पेट्रोल-डीजल पर टैक्स वसूलने में भाजपा शासित राज्य सबसे आगे

Written by Mahendra Narayan Singh Yadav | Published on: September 12, 2018
 भाजपा के नेता और मंत्री भले ही तेल की कीमतें बढ़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार को दोषी ठहरा रहे हों, लेकिन सच तो ये है कि बढ़ी हुई कीमतों का फायदा उठाने में भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकारें सबसे आगे हैं।

तेल की कीमतें बढ़ने को देखते हुए भाजपा आगामी चार राज्यों के विधानसभा चुनावों के लिए चिंतित हो उठी है, लेकिन उसकी राज्य सरकारें तेल पर टैक्स से होने वाली कमाई को छोड़ना नहीं चाहतीं।

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(Courtesy: Post.Jagran.com)

कांग्रेस अब पेट्रोल और डीजल के बढ़े दामों को मुद्दा बना चुकी है और भारत बंद का आह्वान भी कर चुकी है, लेकिन मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सरकारें टैक्स कम करने को तैयार नहीं हैं।

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के साथ-साथ राजस्थान और मिज़ोरम में भी चुनाव होने हैं। जनता के असंतोष, काले झंडे और विरोध-प्रदर्शन का सामना कर रही वसुंधरा राजे ने तो नज़ाकत समझते हुए 4 फीसदी टैक्स कम कर दिया है, लेकिन बाकी भाजपाशासित राज्यों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा है।

मौजूदा हालात ये हैं कि चारों चुनावी प्रदेशों में सबसे ज्यादा टैक्स मध्यप्रदेश में है तो उसके बाद छत्तीसगढ़ का नंबर है। राजस्थान में वसुंधरा की टैक्स कम करने की घोषणा के बाद लगा था कि छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री रमन सिंह भी ऐसा कुछ ऐलान करने जा रहे हैं, लेकिन जब उन्होंने कैबिनेट की बैठक बुलाई तो उसमें इस बारे में चर्चा तक नहीं की।

वर्तमान में मध्यप्रदेश में पेट्रोल पर सर्वाधिक 36 फीसदी टैक्स है। उससे ज्यादा टैक्स लेने वाला केवल एक राज्य है, और वो है महाराष्ट्र, जिसमें कि भाजपा की ही हुकूमत है। डीजल पर सबसे ज्यादा टैक्स वसूलने वाले राज्यों में छत्तीसगढ़ है जहां डीजल पर 26 फीसदी टैक्स लिया जा रहा है। उससे ज्यादा टैक्स केवल आंध्रप्रदेश और तेलंगाना ही ले रहे हैं।

देश में पेट्रोल पर सर्वाधिक टैक्स महाराष्ट्र में है। मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई में ये टैक्स साढ़े 39 फीसदी तक है और बाकी मुंबई में साढ़े 38 फीसदी। इस तरह से भाजपा तेल कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए राजनीतिक नुकसान सहने को भी तैयार दिख रही है।