पुलिस की बर्बरता: पेट में कथित लात मारने से गर्भवती की मौत, 6 पुलिसकर्मी निलंबित

Written by sabrang india | Published on: September 17, 2026
पुलिस की कथित पिटाई से गर्भवती महिला की मौत को लेकर भारी हंगामे के बाद 6 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। सपा ने हत्या का केस दर्ज करने की मांग की।


फोटो साभार : पत्रिका

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद क्षेत्र से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। चोरी के आरोपी पति को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस टीम पर गर्भवती महिला के पेट में लात मारने का गंभीर आरोप लगा है। आरोप है कि पुलिस की कथित मारपीट के बाद महिला की मौत हो गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दो सब-इंस्पेक्टरों समेत छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। घटना की जांच की जा रही है।

द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) रविशंकर प्रसाद ने प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुलिस अधीक्षक आदित्य लंगे ने सोमवार, 14 सितंबर को लापरवाही बरतने के आरोप में उपनिरीक्षक धर्मपाल सिंह और सत्यपाल सिंह को निलंबित कर दिया। इनके अलावा हेड कांस्टेबल मोहन सिंह और अरविंद कुमार तथा कांस्टेबल भवतोष कुमार और कुलदीप कुमार को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।

पीड़ित परिवार के मुताबिक, रविवार रात करीब 11:45 बजे सब-इंस्पेक्टर धर्मपाल सिंह पुलिस टीम के साथ लभउआ गांव स्थित गौरव के घर पहुंचे। पुलिस 32 वर्षीय गौरव को चोरी के एक मामले में गिरफ्तार करने आई थी।

परिजनों का आरोप है कि जब गौरव की 28 वर्षीय गर्भवती पत्नी अंजलि ने पुलिसकर्मियों से अपने पति को गिरफ्तार न करने की गुहार लगाई, तो सब-इंस्पेक्टर धर्मपाल सिंह ने उसके पेट में जोरदार लात मार दी। इसके बाद अंजलि जमीन पर गिर पड़ी।

पुलिस द्वारा गौरव को गिरफ्तार कर ले जाने के बाद अंजलि की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। परिजनों ने उसे तत्काल शिकोहाबाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया। सोमवार (14 सितंबर) सुबह अंजलि ने एक बेटे को जन्म दिया। हालांकि, जन्म के बाद नवजात की हालत बेहद नाजुक बताई गई, जिसके चलते उसे बेहतर इलाज के लिए आगरा रेफर कर दिया गया।

डिलीवरी के बाद अंजलि की तबीयत और बिगड़ गई। परिजन उसे आनन-फानन में फिरोजाबाद के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

परिजनों का आरोप है कि अंजलि की मौत की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और इसके बाद गौरव को रिहा कर दिया गया। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस थाने के बाहर जमकर हंगामा किया और विरोध प्रदर्शन किया।

अंजलि की मौत के बाद पुलिस ने भारी सुरक्षा बलों की मौजूदगी में सोमवार देर रात महिला का पोस्टमार्टम करवाया। उसी रात कड़ी सुरक्षा के बीच उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया।

इस घटना को लेकर मंगलवार, 15 सितंबर को राजनीतिक विरोध भी सामने आया। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सदस्य रामजीलाल सुमन पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ शिकोहाबाद थाने पहुंचे और धरने पर बैठ गए।

सुमन ने मामले में आरोपी बताए जा रहे पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की। इससे पहले सपा प्रतिनिधिमंडल ने मृतका के गांव पहुंचकर उसके परिजनों से मुलाकात की थी।

धरने के दौरान रामजीलाल सुमन ने कहा कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर दलित महिला अंजलि की मौत के मामले में आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उनके मुताबिक, पुलिस अधिकारियों ने कार्रवाई के लिए तीन दिन का समय मांगा है।

इससे पहले रामजीलाल सुमन के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने लभउआ गांव पहुंचकर शोकाकुल परिवार से मुलाकात की और घटना के संबंध में जानकारी ली।

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