MP: एंबुलेंस नहीं मिली, कचरा उठाने वाली गाड़ी में ले गए महिला का शव

Written by sabrang india | Published on: August 11, 2026
परिवार बोला— “हर व्यक्ति को सम्मान चाहिए, अगर जीवन में नहीं तो कम से कम मृत्यु के बाद उसके शव का आदर होना चाहिए। पत्नी का शव कचरा वाहन में ले जाना बहुत पीड़ादायक था।”



मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के बड़ामलहरा सिविल अस्पताल/सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला के शव को नगर परिषद की कचरा ढोने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली में ले जाया गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच के आधार पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश भी की गई है।

द मूकनायक ने लिखा, रुखसाना खान 4 जुलाई से लापता थीं। 5 अगस्त को बड़ामलहरा थाना क्षेत्र के सूरजपुर रोड स्थित कचरे के ढेर में उनका शव मिला। पुलिस ने हत्या की आशंका जताई और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए बड़ामलहरा सिविल अस्पताल भेजा।

पोस्टमॉर्टम के बाद परिजन शव को घर ले जाने के लिए मॉर्चरी वैन का इंतजार करते रहे, लेकिन घंटों बीतने के बाद भी उन्हें वाहन उपलब्ध नहीं हो सका। मृतका के पति बबलेश अहिरवार के मुताबिक, अस्पताल की ओर से आखिरकार नगर परिषद की कचरा उठाने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली मुहैया कराई गई। इसके बाद परिजनों ने शव को प्लास्टिक शीट में लपेटा और उसी वाहन से घर ले गए।

वीडियो सामने आने के बाद सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं और मरीजों व उनके परिजनों के प्रति प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल उठने लगे हैं। बड़ामलहरा ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉ. हेमंत मरैया ने भी अस्पताल में शव ले जाने के लिए अलग से वाहन उपलब्ध नहीं होने की बात स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि शव वाहन की व्यवस्था के लिए जिला स्तर की बैठकों और डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सोसाइटी के समक्ष कई बार प्रस्ताव रखा गया, लेकिन बजट और आवश्यक स्वीकृति नहीं मिलने के कारण अब तक वाहन उपलब्ध नहीं हो सका। ऐसे में अस्पताल को शवों के परिवहन के लिए नगर परिषद के वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है।

छतरपुर कलेक्टर मृणाल मीणा ने कहा कि सीएमएचओ और एसडीएम की जांच के आधार पर स्थानीय बीएमओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है। साथ ही यह भी जांच चल रही है कि शव वाहन उपलब्ध था या नहीं, कौन ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर आया और अन्य कोई लापरवाही हुई या नहीं। जिला मुख्यालय पर शासन की ओर से दो शव वाहन उपलब्ध बताए गए हैं।

मीडिया से बात करते हुए मृतका के पति बबलेश अहिरवार ने कहा, “हर व्यक्ति को सम्मान चाहिए, अगर जीवन में नहीं तो कम से कम मृत्यु के बाद उसके शव का आदर होना चाहिए। पत्नी का शव कचरा वाहन में ले जाना बहुत पीड़ादायक था।”

इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ शवों के परिवहन के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं की कमी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार एयर एंबुलेंस जैसी आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर कई सरकारी अस्पतालों में शव वाहन जैसी प्राथमिक सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, रुखसाना खान की मौत से जुड़े हत्या के मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है।

मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि छतरपुर के बड़ामलहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से शव को कचरा ढोने वाले वाहन में ले जाना बेहद शर्मनाक और संवेदनहीन व्यवस्था को दर्शाता है। सिंघार ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में सरकारी अस्पतालों की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि लोगों को जीवित रहते इलाज की पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रहीं और मृत्यु के बाद भी सम्मानजनक अंतिम व्यवस्था तक उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने सरकार और मुख्यमंत्री पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एयर एंबुलेंस जैसी बड़ी सुविधाओं के दावे किए जा रहे हैं, तो क्या प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था का यही वास्तविक मॉडल है?

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