हर साल सवा लाख लोग छोड़ रहे देश, 12 साल में 16 लाख 63 हजार से ज्यादा लोगों ने छोड़ी भारतीय नागरिकता

Written by Navnish Kumar | Published on: February 10, 2023
"2011 के बाद से अभी तक 16 लाख 63 हजार से भी ज्यादा लोगों ने अपनी भारतीय नागरिकता को छोड़ दिया है। अगर पिछले साल की बात करें तो यह आंकड़ा सवा 2 लाख से भी ज्यादा था। वहीं अगर 2011 के भारत की नागरिकता छोड़ने वालों की तादाद हर साल के हिसाब से 28 फीसदी तक बढ़ी है। पिछले साल यानी 2022 में 2,25,620 लोगों ने भारतीय नागरिकता को छोड़ दिया था। जो कि एक साल में सबसे बड़ा आंकड़ा है।"



केंद्र सरकार ने हाल ही में 9 राज्यों के 31 जिला मजिस्ट्रेट को अधिकार दिए हैं कि वह नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत पात्र पाकिस्तानी, अफगानिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय नागरिकता दें। लेकिन, गुरुवार को संसद में सरकार ने भारतीय नागरिकता छोड़ने वालों के जो आंकड़े दिए हैं, वह बहुत ही चौंकाने वाले हैं। पिछले एक दशक से कुछ ज्यादा समय में सबसे अधिक लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़ी है और दूसरे देशों के नागरिक बन गए हैं। सरकार ने 2011 से लेकर 2022 तक भारतीय नागरिकता छोड़ने वालों के पूरे आंकड़े संसद में उपलब्ध कराए हैं।

सरकार द्वारा गुरुवार को राज्यसभा में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2011 से 16 लाख 63 हजार से अधिक भारतीयों ने अपनी भारतीय नागरिकता छोड़ दी है। इनमें से सर्वाधिक 2,25,620 भारतीय ऐसे हैं, जिन्होंने पिछले साल भारतीय नागरिकता छोड़ी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी।

खास है कि कारोबार, नौकरी और पढ़ाई के लिए विदेश जाकर वहां की नागरिकता लेने पर भारतीय नागरिकता स्वत: रद्द हो जाती है। बीते 12 साल में अमेरिका की नागरिकता लेने वालों की संख्या सबसे ज्यादा रही है। भारतीय संविधान दोहरी नागरिकता रखने की इजाजत नहीं देता है। भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 के मुताबिक भारत के नागरिक रहते हुए आप दूसरे देश के नागरिक नहीं रह सकते। अगर कोई व्यक्ति भारत का नागरिक रहते हुए दूसरे देश की नागरिकता लेता है तो अधिनियम की धारा नौ के तहत उसकी नागरिकता खत्म की जा सकती है। पढ़ाई, नौकरी, कारोबार के लिए विदेश जा बसने वालों की संख्या बढ़ी है।

विदेश मंत्री ने राज्यसभा में वर्षवार भारतीय नागरिकता छोड़ने वाले भारतीयों की संख्या का ब्योरा देते हुए बताया कि कहा कि 2015 में 1,31,489 जबकि 2016 में 1,41,603 लोगों ने नागरिकता छोड़ी और 2017 में 1,33,049 लोगों ने नागरिकता छोड़ी। उनके मुताबिक 2018 में यह संख्या 1,34,561 थी, जबकि 2019 में 1,44,017, 2020 में 85,256 और 2021 में 1,63,370 भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ दी थी।

मंत्री के अनुसार, 2022 में यह संख्या 2,25,620 थी। जयशंकर ने कहा कि संदर्भ के लिए 2011 के आंकड़े 1,22,819 थे, जबकि 2012 में यह 1,20,923, 2013 में 1,31,405 और 2014 में 1,29,328 थे। वर्ष 2011 के बाद से भारतीय नागरिकता छोड़ने वाले भारतीयों की कुल संख्या 16,63,440 है।

जयशंकर ने उन 135 देशों की सूची भी उपलब्ध कराई जिनकी नागरिकता भारतीयों ने हासिल की है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2021 में भारतीय नागरिकता छोड़ने वाले भारतीयों की सबसे बड़ी संख्या संयुक्त राज्य अमेरिका (78,284) की नागरिकता लेने वालों की रही। दूसरे नंबर पर आस्ट्रेलिया रहा जहां 23,533 भारतीयों ने नागरिकता ली।

इस सूची में तीसरे स्थान पर कनाडा रहा जहां 21,597 भारतीयों ने नागरिकता ली और चौथे नंबर इंग्लैंड रहा जहां 14,637 भारतीयों ने नागरिकता ली। जहां की नागरिकता लेने वाले भारतीयों की संख्या कम रही, वे देश हैं- इटली (5,986 भारतीय), न्यूजीलैंड (2,643), सिंगापुर (2,516), जर्मनी (2,381), नीदरलैंड (2,187), स्वीडन (1,841) और स्पेन (1,595)।

किस साल कितने भारतीय जाकर बस गए विदेश
2011 - 1,22,819
2012 - 1,20,923
2013 - 1,31,405
2014 - 1,29,328
2015 - 1,31,489
2016 - 1,41,603
2017 - 1,33,049
2018 - 1,34,561
2019 - 1,44,017
2020 - 85,256
2021 - 1,63,370
2022 - 2,25,620

यही नहीं, एक विशिष्ट प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा, जानकारी के अनुसार, पांच भारतीय नागरिकों ने पिछले तीन वर्षों के दौरान संयुक्त अरब अमीरात की नागरिकता प्राप्त की।

भारत में एकल नागरिकता की व्यवस्था

बता दें कि भारत के संविधान के हिसाब से यहां एकल नागरिकता की व्यवस्था है। इसका मतलब है कि एक भारतीय नागरिक एक वक्त में केवल एक ही देश का नागरिक हो सकता है। मतलब अगर वो शख्स दूसरे किसी देश की नागरिकता लेता है तो उसकी भारतीय नागरिकता अपने आप खत्म हो जाएगी।

सामान्य तौर पर माना जाता है कि लोग बेहतर रोजगार और रहन-सहन के लिए दूसरे देशों में प्रवास करते हैं या वहां की नागरिकता लेते हैं। ग्लोबल वेल्थ माइग्रेशन रिव्यू, 2020 के मुताबिक, अच्छी लाइफस्टाइल के लिए लोग नई नागरिकता लेते हैं। इसी के साथ अपराध दर बढ़ने या देश में व्यावसायिक अवसरों की कमी की वजह से भी लोग ऐसा करते हैं।

भारत की नागरिकता छोड़ने वालों की जो प्रमुख तीन वजहें- पढ़ाई, नौकरी और कारोबार सामने आई हैं, उनके अलावा कुछ हद तक रहन-सहन के स्तर को लेकर भी लोगों ने विदेश में नागरिकता हासिल की है। अमेरिका, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया और कनाडा की ओर रुख करने की वजह रहन-सहन भी रही है। जहां तक पढ़ाई का सवाल है, साल 2020 के मुकाबले 2021 में अमेरिका जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में 10 फीसद से भी ज्यादा का इजाफा हुआ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों में से 60 फीसद से ज्यादा युवा देश में वापसी नहीं करते।

पाकिस्तान में कैद भारतीयों के आंकड़े

इस दौरान विदेश मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि युद्धबंदियों समेत 83 भारतीय रक्षाकर्मियों के पाकिस्तान की हिरासत में होने की संभावना है। सरकार की ओर से कहा गया है कि पाकिस्तान से इनकी रिहाई के लिए लगातर मुद्दे को उठाया जाता है, लेकिन अभी तक पाकिस्तान उनके वहां होने की बात मानने के लिए तैयार नहीं है। इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि 2014 के बाद से पाकिस्तान से 58 भारतीय कैदियों, 2,160 मछुआरों और 57 मछली पकड़ने वाली नौकाओं को उनसे छुड़ाकर स्वदेश लाया गया है।

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