क्या कोरोना एक राजनीतिक महामारी है?

Written by Girish Malviya | Published on: August 6, 2020
कोरोना एक बीमारी होगी पर महामारी ये राजनीतिक ही है। अब रूस दावा कर रहा कि उसकी कोरोना वायरस वैक्‍सीन क्लिनिकल ट्रायल में 100 फीसदी सफल रही है। वह सितंबर अक्‍टूबर तक देशभर में टीकाकरण शुरू कर देगा।



इस बात से WHO का पेट बहुत जोर से दुखने लगा है रूस के वैक्सीन बनाने के दावे पर अब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने संदेह जाहिर कर रहा है, रूस के स्वास्थ्य मंत्री ने पिछले शनिवार को ही ऐलान किया कि उनका देश अक्टूबर महीने से कोविड-19 के खिलाफ नागरिकों को बड़े स्तर पर वैक्सीन लगाने का कैंपेन शुरू करने की तैयारी कर रहा है ओर वो भी निशुल्क यानी फ्री।

इस दावे पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रवक्ता क्रिस्टियन लिंडमियर ने कहा, 'जब भी ऐसी खबरें आएं या ऐसे कदम उठाए जाएं, हमें सतर्क रहना होगा। ऐसी खबरों के असली अर्थ को सावधानी के साथ पढ़ा जाना चाहिए।'

साफ दिख रहा है कि WHO का कोरोना का बना बनाया खेल खराब हो रहा है ....अरे ! एक बात बताइये कोई संप्रुभ देश यदि वेक्सीन बना रहा है ओर अपने नागरिकों को ही दे रहा है तो आपको क्या दिक्कत है ? अच्छी वेक्सीन है बुरी वेक्सीन है ये पुतिन जाने और रूस के नागरिक जाने ? आपका पेट क्यो दुख रहा है, साफ साफ कहिए न कि हम तो उसी वेक्सीन को सही होने का सर्टिफिकेट देंगे जो बिल्लू भयंकर जी बनाएंगे, दरअसल नागरिकों को निःशुल्क वेक्सीन दी जाएगी तो इनका सारा कमाई का, और न्यू वर्ल्ड ऑर्डर बनाने का प्लान चौपट हो जाएगा।

अगर WHO की नीयत साफ होती तो वह खुलकर वेक्सीन का स्वागत करता। रूस का वेक्सीन बनाना और उसे फ्री में बांटना WHO को बहुत अखर रहा है। यह सारी बाते अब शीशे के तरह साफ नजर आ रही है लेकिन इस बारे में कोई बड़ा नेता, पत्रकार या मीडिया समूह बोलना नही चाहता। ऐसा वो क्यो नही चाहते इसका अंदाजा आप खुद ही लगाइए। इसलिए ऊपर लिखा है कि कोरोना एक बीमारी जरूर है पर महामारी ये राजनीतिक ही है।

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