AI-आधारित दुष्प्रचार के जरिए मुसलमानों और असम चुनावों में विपक्षी नेताओं को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई: रिपोर्ट

Written by sabrang india | Published on: April 8, 2026
छह AI-जनरेटेड वीडियो ने गोगोई की पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न को निशाना बनाया। वह एक आम नागरिक हैं और किसी भी सार्वजनिक पद पर नहीं हैं। इन वीडियो में उन्हें आपत्तिजनक और सांप्रदायिक स्थितियों में दिखाया गया। Instagram अकाउंट 'politooons' ने 102 AI पोस्ट के जरिए 40.2 मिलियन (4.02 करोड़) व्यूज़ हासिल किए, जो AI कंटेंट के कुल व्यूज़ का 88 प्रतिशत था।


 Screengrab via Supriya Shrinate, @SupriyaShrinate/X

2026 के असम विधानसभा चुनावों से पहले, AI-आधारित गलत सूचना, चुनावी बहिष्कार और राज्य-समर्थित नैरेटिव की "अभूतपूर्व घटनाओं" की ओर एक रिपोर्ट ने इशारा किया है। यह सब 'मिया' मुस्लिम समुदाय और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए किया गया।

मकतूब की रिपोर्ट के अनुसार, 'डायस्पोरा इन एक्शन फॉर ह्यूमन राइट्स एंड डेमोक्रेसी' द्वारा मंगलवार को प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि Facebook और Instagram पर 432 AI-जनरेटेड पोस्ट को 45.4 मिलियन (4.54 करोड़) बार देखा गया। ये पोस्ट एक छह-स्तरीय 'कंटेंट फैक्ट्री' के जरिए तैयार किए गए थे, जिसका कुल नेटवर्क 407.4 मिलियन (40.74 करोड़) फॉलोअर्स तक पहुंचता है।

रिपोर्ट के अनुसार, 31 पुष्ट 'डीपफेक' वीडियो ने कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार गौरव गोगोई को निशाना बनाया। इन वीडियो में उन्हें एक पाकिस्तानी एजेंट और मुसलमानों का हमदर्द बताया गया। इन्हें BJP के आधिकारिक अकाउंट और एक सत्यापित कैबिनेट मंत्री (पीयूष हज़ारिका; 97,700 व्यूज़) के हैंडल के जरिए फैलाया गया।

छह AI-जनरेटेड वीडियो ने गोगोई की पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न को निशाना बनाया। वह एक आम नागरिक हैं और किसी भी सार्वजनिक पद पर नहीं हैं। इन वीडियो में उन्हें आपत्तिजनक और सांप्रदायिक स्थितियों में दिखाया गया। Instagram अकाउंट 'politooons' ने 102 AI पोस्ट के जरिए 40.2 मिलियन (4.02 करोड़) व्यूज़ हासिल किए, जो AI कंटेंट के कुल व्यूज़ का 88 प्रतिशत था।

एक घटना का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में बताया गया कि सत्ताधारी पार्टी के एक हैंडल से एक AI-जनरेटेड वीडियो पोस्ट किया गया था, जिसमें मुख्यमंत्री को मुसलमानों पर गोली चलाते हुए दिखाया गया था। बाद में इस वीडियो को हटा दिया गया, लेकिन बताया जाता है कि मुख्यमंत्री ने कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए ऐसे कंटेंट की भाषा में बदलाव करने की बात स्वीकार की थी।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि असम के मुस्लिम समुदायों के खिलाफ एक साथ चार तरह के बहिष्कार वाले अभियान चलाए गए—अमानवीयकरण, चुनावी बहिष्कार, शारीरिक निष्कासन और सांस्कृतिक पहचान मिटाना।

चुनावी बहिष्कार के तहत, मुख्यमंत्री सरमा ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि 'विशेष संशोधन प्रक्रिया' के जरिए "4 से 5 लाख मिया वोटों को हटा दिया जाएगा"। इसके बाद असम की मतदाता सूची से 2.43 लाख नाम हटा दिए गए। इसके साथ ही, 'परिसीमन' की प्रक्रिया के तहत मुस्लिम-बहुल विधानसभा सीटों की संख्या लगभग 35 से घटाकर 20 कर दी गई।

अध्ययन में यह भी बताया गया कि चुनाव आयोग ने 'आचार संहिता' के उल्लंघन के 119 दर्ज मामलों में से किसी पर भी कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की। इनमें से 84 मामलों को 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' की धारा 123 के तहत 'अत्यधिक गंभीर' श्रेणी में रखा गया था। इन उल्लंघनों में स्वयं मौजूदा मुख्यमंत्री द्वारा किए गए 15 उल्लंघन भी शामिल थे। रिपोर्ट में कहा गया है, “सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने एक भी कंटेंट नहीं हटाया, Meta की घोषित AI लेबलिंग पॉलिसी ने MCC विंडो के दौरान AI द्वारा फ़्लैग की गई 172 पोस्ट्स पर एक भी लेबल नहीं लगाया।”

इसमें आगे कहा गया है, “असम मॉडल को जो बात सबसे ज्यादा खतरनाक बनाती है, वह यह है कि यह सिर्फ असम तक ही सीमित नहीं है। यहां जिन तरीकों का जिक्र किया गया है—वोटर लिस्ट से नाम हटाना, आबादी के हिसाब से सीटों का बंटवारा (delimitation) करके जनसंख्या की संरचना बदलना, और बड़े पैमाने पर AI से तैयार किया गया सांप्रदायिक कंटेंट—अब पूरे देश में अपनाए जा रहे हैं।”

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