अमेरिका में ईवीएम बनाने वाली नंबर-1 कंपनी का खुलासा और भारत का चुनाव आयोग

Written by Sabrang India Staff | Published on: July 19, 2018
ईवीएम को लेकर पिछले दिनों कुछ बेहद महत्वपूर्ण खबरे आयी है जो ईवीएम ओर भारत मे ईवीएम से जुड़ी पूरी चुनाव प्रक्रिया पर सवालिया निशान खड़े करती है लेकिन किसी ने उन खबरों पर ध्यान देना उचित नही समझा इसलिए इस पोस्ट में ईवीएम से संबंधित उन सभी खबरों एक ही जगह इकठ्ठा करने का प्रयास किया गया है और इन खबरों से संबंधित लिंक भी कमेन्ट बॉक्स में दिए गए हैं पोस्ट लम्बी है पर पूरी जरूर पढियेगा.



कल एक सनसनीखेज खबर अमेरिका से आयी है अमेरिकी वोटिंग मशीन निर्माता कम्पनी , जो सालो तक ईवीएम बनाने वाली नंबर-1 कंपनी रही है 'इलेक्शन सिस्टम एंड सॉफ्टवेयर' (ES&S) ने माना है कि उसके द्वारा बेची गईं कुछ वोटिंग मशीनों में 'रिमोटकंट्रोल टूल' इंस्टॉल किए गए थे लेकिन रिमोट के जरिए मशीन को हैक करने वाला यह सॉफ्टवेयर वोटिंग मशीन के बजाय इलेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम टर्मिनल में था जिसका इस्तेमाल वोटिंग मशीन को कंट्रोल करने के लिए किया जाता हैं भले ही इस तरह का सिस्टम भारत मे इस्तेमाल नही किया जाता लेकिन इस खुलासे से चुनाव आयोग के इस दावे की कलई खुल जाती है कि ईवीएम फुलप्रूफ है और उसमे छेड़छाड़ किया जाना संभव नही है.

देश के तीन प्रमुख राज्यों में चुनाव होने हैं छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश और राजस्थान , अब एक एक खबर इन राज्यों से भी आयी है.

छत्तीसगढ़ राज्य कांग्रेस का कहना है कि राज्य में होने वाले चुनाव के लिए सभी 27 जिलों में EVM की आपूर्ति गुजरात से की गई हैं ओर जिस तरह से रातों-रात EVM की जांच कर जिला निर्वाचन कार्यालयों ने ओके टेस्टेड का प्रमाण पत्र जारी किया उससे पार्टी को अंदेशा है कि गुजरात से पहुंचाई गई EVM हैकिंग वाली है और उसके साथ छेड़छाड़ हुई है राज्य कांग्रेस ने इस बात को लेकर एक लिखित शिकायत भी दर्ज कराई हैं.

अब आते हैं मध्यप्रदेश पर , मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह कह रहे हैं कि उन्हें जानकारी मिली है कि प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में ईवीएम के 16 एक्सपर्ट्स गुजरात से बुलाए गए हैं उन्होंने इस पर आपत्ति जताई और सवाल किया कि क्या देश में ईवीएम एक्सपर्ट सिर्फ गुजरात में ही उपलब्ध हैं ?

राजस्थान की पत्रिका की खबर हैं कि राजस्थान में विधानसभा चुनाव करवाने के लिए पुरानी हो चुकी सभी ईवीएम को बदलते हुए अपग्रेड वर्जन वाली जो नई ईवीएम मंगाई गई थी वो नई सैकड़ों ईवीएम ‘एफएलसी’ जांच के दौरान फेल हो गई हैं जबकि वीवीपैट की जांच ही शुरू नहीं हुई है। विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि जब नई मशीनें जांच में फेल हो रही हैं तो चुनाव के दौरान क्या हालात होंगे?

अब आते हैं इस पोस्ट की सबसे महत्वपूर्ण खबर पर इस खबर को पढ़ने के बाद यह बिल्कुल साफ हो जाता है कि दाल में थोड़ा नही बहुत काला है

एक RTI से यह जानकारी सामने आयी है कि चुनाव आयोग ने एक परिपत्र 26 मई 2017 को जारी किया हैं इसमें कहा गया है कि चुनाव आयोग की ईवीएम के डिजाइन का ईवीएम किसी अन्य को बेचे जाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाए इस डिजाइन को तकनीकी विशेषज्ञ समिति/आयोग की मंज़ूरी प्राप्त है.

परिपत्र में यह साफ साफ कहा गया है कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि राज्य चुनाव आयोगों और विदेशी चुनाव प्रबंध संस्थाओं सहित अन्य को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) बेचने के लिए अलग डिजाइन तैयार किया जाए.

इस बात का विरोध विभिन्न राज्य चुनाव आयोग ने भी किया है हनुवंतिया में हुई बैठक चुनाव आयुक्तों की बैठक में यह मुद्दा भी शामिल था दरअसल निर्वाचन प्रक्रिया , चुनाव अयोग (ईसीआई) और राज्य चुनाव आयोग (एसईसी), दोनों के लिए समान है. इसलिए यह बात किसी के गले नही उतर रही है कि चुनाव आयोग ने भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (बीईएल) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) को अपनी निर्दिष्ट मशीनें उसकी इजाजत के बगैर किसी अन्य को नहीं बेचने का निर्देश क्यों दिया है ?’

इसी बात से मिलती जुलती एक खबर ओर सामने आयी है आपको याद होगा कि अफ्रीकी देश बोत्सवाना में ईवीएम हैकिंग को लेकर भारत जैसी ही बहस चल रही थी पिछले महीने बोत्सवाना सरकार और उसके चुनाव आयोग ने भारतीय चुनाव आयोग के अधिकारियों से आग्रह किया गया है कि वे ईवीएम और वीवीपैट के बारे में संदेहों को दूर करने के लिए बोत्सवाना की कोर्ट में एक प्रजेंटेशन दें। इसके लिए बोत्सवाना से एक प्रतिनिधिमंडल मई के आखिरी हफ्ते में भारत आया था इस प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से कहा है कि यहां से 4-5 ईवीएम भेज कर बोत्सवाना के कोर्ट में उसका प्रदर्शन दिखाए.

लेकिन चुनाव आयोग ने इस पर भी अपना रुख स्पष्ट नही किया है.

इसके पहले यह न्यूज भी आयी थी कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की खरीदारी में बड़ी धांधली उजागर हुई है. सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी में ईवीएम सप्लाई करने वाली दो कंपनियों और चुनाव आयोग के आंकड़ों में बड़ी असमानता सामने आई है. आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक कंपनियों ने जितनी मशीनों की आपूर्ति की है और चुनाव आयोग को जितनी मशीनें मिली हैं उनमें करीब 19 लाख का अंतर हैं.