इस दर्दनाक हादसे के बीच केंद्र सरकार ने लोकसभा में सपा सांसद इकरा चौधरी के सवाल के जवाब में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले द्वारा मंगलवार को पेश किए गए आंकड़ों में खुलासा किया कि 2017 से अब तक देशभर में सीवर और सेप्टिक टैंक की दुर्घटनाओं में कम से कम 622 सफाईकर्मियों की मौत हुई है।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मंगलवार रात एक दर्दनाक हादसा सामने आया। पचपेड़ी नाका स्थित रामकृष्ण अस्पताल के पीछे बने सीवरेज टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से तीन सफाईकर्मियों की दम घुटने से मौत हो गई, जबकि एक अन्य कर्मचारी की हालत गंभीर बनी हुई है।
यह घटना टिकरापारा थाना क्षेत्र की है। जानकारी के अनुसार, टैंक के अंदर मौजूद जहरीली गैस के संपर्क में आते ही सभी मजदूर बेहोश हो गए। उन्हें तुरंत बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी थी।
मृतकों की पहचान अनमोल मांझी (25), गोविंद सेंद्रे (35) और सत्यम कुमार (22) के रूप में हुई है। अन्य मजदूर का इलाज जारी है। बताया जा रहा है कि सभी मजदूर एक कॉन्ट्रैक्ट एजेंसी के माध्यम से काम कर रहे थे।
द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, हादसे के बाद अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बन गई। मृतकों के परिजन बड़ी संख्या में वहां जुट गए और उन्होंने हंगामा किया। पुलिस और परिजनों के बीच झड़प हुई, जिसमें गुस्साए लोगों ने पुलिस पर पथराव भी किया। स्थिति नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
परिजनों ने आरोप लगाया है कि सफाईकर्मियों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के ही सीवरेज टैंक में उतार दिया गया था। उनका कहना है कि जहरीली गैस की आशंका के बावजूद न तो गैस की जांच कराई गई और न ही पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए।
घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन ने किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं दी, जिससे परिजनों और स्थानीय लोगों में गुस्सा बढ़ गया। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
एडिशनल DCP राहुल देव शर्मा ने कहा, “एक सेप्टिक टैंक में गिरने से तीन सफाई कर्मचारियों की दुखद मौत हो गई। मृतकों के परिवार वाले मुआवज़े की मांग कर रहे हैं। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा जा रहा है और आगे की जांच जारी है।”
देशभर में सीवर मौतें जारी
इस दर्दनाक हादसे के बीच केंद्र सरकार ने लोकसभा में सपा सांसद इकरा चौधरी के सवाल के जवाब में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले द्वारा मंगलवार को पेश किए गए आंकड़ों में बताया कि 2017 से अब तक देशभर में सीवर और सेप्टिक टैंक की दुर्घटनाओं में कम से कम 622 सफाईकर्मियों की मौत हुई है।
देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हुई इन मौतों के मामलों में 539 परिवारों को पूरा मुआवजा मिला है, जबकि 25 परिवारों को आंशिक मुआवजा दिया गया है। वहीं 52 परिवार ऐसे हैं जिन्हें अब तक किसी प्रकार का मुआवजा नहीं मिला है। इसके अलावा छह मामलों को बिना किसी ठोस समाधान के ही बंद कर दिया गया।
आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक 86 मौतें उत्तर प्रदेश में दर्ज की गईं। इसके बाद महाराष्ट्र में 82, तमिलनाडु में 77, हरियाणा में 76, गुजरात में 73 और दिल्ली में 62 लोगों की मौत हुई।
उत्तर प्रदेश में 13 परिवार ऐसे हैं जिन्हें अब तक कोई सहायता नहीं मिली है, जबकि दो परिवारों को आंशिक मुआवजा दिया गया है। वहीं दिल्ली में नौ परिवार ऐसे हैं जिन्हें अब तक मुआवजा नहीं मिल पाया है।
सरकार ने ‘प्रोहिबिशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट ऐज मैनुअल स्कैवेंजर्स एंड देयर रिहैबिलिटेशन एक्ट, 2013’ के तहत वर्ष 2023 में कराए गए सर्वे का हवाला देते हुए कहा है कि देश के किसी भी जिले में मैनुअल स्कैवेंजर्स की मौजूदगी नहीं पाई गई। इसके बावजूद, सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई के दौरान मौतों का सिलसिला लगातार जारी है। रायपुर में हुआ यह हालिया हादसा इस गंभीर समस्या की ओर एक बार फिर ध्यान दिलाता है।
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने संसद में इस तरह के सवालों के जवाब में कई बार स्पष्ट किया है कि मैनुअल स्कैवेंजिंग—यानी अस्वच्छ शौचालयों से मानव मल उठाने की प्रक्रिया—के कारण किसी की मौत दर्ज नहीं हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान सुरक्षा उपकरणों की कमी और लापरवाही के कारण होने वाली मौतों को लेकर सरकार गंभीर है।
सरकार ने वर्ष 2023-24 में ‘नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम’ (NAMASTE) योजना की शुरुआत की। इसका उद्देश्य सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में मशीनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है, ताकि हाथ से मैला ढोने की प्रथा को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
इस कार्यक्रम के तहत सीवर और सेप्टिक टैंक में काम करने वाले कर्मचारियों (SSWs) के पुनर्वास और कौशल विकास पर भी जोर दिया गया है। साथ ही उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है, ताकि उनका काम सुरक्षित और सम्मानजनक बन सके।
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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मंगलवार रात एक दर्दनाक हादसा सामने आया। पचपेड़ी नाका स्थित रामकृष्ण अस्पताल के पीछे बने सीवरेज टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से तीन सफाईकर्मियों की दम घुटने से मौत हो गई, जबकि एक अन्य कर्मचारी की हालत गंभीर बनी हुई है।
यह घटना टिकरापारा थाना क्षेत्र की है। जानकारी के अनुसार, टैंक के अंदर मौजूद जहरीली गैस के संपर्क में आते ही सभी मजदूर बेहोश हो गए। उन्हें तुरंत बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी थी।
मृतकों की पहचान अनमोल मांझी (25), गोविंद सेंद्रे (35) और सत्यम कुमार (22) के रूप में हुई है। अन्य मजदूर का इलाज जारी है। बताया जा रहा है कि सभी मजदूर एक कॉन्ट्रैक्ट एजेंसी के माध्यम से काम कर रहे थे।
द मूकनायक की रिपोर्ट के अनुसार, हादसे के बाद अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बन गई। मृतकों के परिजन बड़ी संख्या में वहां जुट गए और उन्होंने हंगामा किया। पुलिस और परिजनों के बीच झड़प हुई, जिसमें गुस्साए लोगों ने पुलिस पर पथराव भी किया। स्थिति नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
परिजनों ने आरोप लगाया है कि सफाईकर्मियों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के ही सीवरेज टैंक में उतार दिया गया था। उनका कहना है कि जहरीली गैस की आशंका के बावजूद न तो गैस की जांच कराई गई और न ही पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए।
घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन ने किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं दी, जिससे परिजनों और स्थानीय लोगों में गुस्सा बढ़ गया। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
एडिशनल DCP राहुल देव शर्मा ने कहा, “एक सेप्टिक टैंक में गिरने से तीन सफाई कर्मचारियों की दुखद मौत हो गई। मृतकों के परिवार वाले मुआवज़े की मांग कर रहे हैं। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा जा रहा है और आगे की जांच जारी है।”
देशभर में सीवर मौतें जारी
इस दर्दनाक हादसे के बीच केंद्र सरकार ने लोकसभा में सपा सांसद इकरा चौधरी के सवाल के जवाब में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले द्वारा मंगलवार को पेश किए गए आंकड़ों में बताया कि 2017 से अब तक देशभर में सीवर और सेप्टिक टैंक की दुर्घटनाओं में कम से कम 622 सफाईकर्मियों की मौत हुई है।
देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हुई इन मौतों के मामलों में 539 परिवारों को पूरा मुआवजा मिला है, जबकि 25 परिवारों को आंशिक मुआवजा दिया गया है। वहीं 52 परिवार ऐसे हैं जिन्हें अब तक किसी प्रकार का मुआवजा नहीं मिला है। इसके अलावा छह मामलों को बिना किसी ठोस समाधान के ही बंद कर दिया गया।
आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक 86 मौतें उत्तर प्रदेश में दर्ज की गईं। इसके बाद महाराष्ट्र में 82, तमिलनाडु में 77, हरियाणा में 76, गुजरात में 73 और दिल्ली में 62 लोगों की मौत हुई।
उत्तर प्रदेश में 13 परिवार ऐसे हैं जिन्हें अब तक कोई सहायता नहीं मिली है, जबकि दो परिवारों को आंशिक मुआवजा दिया गया है। वहीं दिल्ली में नौ परिवार ऐसे हैं जिन्हें अब तक मुआवजा नहीं मिल पाया है।
सरकार ने ‘प्रोहिबिशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट ऐज मैनुअल स्कैवेंजर्स एंड देयर रिहैबिलिटेशन एक्ट, 2013’ के तहत वर्ष 2023 में कराए गए सर्वे का हवाला देते हुए कहा है कि देश के किसी भी जिले में मैनुअल स्कैवेंजर्स की मौजूदगी नहीं पाई गई। इसके बावजूद, सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई के दौरान मौतों का सिलसिला लगातार जारी है। रायपुर में हुआ यह हालिया हादसा इस गंभीर समस्या की ओर एक बार फिर ध्यान दिलाता है।
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने संसद में इस तरह के सवालों के जवाब में कई बार स्पष्ट किया है कि मैनुअल स्कैवेंजिंग—यानी अस्वच्छ शौचालयों से मानव मल उठाने की प्रक्रिया—के कारण किसी की मौत दर्ज नहीं हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान सुरक्षा उपकरणों की कमी और लापरवाही के कारण होने वाली मौतों को लेकर सरकार गंभीर है।
सरकार ने वर्ष 2023-24 में ‘नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम’ (NAMASTE) योजना की शुरुआत की। इसका उद्देश्य सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में मशीनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है, ताकि हाथ से मैला ढोने की प्रथा को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
इस कार्यक्रम के तहत सीवर और सेप्टिक टैंक में काम करने वाले कर्मचारियों (SSWs) के पुनर्वास और कौशल विकास पर भी जोर दिया गया है। साथ ही उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है, ताकि उनका काम सुरक्षित और सम्मानजनक बन सके।
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