जब पुलिस को पता चला कि वे मुस्लिम हैं, तो उनके साथ मारपीट और बढ़ गई। तीस्ता सेतलवाड़, शाहीन खान और नफीसा खान से पत्रकारिता, मुस्लिम महिलाओं के तौर पर उनके अनुभव, नागरिकों के तौर पर उनके अधिकारों और CCTV फुटेज तथा पुलिस की जवाबदेही से जुड़े अनसुलझे सवालों पर बात कर रही हैं।

पुलिस की कार्रवाई के दौरान एक नागरिक के क्या अधिकार होते हैं? तब क्या होता है, जब कानून लागू करने वाले लोग ही मारपीट के आरोपी हों?
और वह CCTV फुटेज कहाँ है, जिससे यह पता चल सके कि थाने के अंदर क्या हुआ था? दो पत्रकारों का आरोप है कि दिल्ली के साकेत पुलिस स्टेशन में उनके साथ मारपीट की गई।
उनका आरोप है कि जब पुलिस को पता चला कि वे मुस्लिम हैं, तो उनके साथ मारपीट और बढ़ गई। तीस्ता सेतलवाड़, शाहीन खान और नफीसा खान से पत्रकारिता, मुस्लिम महिलाओं के तौर पर उनके अनुभव, नागरिकों के तौर पर उनके अधिकारों और CCTV फुटेज तथा पुलिस की जवाबदेही से जुड़े अनसुलझे सवालों पर बात कर रही हैं।

पुलिस की कार्रवाई के दौरान एक नागरिक के क्या अधिकार होते हैं? तब क्या होता है, जब कानून लागू करने वाले लोग ही मारपीट के आरोपी हों?
और वह CCTV फुटेज कहाँ है, जिससे यह पता चल सके कि थाने के अंदर क्या हुआ था? दो पत्रकारों का आरोप है कि दिल्ली के साकेत पुलिस स्टेशन में उनके साथ मारपीट की गई।
उनका आरोप है कि जब पुलिस को पता चला कि वे मुस्लिम हैं, तो उनके साथ मारपीट और बढ़ गई। तीस्ता सेतलवाड़, शाहीन खान और नफीसा खान से पत्रकारिता, मुस्लिम महिलाओं के तौर पर उनके अनुभव, नागरिकों के तौर पर उनके अधिकारों और CCTV फुटेज तथा पुलिस की जवाबदेही से जुड़े अनसुलझे सवालों पर बात कर रही हैं।