CUET-UG 2026: तकनीकी समस्या से प्रभावित 3,765 छात्रों के लिए फिर होगी परीक्षा

Written by sabrang india | Published on: June 1, 2026
एनटीए के मुताबिक, 3,765 अभ्यर्थी बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा होने के बावजूद परीक्षा नहीं दे सके और उन्हें लौटना पड़ा। एजेंसी ने प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित करने की घोषणा की है। इस घटना ने एक बार फिर एनटीए की परीक्षा प्रबंधन व्यवस्था और तकनीकी तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


साभार : एनडीटीवी

कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET-UG) 2026 के दौरान राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की परीक्षा व्यवस्था एक बार फिर विवादों में आ गई है। शनिवार (30 मई, 2026) को आयोजित परीक्षा की पहली पाली कई केंद्रों पर तकनीकी खामियों के कारण निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सकी। इसके चलते हजारों अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों को लंबे समय तक असमंजस और परेशानी का सामना करना पड़ा। हालात इतने गंभीर हो गए कि बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर चुके 3,765 अभ्यर्थी भी परीक्षा में शामिल नहीं हो सके और उन्हें बिना परीक्षा दिए ही केंद्रों से वापस लौटना पड़ा।

द हिंदू के अनुसार, परीक्षा शुरू होने में हुई देरी के पीछे तकनीकी गड़बड़ी जिम्मेदार थी, जिसका असर सुबह की पाली पर पड़ा। बाद में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने भी स्वीकार किया कि कुछ परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी समस्याओं के कारण परीक्षा निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सकी। एजेंसी के मुताबिक, अधिकांश केंद्रों पर खामियों को दूर करने के बाद परीक्षा आयोजित कर ली गई, लेकिन लंबे इंतजार और अनिश्चितता के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी परीक्षा शुरू होने से पहले ही केंद्र छोड़कर लौट गए।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने कहा कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण परीक्षा से वंचित रह गए 3,765 अभ्यर्थियों के लिए विशेष पुनर्परीक्षा आयोजित की जाएगी। एजेंसी के अनुसार, यह एक बार की व्यवस्था होगी। पुनर्परीक्षा की तिथि, परीक्षा केंद्रों तथा अन्य आवश्यक विवरणों की जानकारी बाद में जारी की जाएगी।

परीक्षा के तकनीकी सेवा प्रदाता टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने भी इस घटना पर अपना पक्ष रखा है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के. कृतिवासन के अनुसार, सुबह की पाली के दौरान एक मामूली तकनीकी समस्या हुई थी, जिसके चलते परीक्षा शुरू होने में करीब दो घंटे की देरी हुई। उन्होंने कहा कि तकनीकी विशेषज्ञों ने जल्द ही समस्या की पहचान कर उसका समाधान कर दिया। कृतिवासन ने यह भी दावा किया कि इससे परीक्षा की निष्पक्षता, सुरक्षा या गोपनीयता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा।

हालांकि, सोशल मीडिया पर छात्रों और अभिभावकों ने अलग दावे किए। कई लोगों का कहना था कि परीक्षा शुरू होने में दो घंटे नहीं, बल्कि तीन से चार घंटे की देरी हुई। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी सामने आए, जिनमें अभ्यर्थी परीक्षा प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते नजर आए।

द वायर ने लिखा, एनटीए ने एक्स पर जारी बयान में कहा कि समस्या का समाधान कर लिया गया था और प्रभावित छात्रों को पूरा अतिरिक्त समय दिया गया, ताकि किसी को नुकसान न हो। एजेंसी ने दोपहर की पाली के समय में भी बदलाव किया और नए समय के अनुसार प्रवेश प्रक्रिया तथा परीक्षा शुरू होने का समय निर्धारित किया।

सीयूईटी की शुरुआत 2022 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत की गई थी। इसका उद्देश्य केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और निजी विश्वविद्यालयों के स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एक समान मंच उपलब्ध कराना था। एनटीए का कहना है कि यह परीक्षा देशभर के छात्रों, खासकर दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले अभ्यर्थियों को उच्च शिक्षा में समान अवसर प्रदान करती है।

हालांकि, परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल लगातार बढ़ते जा रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में एनटीए कई विवादों के केंद्र में रहा है। 2024 में नीट-यूजी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच एजेंसी इस मामले में अब तक दर्जनों लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।

इस वर्ष भी नीट-यूजी 2026 परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित करने का फैसला लिया गया। 3 मई को आयोजित परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप सामने आए थे, जिसके बाद शिक्षा मंत्रालय के संदर्भ पर सीबीआई ने जांच शुरू की। इस मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

सीयूईटी में आई यह ताजा तकनीकी गड़बड़ी ऐसे समय सामने आई है, जब सीबीएसई की 12वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) मूल्यांकन प्रणाली को लेकर भी विवाद जारी है। इन घटनाओं ने परीक्षा संचालन और मूल्यांकन प्रक्रियाओं की पारदर्शिता तथा विश्वसनीयता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों के बीच छात्र और अभिभावक यह सवाल उठा रहे हैं कि देश की प्रमुख प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं का संचालन करने वाली एजेंसियां आखिर कब ऐसी व्यवस्था विकसित कर पाएंगी, जहां तकनीकी खामियां, प्रश्नपत्र लीक और प्रशासनिक अव्यवस्था अपवाद हों, सामान्य बात नहीं।

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