संस्थान ने विवादित पोस्टर की सामग्री से खुद को अलग करते हुए स्पष्ट किया है कि वह जातिगत भेदभाव के किसी भी रूप का समर्थन नहीं करता।

फोटो साभार : टीओआई, आईआईटी मंडी
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मंडी में जन्माष्टमी समारोह के दौरान लगाए गए एक पोस्टर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पोस्टर में समाज को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र—इन चार वर्गों में विभाजित करते हुए उनकी अलग-अलग भूमिकाएं बताई गई थीं। इसमें शूद्रों की भूमिका “उच्च वर्गों की सेवा करना” बताई गई, जिसके बाद सोशल मीडिया पर संस्थान की आलोचना शुरू हो गई।
विवाद बढ़ने के बाद IIT मंडी ने मामले की जांच के लिए एक समिति गठित कर दी है।
द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, संस्थान के निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा ने पोस्टर की निंदा करते हुए स्पष्ट किया है कि इसे IIT मंडी ने किसी भी रूप में अनुमोदित नहीं किया था। सभी स्टूडेंट्स को भेजे गए मेल में निदेशक ने लिखा, “यह संस्थान समानता, सामाजिक न्याय, वैज्ञानिक सोच और हमारे संविधान में शामिल अन्य सभी मूल्यों को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। संस्थान जाति-आधारित भेदभाव के किसी भी रूप की कड़ी निंदा करता है। मैं इस मामले में आपके सहयोग की अपेक्षा करता हूँ ताकि हम सब मिलकर किसी भी रूप में ऐसे पूर्वाग्रहों या भेदभाव के खिलाफ खड़े हो सकें।”
जन्माष्टमी समारोह के दौरान लगा था पोस्टर
विवादित पोस्टर का शीर्षक “भगवद्गीता- द टाइमलेस विजडम” था। इसे संस्थान के सभागार के बाहर लगाया गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, यह पोस्टर 4 सितंबर को जन्माष्टमी समारोह के दौरान प्रदर्शित किया गया था। IIT मंडी के निदेशक ने इसे छात्रों की ओर से आयोजित कार्यक्रम का हिस्सा बताया है।
रिपोर्ट के अनुसार, पोस्टर में चार सामाजिक समूहों—ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र—का उल्लेख किया गया था। इसमें ब्राह्मणों के लिए “ईश्वर का संदेश फैलाना”, क्षत्रियों के लिए “समाज और आध्यात्मिकता की रक्षा करना” और वैश्यों के लिए “अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाना तथा दूसरों की सहायता करना” जैसी भूमिकाएं लिखी गई थीं। वहीं शूद्रों के लिए “उच्च वर्गों की सेवा करना” लिखा था। यही हिस्सा विवाद का मुख्य कारण बना।
पोस्टर में भगवद्गीता के एक श्लोक का भी उल्लेख किया गया था। इसमें समाज के चार वर्गों को प्रकृति के तीन गुणों और उनसे जुड़े कर्मों के आधार पर समझाया गया है। हालांकि, पोस्टर में इस विचार की जिस तरह व्याख्या की गई, उसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी आपत्तियां सामने आईं।
विवाद सामने आने के शुरुआती दौर में IIT मंडी के रजिस्ट्रार कुमार संभवन पांडेय ने कहा था कि जिस कार्यक्रम के दौरान यह पोस्टर प्रदर्शित किया गया, वह संस्थान की ओर से आधिकारिक रूप से आयोजित नहीं था। उन्होंने कहा था कि संभव है कि जन्माष्टमी के अवसर पर किसी छात्र समूह ने इसे प्रदर्शित किया हो। रजिस्ट्रार के मुताबिक, संस्थान ने न तो इस कार्यक्रम का समर्थन किया था और न ही इसमें किसी तरह का योगदान दिया था। उन्होंने मामले की जांच करने की बात कही थी।
इसके बाद अब IIT मंडी की ओर से इस मामले में एक नया और अधिक स्पष्ट कदम उठाया गया है।
IIT मंडी के निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा ने रविवार को संस्थान के समुदाय को भेजे ईमेल में विवादित पोस्टर की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि पोस्टर के बारे में जानकारी मिलने पर उन्हें झटका लगा। निदेशक के मुताबिक, IIT मंडी ने इस पोस्टर को “किसी भी रूप में” मंजूरी नहीं दी थी।
उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं हर मंच पर जातिगत भेदभाव का विरोध करते रहे हैं। उनके अनुसार, IIT मंडी जाति के आधार पर भेदभाव के किसी भी रूप की निंदा करता है।
बेहरा ने कहा कि मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संस्थान के परिसर का इस्तेमाल सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाली किसी गतिविधि के लिए न हो। उन्होंने इस घटना से आहत लोगों के प्रति सहानुभूति भी व्यक्त की।
उन्होंने IIT मंडी की प्रतिबद्धता को समानता, सामाजिक न्याय, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और संविधान में निहित मूल्यों से जोड़ते हुए परिसर के सभी सदस्यों से जातिगत पूर्वाग्रह और भेदभाव के खिलाफ मजबूती से खड़े होने की अपील की।
निदेशक ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में बताया कि विवादित पोस्टर एक छात्र-आधारित कार्यक्रम के लिए तैयार किया गया था। मामले की जांच के लिए गठित समिति में संकाय सदस्यों के अलावा विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। समिति में अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।
बेहरा ने बताया कि वह कुछ समय से संस्थान से बाहर थे और शनिवार को लौटे। उनके मुताबिक, उन्हें इस विवाद की जानकारी रविवार सुबह मिली। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं विवादित पोस्टर नहीं देखा है और अब मामले की जांच के लिए गठित समिति को इसकी पूरी पड़ताल करने देना चाहते हैं।
सोशल मीडिया पर विवाद
पोस्टर की तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद कई लोगों ने सवाल उठाए कि देश के प्रमुख उच्च शिक्षण और शोध संस्थानों में शामिल IIT के परिसर में जाति आधारित भूमिकाओं को इस तरह कैसे प्रदर्शित किया जा सकता है।
सोशल मीडिया पर पोस्टर की आलोचना करते हुए कई लोगों ने इसे समानता और गरिमा के मूल्यों के विपरीत बताया। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या किसी शैक्षणिक संस्थान के परिसर में इस तरह की जातिगत श्रेणियों और भूमिकाओं को दर्शाने वाली सामग्री प्रदर्शित की जानी चाहिए।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस मामले में अब तक किसी व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल IIT मंडी ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है। जांच समिति यह पता लगाएगी कि विवादित पोस्टर किसने तैयार किया था और किन परिस्थितियों में उसे संस्थान के परिसर में प्रदर्शित किया गया।
IIT मंडी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध आरक्षण प्रकोष्ठ की जानकारी के मुताबिक, संस्थान सभी संकाय सदस्यों, अधिकारियों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए ऐसा वातावरण सुनिश्चित करने की बात करता है, जो जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग और जन्मस्थान सहित किसी भी आधार पर भेदभाव से मुक्त हो।
आरक्षण प्रकोष्ठ अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और दिव्यांग विद्यार्थियों व कर्मचारियों से जुड़ी शिकायतों के निवारण की प्रक्रिया में भी भूमिका निभाता है।
ऐसे में मौजूदा विवाद की जांच के लिए गठित समिति की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। फिलहाल IIT मंडी ने विवादित पोस्टर की सामग्री से खुद को अलग करते हुए स्पष्ट किया है कि संस्थान जातिगत भेदभाव के किसी भी रूप का समर्थन नहीं करता।
अब जांच के केंद्र में यही सवाल हैं कि विवादित पोस्टर किसने तैयार किया, उसे संस्थान के परिसर में लगाने की अनुमति किस स्तर पर दी गई और इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं। समिति यह भी जांच करेगी कि पोस्टर लगाने में संस्थान के किसी नियम का उल्लंघन हुआ है या नहीं। जांच पूरी होने के बाद ही इन सवालों पर IIT मंडी की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
Related
महाराष्ट्र के हॉस्टलों में आदिवासी छात्राओं के जबरन प्रेग्नेंसी टेस्ट पर राहुल गांधी ने कड़ा विरोध जताया
MP: एंबुलेंस नहीं मिली, कचरा उठाने वाली गाड़ी में ले गए महिला का शव

फोटो साभार : टीओआई, आईआईटी मंडी
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मंडी में जन्माष्टमी समारोह के दौरान लगाए गए एक पोस्टर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पोस्टर में समाज को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र—इन चार वर्गों में विभाजित करते हुए उनकी अलग-अलग भूमिकाएं बताई गई थीं। इसमें शूद्रों की भूमिका “उच्च वर्गों की सेवा करना” बताई गई, जिसके बाद सोशल मीडिया पर संस्थान की आलोचना शुरू हो गई।
विवाद बढ़ने के बाद IIT मंडी ने मामले की जांच के लिए एक समिति गठित कर दी है।
द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, संस्थान के निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा ने पोस्टर की निंदा करते हुए स्पष्ट किया है कि इसे IIT मंडी ने किसी भी रूप में अनुमोदित नहीं किया था। सभी स्टूडेंट्स को भेजे गए मेल में निदेशक ने लिखा, “यह संस्थान समानता, सामाजिक न्याय, वैज्ञानिक सोच और हमारे संविधान में शामिल अन्य सभी मूल्यों को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। संस्थान जाति-आधारित भेदभाव के किसी भी रूप की कड़ी निंदा करता है। मैं इस मामले में आपके सहयोग की अपेक्षा करता हूँ ताकि हम सब मिलकर किसी भी रूप में ऐसे पूर्वाग्रहों या भेदभाव के खिलाफ खड़े हो सकें।”
जन्माष्टमी समारोह के दौरान लगा था पोस्टर
विवादित पोस्टर का शीर्षक “भगवद्गीता- द टाइमलेस विजडम” था। इसे संस्थान के सभागार के बाहर लगाया गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, यह पोस्टर 4 सितंबर को जन्माष्टमी समारोह के दौरान प्रदर्शित किया गया था। IIT मंडी के निदेशक ने इसे छात्रों की ओर से आयोजित कार्यक्रम का हिस्सा बताया है।
रिपोर्ट के अनुसार, पोस्टर में चार सामाजिक समूहों—ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र—का उल्लेख किया गया था। इसमें ब्राह्मणों के लिए “ईश्वर का संदेश फैलाना”, क्षत्रियों के लिए “समाज और आध्यात्मिकता की रक्षा करना” और वैश्यों के लिए “अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाना तथा दूसरों की सहायता करना” जैसी भूमिकाएं लिखी गई थीं। वहीं शूद्रों के लिए “उच्च वर्गों की सेवा करना” लिखा था। यही हिस्सा विवाद का मुख्य कारण बना।
पोस्टर में भगवद्गीता के एक श्लोक का भी उल्लेख किया गया था। इसमें समाज के चार वर्गों को प्रकृति के तीन गुणों और उनसे जुड़े कर्मों के आधार पर समझाया गया है। हालांकि, पोस्टर में इस विचार की जिस तरह व्याख्या की गई, उसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी आपत्तियां सामने आईं।
विवाद सामने आने के शुरुआती दौर में IIT मंडी के रजिस्ट्रार कुमार संभवन पांडेय ने कहा था कि जिस कार्यक्रम के दौरान यह पोस्टर प्रदर्शित किया गया, वह संस्थान की ओर से आधिकारिक रूप से आयोजित नहीं था। उन्होंने कहा था कि संभव है कि जन्माष्टमी के अवसर पर किसी छात्र समूह ने इसे प्रदर्शित किया हो। रजिस्ट्रार के मुताबिक, संस्थान ने न तो इस कार्यक्रम का समर्थन किया था और न ही इसमें किसी तरह का योगदान दिया था। उन्होंने मामले की जांच करने की बात कही थी।
इसके बाद अब IIT मंडी की ओर से इस मामले में एक नया और अधिक स्पष्ट कदम उठाया गया है।
IIT मंडी के निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा ने रविवार को संस्थान के समुदाय को भेजे ईमेल में विवादित पोस्टर की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि पोस्टर के बारे में जानकारी मिलने पर उन्हें झटका लगा। निदेशक के मुताबिक, IIT मंडी ने इस पोस्टर को “किसी भी रूप में” मंजूरी नहीं दी थी।
उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं हर मंच पर जातिगत भेदभाव का विरोध करते रहे हैं। उनके अनुसार, IIT मंडी जाति के आधार पर भेदभाव के किसी भी रूप की निंदा करता है।
बेहरा ने कहा कि मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संस्थान के परिसर का इस्तेमाल सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाली किसी गतिविधि के लिए न हो। उन्होंने इस घटना से आहत लोगों के प्रति सहानुभूति भी व्यक्त की।
उन्होंने IIT मंडी की प्रतिबद्धता को समानता, सामाजिक न्याय, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और संविधान में निहित मूल्यों से जोड़ते हुए परिसर के सभी सदस्यों से जातिगत पूर्वाग्रह और भेदभाव के खिलाफ मजबूती से खड़े होने की अपील की।
निदेशक ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में बताया कि विवादित पोस्टर एक छात्र-आधारित कार्यक्रम के लिए तैयार किया गया था। मामले की जांच के लिए गठित समिति में संकाय सदस्यों के अलावा विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। समिति में अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।
बेहरा ने बताया कि वह कुछ समय से संस्थान से बाहर थे और शनिवार को लौटे। उनके मुताबिक, उन्हें इस विवाद की जानकारी रविवार सुबह मिली। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं विवादित पोस्टर नहीं देखा है और अब मामले की जांच के लिए गठित समिति को इसकी पूरी पड़ताल करने देना चाहते हैं।
सोशल मीडिया पर विवाद
पोस्टर की तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद कई लोगों ने सवाल उठाए कि देश के प्रमुख उच्च शिक्षण और शोध संस्थानों में शामिल IIT के परिसर में जाति आधारित भूमिकाओं को इस तरह कैसे प्रदर्शित किया जा सकता है।
सोशल मीडिया पर पोस्टर की आलोचना करते हुए कई लोगों ने इसे समानता और गरिमा के मूल्यों के विपरीत बताया। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या किसी शैक्षणिक संस्थान के परिसर में इस तरह की जातिगत श्रेणियों और भूमिकाओं को दर्शाने वाली सामग्री प्रदर्शित की जानी चाहिए।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस मामले में अब तक किसी व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल IIT मंडी ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है। जांच समिति यह पता लगाएगी कि विवादित पोस्टर किसने तैयार किया था और किन परिस्थितियों में उसे संस्थान के परिसर में प्रदर्शित किया गया।
IIT मंडी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध आरक्षण प्रकोष्ठ की जानकारी के मुताबिक, संस्थान सभी संकाय सदस्यों, अधिकारियों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए ऐसा वातावरण सुनिश्चित करने की बात करता है, जो जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग और जन्मस्थान सहित किसी भी आधार पर भेदभाव से मुक्त हो।
आरक्षण प्रकोष्ठ अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और दिव्यांग विद्यार्थियों व कर्मचारियों से जुड़ी शिकायतों के निवारण की प्रक्रिया में भी भूमिका निभाता है।
ऐसे में मौजूदा विवाद की जांच के लिए गठित समिति की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। फिलहाल IIT मंडी ने विवादित पोस्टर की सामग्री से खुद को अलग करते हुए स्पष्ट किया है कि संस्थान जातिगत भेदभाव के किसी भी रूप का समर्थन नहीं करता।
अब जांच के केंद्र में यही सवाल हैं कि विवादित पोस्टर किसने तैयार किया, उसे संस्थान के परिसर में लगाने की अनुमति किस स्तर पर दी गई और इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं। समिति यह भी जांच करेगी कि पोस्टर लगाने में संस्थान के किसी नियम का उल्लंघन हुआ है या नहीं। जांच पूरी होने के बाद ही इन सवालों पर IIT मंडी की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
Related
महाराष्ट्र के हॉस्टलों में आदिवासी छात्राओं के जबरन प्रेग्नेंसी टेस्ट पर राहुल गांधी ने कड़ा विरोध जताया
MP: एंबुलेंस नहीं मिली, कचरा उठाने वाली गाड़ी में ले गए महिला का शव