‘दीन बचाओ, देश बचाओ’ कांफ्रेंस : ‘ज़िन्दा’ क़ौमें ख़ौफ़ के माहौल में नहीं रहतीं…

Written by अफ़रोज़ आलम साहिल | Published on: April 16, 2018
लोकतंत्र में भीड़ बहुत कुछ कहती है। लेकिन मैं यहां इस बात पर बिल्कुल भी चर्चा नहीं करने जा रहा कि आज की इमारत-ए-शरीया द्वारा आयोजित ‘दीन बचाओ, देश बचाओ’ कांफ्रेंस में कुल कितने लोग शामिल हुए थे। अलग-अलग लोगों के अलग-अलग आंकड़े हो सकते हैं। लेकिन इस कांफ्रेंस में शामिल लोगों का मानना है कि ऐसी भीड़ उन्होंने गांधी मैदान में कभी नहीं देखी थी। यक़ीनन पूरा गांधी मैदान खचाखच भरा हुआ था। इसके अलावा हज़ारों की भीड़ पटना की सड़कों पर भी थी। आख़िर मामला देश के साथ-साथ दीन बचान का जो था।



आज सुबह से लोगों का जोशो-ख़रोश देखने लायक़ था। पटना की सड़कों पर उतरे मुसलमानों में कोई नारा भले ही न हो, लेकिन अपने दीन को बचाने के लिए एक जज़्बा, एक हौसला हर किसी के चेहरे पर ज़रूर नज़र आ रहा था। इनके हौसलों के सामने चिलचिलाती धूप भी अपना दम तोड़ रही थी। और फिर पूरा गांधी मैदान हिन्दुस्तान ज़िन्दाबाद, इस्लाम ज़िन्दाबाद के नारों से गूंज उठा। ये इस बात का संदेश था कि ‘ज़िन्दा’ क़ौमें ख़ौफ़ के माहौल में नहीं रहतीं।

इमारत-ए-शरीया के अमीर मौलाना वली रहमानी ने लाखों की भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले कुछ सालों से सियासी अज़ायम के लिए मज़हब और शरीअत से खिलवाड़ किया जा रहा है और इस्लामी तहज़ीब और क़ुरआनी तालीम को निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि औरतों की हिफ़ाज़त के नाम पर सरकार ने तीन तलाक़ से संबंधित बिल लाकर शरीअत में मदाख़लत का नया दरवाज़ा खोल दिया है। 

मौलाना वली रहमानी ने कहा कि तीन तलाक़ बिल को लेकर सरकार को अपने रवैया में तब्दीली लानी चाहिए और क़ुरआन व हदीस की हुरमत को पामाल करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

मौलाना ने कठुआ और उन्नाव के मामले में भी सरकार को निशाने पर लिया और निंदा करते हुए कहा कि, सरकार सिर्फ़ महिलाओं की सुरक्षा की बात न करे, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख़्त से सख़्त क़दम उठाए ताकि ऐसी घटनाएं दुबारा न हो। 

इस अवसर पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल के सदस्य व पूर्व राज्यसभा सांसद मौलाना उबैदुल्लाह खान आज़मी ने भी शरीअत में सरकार की दख़लअंदाज़ी की निंदा की और कहा कि ये हक़ीक़त है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकार को क़दम उठाना चाहिए, लेकिन इस बहाने शरीअत में दख़ल नहीं दिया जाना चाहिए। मुस्लिम तबक़ा शरीअत में किसी भी तरह का दख़ल हरगिज़ बर्दाश्त नहीं करेगा।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्र न्यायिक व्यवस्था किसी भी लोकतंत्र की बुनियाद है, लेकिन आज सरकारी सतह पर अदालतों को लगातार प्रभावित करने की कोशिश हो रही है, जो अफ़सोसनाक है। 

वहीं कोलकाता मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के सदस्य मौलाना अबु तालिब रहमानी ने कहा कि देश के लिए भारतीय फौजों को जब भी हम मुसलमानों की ज़रूरत पड़े, हम तैयार हैं।

आगे उन्होंने कहा कि, इस समय हमारा देश खतरे में है। हम अपने देश को भी बचाएंगे और ज़रूरत पड़ी तो पाकिस्तान और चीन को भी सबक़ सिखाएंगे।

सोशल मीडिया पर इस कांफ्रेंस को लेकर लगातार ये आरोप लगता रहा कि ये एक राजनीतिक कार्यक्रम है। शायद सोशल मीडिया के इस आरोप के जवाब में इमारत-ए-शरीया के नाज़िम अनीसुर रहमान क़ासमी ने कहा कि यह एक गैर-राजनीतिक कार्यक्रम है और लोगों से गुज़ारिश किया कि इसे किसी भी सियासत से जोड़कर न देखा जाए।

इस कांफ्रेंस के आख़िर में एक प्रस्ताव भी पारित किया गया, जिसमें ख़ास तौर पर दस बातों को सामने रखा गया। इस प्रस्ताव में जहां ‘हमारी शरीअत, हमारी जान’ की बात की गई, वहीं दलितों के ख़िलाफ़ सरकारी ज़ुल्म बंद करने को भी कहा गया।

इस ‘दीन बचाओ, देश बचाओ’ कांफ्रेंस की सबसे ख़ास बात ये रही कि भीड़ अभी गांधी मैदान से निकली भी नहीं थी कि इस कांफ्रेंस के कन्वेनर ख़ालिद अनवर को नीतिश कुमार ने बिहार विधान परिषद भेजने का ऐलान कर दिया। वो सोमवार को अपना नामांकन दाख़िल करेंगे। ख़ालिद अनवर ‘हमारा समाज’ उर्दू अख़बार के सम्पादक हैं और मौलाना वली रहमानी के काफ़ी क़रीबी बताए जाते हैं।

साभार-TwoCircles.net