं। यह गलत है और इस तरह का दबाव हम पर नहीं डाला जा सकता।” 

कांंग्रेस ने भाजपा की आलोचना की

इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि कई स्थानों पर जब प्रशासनिक अधिकारियों और बीएलओ ने लोकतंत्र पर इस कथित हमले का हिस्सा बनने से इनकार किया, तो सत्ताधारी पार्टी के सदस्यों ने उन्हें तबादले की धमकियां दीं। 

उन्होंने कहा कि भाजपा ने इस गुस्ताखी भरे काम से लोगों और लोकतंत्र का अपमान किया है।

गहलोत ने आगे ये भी कहा कि राजस्थान में लोकतंत्र के लिए ये एक काले अध्याय जैसा है जिसने भाजपा को बेनकाब कर दिया है। सत्ता के मद में चूर भाजपा सरकार ने प्रशासन का दुरुपयोग कर मतदाता सूचियों में हेराफेरी का जो षड्यंत्र रचा है, वह शर्मनाक है।

उन्होंने अधिकारियों को भी स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी भाजपा के दबाव में संविधान की धज्जियां उड़ा रहे हैं, समय बदलते देर नहीं लगती। सरकारें आती-जाती रहेंगी, लेकिन अगर आपने नियम विरुद्ध कार्य किया, तो कानून के दायरे में आपकी जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी और सख्त कार्रवाई होगी। संवैधानिक मर्यादा का पालन करें, अन्यथा परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें।

गौरतलब है कि राजस्थान की ड्राफ्ट मतदाता सूची 16 दिसंबर 2025 को जारी की गई थी। इसमें कुल 5.46 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 42 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इससे संबंधित दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए एक महीने की अवधि तय की गई थी, जिसकी अंतिम तिथि 15 जनवरी थी। एसआईआर प्रक्रिया के तहत अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। 

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