'गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग' को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने मीडिया को चेताया

Written by Sabrangindia Staff | Published on: May 2, 2020
COVID-19 महामारी के खतरे से निपटने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयासों से संबंधित एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने मीडिया को चेताया है कि वह अपने आपको ''गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग'' से दूर रखे। यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश थोटाथिल बी. राधाकृष्णन के नेतृत्व वाली दो सदस्यीय खंडपीठ ने की है। चूंकि राज्य सरकार ने इंगित किया था यह जनहित याचिका एक ''पब्लिसिटी ओरिएंटेड लिटिगेशन'' है, जिसका इस्तेमाल याचिकाकर्ता अपनी राजनीतिक पहचान बढ़ाने और सार्वजनिक कार्यक्षेत्र में अपनी लोकप्रियता को बढ़ाने के लिए कर रहा है।



लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, पीठ ने कहा कि उनके सारे आदेश सार्वजनिक अधिकारक्षेत्र में उपलब्ध थे इसलिए मीडिया से उम्मीद की जाती है कि वह जिम्मेदारी से रिपोर्टिंग करे। पीठ ने आगाह किया कि हाईकोर्ट की वेबसाइट पर सभी आदेशों को अपलोड किया जा रहा है, इसलिए मीडिया सहित किसी को भी अगर किसी तरह की जानकारी की आवश्यकता है तो वह न्यायालय के आदेशों की सामग्री के साथ उसे सत्यापित कर सकता है। ताकि ''किसी व्यक्ति का समर्थन में आदेशों को प्रसारित या प्रचारित करने से वह स्वयं को दूर रख सकें।''

पिछले सप्ताह पहली बार राज्य सरकार ने यह मुद्दा उठाया था कि यह याचिका राजनीति से प्रेरित है। उस समय पीठ ने यह कहते हुए इस मुद्दे को टाल दिया था कि ''यह प्रश्न उठाया गया है और हो सकता है कि यह रिकॉर्ड पर आई सामग्रियों के आधार पर उत्पन्न हुआ हो। जो अब राज्य सरकार की तरफ से पेश की गई सामग्रियों पर गहराई से विचार करने के लिए हमारी अंतरात्मा या विवेक को भी उकसा रहा है।''

मामले के तथ्यों के आधार पर पीठ ने राज्य और केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वे पश्चिम बंगाल राज्य में आईसीएमआर के दिशानिर्देशों के अनुसार परीक्षण सुविधाओं और पीपीई की उपलब्धता के बारे में एक हलफनामा दायर करें। पीठ ने यह भी कहा कि COVID-19के कारण राज्य के दो डॉक्टरों की मृत्यु हो गई है, जिसके बाद यह निर्देश जारी किया गया है। 

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