अहमदाबाद: हिरासत में टॉर्चर के कारण 64 वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति की मौत का आरोप

Written by sabrang india | Published on: May 21, 2026
वीडियो में उन्होंने एक पुलिसकर्मी पर उन्हें पीटने, उनकी दाढ़ी खींचने और उनके प्राइवेट पार्ट्स पर लात मारने का आरोप लगाया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आगे और मारपीट से बचने के लिए उनसे 30,000 रुपये की मांग की गई थी। हालांकि, इस वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।


साभार : लाइवलॉ

जहीरुद्दीन शेख (64 वर्ष) की बुधवार को मौत के बाद विवाद खड़ा हो गया। शेख पर पशु-वध का मामला दर्ज था। उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि वेजलपुर पुलिस की हिरासत में टॉर्चर के कारण उनकी मौत हुई। परिवार ने शव लेने से इनकार कर दिया और कथित तौर पर इस मामले में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। शेख उन वांछित आरोपियों में शामिल थे, जिनके खिलाफ 5 मई को वेजलपुर पुलिस ने मामला दर्ज किया था। यह मामला तब दर्ज किया गया था, जब सोनल सिनेमा के पास एक खुले मैदान से 520 किलो संदिग्ध पशु मांस, एक जिंदा बछड़ा और पशु-वध के औजार बरामद किए गए थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जहीरुद्दीन के बेटे तौफीक शेख ने आरोप लगाया कि इस मामले में हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिस कस्टडी में उनके पिता के साथ मारपीट की गई। उन्होंने कहा, “जब तक हमें इंसाफ नहीं मिल जाता, हम शव नहीं लेंगे।” बुधवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसे कथित तौर पर शेख ने अपनी मौत से पहले रिकॉर्ड किया था। इस वीडियो में उन्होंने एक पुलिसकर्मी पर उन्हें पीटने, उनकी दाढ़ी खींचने और उनके प्राइवेट पार्ट्स पर लात मारने का आरोप लगाया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आगे और मारपीट से बचने के लिए उनसे 30,000 रुपये की मांग की गई थी। हालांकि, इस वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि शेख को कई घंटों तक खाना नहीं दिया गया और कथित मारपीट के बाद उनकी हालत बिगड़ गई। उन्होंने बताया कि बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, शेख को 16 मई को निवारक प्रावधानों (preventive provisions) के तहत हिरासत में लिया गया था और स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें सोला सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 18 मई को डिस्चार्ज होने के बाद उन्हें पशु-वध मामले में पूछताछ के लिए वेजलपुर पुलिस स्टेशन ले जाया गया। पुलिस ने बताया कि उसी शाम बाद में शेख की पत्नी उन्हें दवाइयां देने पुलिस स्टेशन पहुंची थीं, जिसके बाद उनकी हालत फिर से बिगड़ गई।

इसके बाद अधिकारियों ने उन्हें इलाज के लिए SVP अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शेख का लंबा आपराधिक इतिहास था और उनके खिलाफ कई मामले दर्ज थे, जिनमें अधिकांश पशु-वध और शराबबंदी कानूनों से जुड़े थे। अतीत में उनके खिलाफ कई PASA हिरासत आदेश भी जारी किए गए थे। बुधवार देर रात तक हिरासत में मौत के आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।

बजरंग दल के सदस्यों ने कथित तौर पर एक मुस्लिम व्यक्ति पर हमला किया

ज्ञात हो कि हाल ही में मध्य प्रदेश के भोपाल में बजरंग दल के सदस्यों ने कथित तौर पर एक मुस्लिम व्यक्ति पर हमला किया और उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया। उस पर आरोप था कि वह एक होटल के कमरे में एक हिंदू महिला से मिल रहा था और उस पर “लव जिहाद” का आरोप लगाया गया।

इस हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में कई हिंदुत्ववादी कार्यकर्ता 27 वर्षीय आरिफ खान को होटल के कमरे से खींचकर सड़क पर लाते हुए दिखाई दे रहे हैं। आरिफ उस समय अर्धनग्न अवस्था में था। कार्यकर्ताओं ने उसके चेहरे पर पेंट पोत दिया और इस्लाम विरोधी गालियां दीं। स्थानीय मीडिया ने दावा किया कि भीड़ ने उसके चेहरे पर गोबर भी मल दिया।

सियासत की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना 11 मई को हुई, जब आरिफ गौतम नगर के ‘प्राइड इन होटल’ में उस महिला से मिलने गया था। स्थिति तब बिगड़ गई, जब बजरंग दल को इस जोड़े के बारे में जानकारी मिली और उसके सदस्य मौके पर पहुंच गए।

वे जबरन होटल में घुस गए और पूछताछ शुरू कर दी। इस तरह उन्होंने कानून को अपने हाथ में ले लिया। “लव जिहाद” एक साजिश संबंधी थ्योरी है, जिसे केंद्रीय गृह मंत्रालय भी खारिज कर चुका है। मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय कानून के तहत इसे मान्यता देने वाला कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है।

महिला ने पुलिस को बताया कि वह कई वर्षों से आरिफ के साथ ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ में थी और उसने पुष्टि की कि वह अपनी मर्जी से उससे मिलने गई थी।

महिला के दावों के बावजूद, वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि भीड़ आरिफ पर बेरहमी से हमला कर रही है और उसे जबरदस्ती “जय श्री राम” के नारे लगाने के लिए मजबूर कर रही है। ‘एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स’ (APCR) के अनुसार, इस समूह ने अपमानजनक धार्मिक टिप्पणियां भी कीं, जैसे — “अपने अल्लाह को बुलाओ।”

इस घटना पर नाराजगी जताते हुए स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने अगले दिन, 12 मई को विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने हमले में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

पहचाने गए 8 आरोपियों में से 6 को धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया

यह घटना पुलिस की मौजूदगी में हुई। जैसा कि वीडियो में देखा जा सकता है, पुलिस ने बीच-बचाव करने की कोशिश की थी। अधिकारियों ने भोपाल निवासी मोहम्मद रहमानी की शिकायत के आधार पर ‘प्रथम सूचना रिपोर्ट’ (FIR) दर्ज की है। सियासत अखबार से बात करते हुए गोविंदपुरा के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) अवधेश सिंह तोमर ने बताया कि यह मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जान-बूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य), 191(2) (गैर-कानूनी जमावड़े द्वारा बल या हिंसा का इस्तेमाल) और 3(5) (दो या अधिक लोगों द्वारा किए गए गैर-कानूनी कृत्यों के लिए सामूहिक दायित्व) के तहत दर्ज किया गया है।

SHO के अनुसार, आरिफ और उस महिला — दोनों ने ही कोई शिकायत दर्ज न कराने का फैसला किया। तोमर ने बताया कि यह मामला स्थानीय मुस्लिम समुदाय की शिकायतों के आधार पर दर्ज किया गया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि हमलावरों ने धर्म के प्रति अपमानजनक टिप्पणियां की थीं।

SHO तोमर ने कहा, “वीडियो से मिली जानकारी के आधार पर हमने आठ लोगों की पहचान की है और उनमें से छह को गिरफ्तार कर लिया है।” उन्होंने आगे कहा, “बाकी दो आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।”

उन्होंने बताया कि वह भीड़ “किसी एक संगठन से जुड़े लोगों का समूह नहीं थी” और आरिफ पर हमला करने के लिए पहचाने गए आठ आरोपियों के अलावा भी अन्य लोग जिम्मेदार थे। उन्होंने कहा, “बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।”

हालांकि, APCR द्वारा दर्ज कराई गई एक अलग शिकायत में दावा किया गया है कि हमलावरों ने खुद को बजरंग दल का सदस्य बताया था और आरिफ पर हमला करने तथा पूरी घटना का वीडियो बनाने से पहले उसे बंधक बना लिया था।

APCR ने कहा कि यह हमला सांप्रदायिक नफरत भड़काने और शांति भंग करने की एक सोची-समझी कोशिश थी। संगठन ने आरोपियों पर कानून को अपने हाथ में लेने का आरोप लगाया।

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