आखिर हो ही गई राजस्थान भाजपा में टूट

राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी को प्रदेशाध्यक्ष पद को लेकर मची लड़ाई के बीच एक और बड़ा झटका लगा है। विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी में औपचारिक तौर पर टूट हो गई है। यह तय हो गया है कि भाजपा के दोनों धड़े विधानसभा चुनावों में एक-दूसरे के खिलाफ ही खड़े होंगे।

Ghanshayam Tiwari
घनश्याम तिवाड़ी

वसुंधरा राजे के कट्टर विरोधी, और पूर्व शिक्षा मंत्री तथा मौजूदा विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने भाजपा की सदस्यता से त्यागपत्र दे ही दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को भेजे अपने पत्र में तिवाड़ी ने अपने इस्तीफे का कारण मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और आलाकमान को बताया है।

घनश्याम तिवाड़ी ने अपनी पार्टी का नाम भारत वाहिनी रखा है और निर्वाचन आयोग से इसका पंजीयन होने के बाद उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दिया है।

घनश्याम तिवाड़ी काफी समय से मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का विरोध करते रहे हैं और केंद्रीय नेतृत्व को वसुंधरा से होने वाले नुकसान से आगाह भी करते रहे हैं। अब जिस तरह से वसुंधरा राजे प्रदेशाध्यक्ष पद को लेकर अमित शाह और नरेंद्र मोदी तक से टकरा रही हैं, उससे घनश्याम तिवाड़ी की बात सही साबित हो रही है, लेकिन यह भी सही है कि तिवाड़ी की शिकायतों को आलाकमान ने कभी गंभीरता से नहीं लिया।

तिवाड़ी का अलग दल बनाना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि वसुंधरा राजे की कार्यशैली से नाराज कई विधायक उनके संपर्क में है। जब विधानसभा चुनावों का टिकट वितरण होगा और बड़े पैमाने पर मौजूदा विधायकों के टिकट कटेंगे तो ऐसे सारे विधायक तिवाड़ी की भारत वाहिनी में आ सकते हैं। ऐसे विधायकों की संख्या कम से कम 15 बताई जा रही है।

सांगानेर के विधायक घनश्याम तिवाड़ी अब जिस तरह से सोची-समझी रणनीति के साथ भाजपा और वसुंधरा राजे को घेरने में लगे हैं, वह भी भाजपा के लिए चिंता का विषय है। एक और निर्दलीय विधायक और वसुंधरा राजे के कट्टर विरोधी हनुमान बेनीवाल से भी वो समझौता करके तीसरा विकल्प तैयार करने की हद तक जाते दिख रहे हैं।

हनुमान बेनीवाल भी बहुत लंबे समय से भाजपा की आलोचना कते रहे हैं। घनश्याम तिवाड़ी बेनीवाल को अपने परिवार का सदस्य बता रहे हैं। दोनों का तालमेल बेनीवाल के लिए भी फायदेमंद हो सकता है।

तिवाड़ी के पास बेनीवाल की तरह भाजपा और वसुंधरा राजे के खिलाफ बोलने को बहुत कुछ है। भ्रष्टाचार, अघोषित आपातकाल, तानाशाही, वसुंधरा राजे द्वारा दो-दो बंगलों पर कब्जा, प्रेस की आर्थिक आजादी जैसे कई मुद्दे हैं जिन पर तिवाड़ी और बेनीवाल की जोड़ी भाजपा को मुश्किलें पैदा कर सकती हैं।

भाजपा के लिए ये संकट इसलिए भी बड़ा है क्योंकि एक तरफ तो कांग्रेस और बसपा गठबंधन करके वैसे भी उसे कड़ी चुनौती देने की स्थिति में हैं, और ऐसे में खुद भाजपा के अंदर टूट उसकी स्थिति को और कमजोर कर रही है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक टीकाकार हैं)
 

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