पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हिंसा तब हुई जब अंजलि और सुरेंद्र ने अपने परिवारों के कड़े विरोध के बावजूद विवाह कर लिया। बताया गया है कि अंजलि के परिवार का मानना था कि इस अंतरजातीय विवाह से उनकी बदनामी हुई है। हमले से पहले दंपति ने पुलिस से सुरक्षा की माँग की थी और अधिकारियों ने परिवार को यह समझाने के लिए काउंसलिंग सत्र आयोजित किए थे कि यह विवाह कानूनी और आपसी सहमति से हुआ है।

साभार : द ऑब्जर्वर पोस्ट
तेलंगाना के मंचेरियल ज़िले में एक दलित युवक के घर में उस समय आग लगा दी गई, जब उसने एक पिछड़ी जाति की महिला से विवाह किया। पुलिस ने मीडिया को यह जानकारी दी। सुरेंद्र और अंजलि नामक यह जोड़ा हमले में सुरक्षित बच गया, लेकिन इस घटना से इलाके में भारी आक्रोश फैल गया है। पुलिस ने आरोपियों की पहचान अंजलि के पिता चेरुकु लक्ष्मण और उसके भाइयों अंजी व संपत के रूप में की है।
अधिकारियों के अनुसार, शनिवार को आरोपियों ने सुरेंद्र के घर पर केरोसिन डालकर आग लगा दी। सौभाग्य से, उस समय घर में कोई मौजूद नहीं था। सुरेंद्र के माता-पिता ने मामले की शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं में केस दर्ज किया गया है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जाँच जारी है।”
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हिंसा तब हुई जब अंजलि और सुरेंद्र ने अपने परिवारों के कड़े विरोध के बावजूद विवाह कर लिया। बताया गया है कि अंजलि के परिवार का मानना था कि इस अंतरजातीय विवाह से उनकी बदनामी हुई है। हमले से पहले दंपति ने पुलिस से सुरक्षा की माँग की थी और अधिकारियों ने परिवार को यह समझाने के लिए काउंसलिंग सत्र आयोजित किए थे कि यह विवाह कानूनी और आपसी सहमति से हुआ है।
द ऑब्जर्वर पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, हमले में कुल्हाड़ी और लाठियों का इस्तेमाल किया गया और घर को आग के हवाले कर दिया गया, जिससे लगभग पाँच लाख रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ। एक अधिकारी ने कहा, “जोड़ा सुरक्षित है, लेकिन यह जाति-आधारित हिंसा का एक गंभीर मामला है।”
गौरतलब है कि बीते वर्ष दिसंबर में कर्नाटक के हुबली तालुक में एक लिंगायत व्यक्ति द्वारा अपनी 20 वर्षीय गर्भवती बेटी की पीट-पीटकर हत्या कर देने का मामला सामने आया था, क्योंकि उसने एक अनुसूचित जाति के युवक से विवाह किया था। इस हमले में उसके पति के माता-पिता भी घायल हुए थे।
महिला की पहचान मान्या पाटिल के रूप में हुई थी, जिनकी रविवार, 22 दिसंबर को एक निजी अस्पताल में सिर में गंभीर चोटों के कारण मौत हो गई थी। यह घटना हुबली ग्रामीण पुलिस थाना क्षेत्र के इनाम वीरापुरा गाँव में हुई थी।
द न्यूज़ मिनट की रिपोर्ट के अनुसार, धारवाड़ के पुलिस अधीक्षक गुंजन आर्य ने बताया कि प्रकाशगौड़ा पाटिल और उसके रिश्तेदारों ने मान्या पर उसके ससुराल में कुल्हाड़ी और लोहे के स्प्रिंकलर पाइप जैसे घातक हथियारों से हमला किया था। इलाज के बावजूद लगभग तीन घंटे बाद मान्या की मौत हो गई, जबकि उसके सास-ससुर गंभीर रूप से घायल हो गए।
इसी तरह, अक्टूबर में गुजरात के नारोल इलाके में एक 60 वर्षीय दलित व्यक्ति की कथित तौर पर उसकी बहू के परिवार द्वारा अंतरजातीय विवाह के बाद हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने पाँच लोगों को गिरफ्तार किया था।
मृतक की पहचान भाईलाल वाघेला के रूप में हुई थी, जो एक सफाई कर्मचारी थे और सनी वाघेला के पिता थे। सनी ने हाल ही में एक ऊँची जाति की महिला से विवाह किया था, जिससे दुल्हन का परिवार नाराज़ था।
30 अक्टूबर की दोपहर, जब सनी का बड़ा भाई अपने माता-पिता को उस्मानपुरा मेट्रो स्टेशन के पास सफाई के काम पर छोड़ने गया, तभी दुल्हन के परिवार के सदस्यों ने दंपति पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। द ऑब्ज़र्वर पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमलावरों ने बेरहमी से पीटने से पहले जातिसूचक गालियाँ भी दीं।
कुछ यात्रियों ने बीच-बचाव कर घायल दंपति को बचाया। घर लौटने के बाद भाईलाल वाघेला को साँस लेने में तकलीफ़ होने लगी। उन्हें मणिनगर स्थित एल.जी. अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
अगले दिन पुलिस ने पाँच आरोपियों—राजू परमार, महेश परमार (दुल्हन के चाचा), लिली परमार, कलावती परमार, महेश परमार (देवर) और प्रेम परमार—को गिरफ्तार किया। सभी के ख़िलाफ़ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत हत्या और मारपीट के मामले दर्ज किए गए।
इसी प्रकार, अगस्त में पंजाब के मुक्तसर ज़िले के एणा खेड़ा गाँव में एक दलित परिवार को अपने ही घर से एक महीने से अधिक समय तक दूर रहना पड़ा, क्योंकि उनके बेटे ने उसी गाँव की एक जाट सिख युवती से विवाह कर लिया था। परिवार का आरोप था कि शादी के बाद लड़की के रिश्तेदारों ने उनके घर पर हमला किया और लूटपाट की।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 22 वर्षीय दलित युवक सुरिंदर सिंह ने 18 वर्षीय युवती से 7 जुलाई को राजस्थान के श्रीगंगानगर स्थित एक गुरुद्वारे में विवाह किया था। दंपति ने कानूनी विवाह प्रमाणपत्र भी प्राप्त किया था। हालांकि, यह विवाह गाँव में नाराज़गी का कारण बन गया, क्योंकि स्थानीय पंचायत पहले ही एक प्रस्ताव पारित कर चुकी थी, जिसमें एक ही गाँव में विवाह करने पर रोक लगाई गई थी।
सुरिंदर के पिता मलकीत सिंह ने बताया कि शादी के बाद परिवार को गाँव छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा और उन्हें रिश्तेदारों के यहाँ शरण लेनी पड़ी। बाद में उन्हें पता चला कि लड़की के परिजनों ने उनके घर में जबरन घुसकर तोड़-फोड़ की और सामान चुरा लिया। जब वे अपने घर की स्थिति देखने लौटे, तो उन्हें जातिसूचक गालियों का सामना करना पड़ा।
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तेलंगाना के मंचेरियल ज़िले में एक दलित युवक के घर में उस समय आग लगा दी गई, जब उसने एक पिछड़ी जाति की महिला से विवाह किया। पुलिस ने मीडिया को यह जानकारी दी। सुरेंद्र और अंजलि नामक यह जोड़ा हमले में सुरक्षित बच गया, लेकिन इस घटना से इलाके में भारी आक्रोश फैल गया है। पुलिस ने आरोपियों की पहचान अंजलि के पिता चेरुकु लक्ष्मण और उसके भाइयों अंजी व संपत के रूप में की है।
अधिकारियों के अनुसार, शनिवार को आरोपियों ने सुरेंद्र के घर पर केरोसिन डालकर आग लगा दी। सौभाग्य से, उस समय घर में कोई मौजूद नहीं था। सुरेंद्र के माता-पिता ने मामले की शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं में केस दर्ज किया गया है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जाँच जारी है।”
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह हिंसा तब हुई जब अंजलि और सुरेंद्र ने अपने परिवारों के कड़े विरोध के बावजूद विवाह कर लिया। बताया गया है कि अंजलि के परिवार का मानना था कि इस अंतरजातीय विवाह से उनकी बदनामी हुई है। हमले से पहले दंपति ने पुलिस से सुरक्षा की माँग की थी और अधिकारियों ने परिवार को यह समझाने के लिए काउंसलिंग सत्र आयोजित किए थे कि यह विवाह कानूनी और आपसी सहमति से हुआ है।
द ऑब्जर्वर पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, हमले में कुल्हाड़ी और लाठियों का इस्तेमाल किया गया और घर को आग के हवाले कर दिया गया, जिससे लगभग पाँच लाख रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ। एक अधिकारी ने कहा, “जोड़ा सुरक्षित है, लेकिन यह जाति-आधारित हिंसा का एक गंभीर मामला है।”
गौरतलब है कि बीते वर्ष दिसंबर में कर्नाटक के हुबली तालुक में एक लिंगायत व्यक्ति द्वारा अपनी 20 वर्षीय गर्भवती बेटी की पीट-पीटकर हत्या कर देने का मामला सामने आया था, क्योंकि उसने एक अनुसूचित जाति के युवक से विवाह किया था। इस हमले में उसके पति के माता-पिता भी घायल हुए थे।
महिला की पहचान मान्या पाटिल के रूप में हुई थी, जिनकी रविवार, 22 दिसंबर को एक निजी अस्पताल में सिर में गंभीर चोटों के कारण मौत हो गई थी। यह घटना हुबली ग्रामीण पुलिस थाना क्षेत्र के इनाम वीरापुरा गाँव में हुई थी।
द न्यूज़ मिनट की रिपोर्ट के अनुसार, धारवाड़ के पुलिस अधीक्षक गुंजन आर्य ने बताया कि प्रकाशगौड़ा पाटिल और उसके रिश्तेदारों ने मान्या पर उसके ससुराल में कुल्हाड़ी और लोहे के स्प्रिंकलर पाइप जैसे घातक हथियारों से हमला किया था। इलाज के बावजूद लगभग तीन घंटे बाद मान्या की मौत हो गई, जबकि उसके सास-ससुर गंभीर रूप से घायल हो गए।
इसी तरह, अक्टूबर में गुजरात के नारोल इलाके में एक 60 वर्षीय दलित व्यक्ति की कथित तौर पर उसकी बहू के परिवार द्वारा अंतरजातीय विवाह के बाद हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने पाँच लोगों को गिरफ्तार किया था।
मृतक की पहचान भाईलाल वाघेला के रूप में हुई थी, जो एक सफाई कर्मचारी थे और सनी वाघेला के पिता थे। सनी ने हाल ही में एक ऊँची जाति की महिला से विवाह किया था, जिससे दुल्हन का परिवार नाराज़ था।
30 अक्टूबर की दोपहर, जब सनी का बड़ा भाई अपने माता-पिता को उस्मानपुरा मेट्रो स्टेशन के पास सफाई के काम पर छोड़ने गया, तभी दुल्हन के परिवार के सदस्यों ने दंपति पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। द ऑब्ज़र्वर पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमलावरों ने बेरहमी से पीटने से पहले जातिसूचक गालियाँ भी दीं।
कुछ यात्रियों ने बीच-बचाव कर घायल दंपति को बचाया। घर लौटने के बाद भाईलाल वाघेला को साँस लेने में तकलीफ़ होने लगी। उन्हें मणिनगर स्थित एल.जी. अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
अगले दिन पुलिस ने पाँच आरोपियों—राजू परमार, महेश परमार (दुल्हन के चाचा), लिली परमार, कलावती परमार, महेश परमार (देवर) और प्रेम परमार—को गिरफ्तार किया। सभी के ख़िलाफ़ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत हत्या और मारपीट के मामले दर्ज किए गए।
इसी प्रकार, अगस्त में पंजाब के मुक्तसर ज़िले के एणा खेड़ा गाँव में एक दलित परिवार को अपने ही घर से एक महीने से अधिक समय तक दूर रहना पड़ा, क्योंकि उनके बेटे ने उसी गाँव की एक जाट सिख युवती से विवाह कर लिया था। परिवार का आरोप था कि शादी के बाद लड़की के रिश्तेदारों ने उनके घर पर हमला किया और लूटपाट की।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 22 वर्षीय दलित युवक सुरिंदर सिंह ने 18 वर्षीय युवती से 7 जुलाई को राजस्थान के श्रीगंगानगर स्थित एक गुरुद्वारे में विवाह किया था। दंपति ने कानूनी विवाह प्रमाणपत्र भी प्राप्त किया था। हालांकि, यह विवाह गाँव में नाराज़गी का कारण बन गया, क्योंकि स्थानीय पंचायत पहले ही एक प्रस्ताव पारित कर चुकी थी, जिसमें एक ही गाँव में विवाह करने पर रोक लगाई गई थी।
सुरिंदर के पिता मलकीत सिंह ने बताया कि शादी के बाद परिवार को गाँव छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा और उन्हें रिश्तेदारों के यहाँ शरण लेनी पड़ी। बाद में उन्हें पता चला कि लड़की के परिजनों ने उनके घर में जबरन घुसकर तोड़-फोड़ की और सामान चुरा लिया। जब वे अपने घर की स्थिति देखने लौटे, तो उन्हें जातिसूचक गालियों का सामना करना पड़ा।
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