यह मामला दिखाता है कि कैसे एक आक्रामक दक्षिणपंथी समूह—यानी सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगियों—की पिछड़ी सोच पुरानी रूढ़िवादिताओं को बढ़ावा दे सकती है। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के एक गांव में लव मैरिज को लेकर ‘सामाजिक बहिष्कार’ की घोषणा की गई है। बताया जा रहा है कि यह घोषणा पिछले छह महीनों में गांव के आठ जोड़ों के भागकर शादी करने के बाद की गई है।

पिछले छह महीनों में आठ युवा जोड़ों के भागकर शादी करने के बाद, रतलाम जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर स्थित पंचेवा गांव ने कथित तौर पर एक फरमान जारी किया है, जिसमें भागकर शादी करने वाले सभी लोगों और उनके परिवारों के खिलाफ ‘सामाजिक बहिष्कार’ की घोषणा की गई है। इस मुद्दे से जुड़े कई वीडियो, जिनमें ग्रामीणों के इस फैसले की घोषणा की गई है, सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं।

अन्य सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाएं तीखी रही हैं। एक यूज़र ने कहा, “रतलाम के एक गांव द्वारा प्रेम विवाह को लेकर परिवारों का सामाजिक बहिष्कार करने का फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों का सरासर उल्लंघन है। एक लोकतांत्रिक समाज में जीवनसाथी चुनने का अधिकार एक मौलिक स्वतंत्रता है। दूध और किराने जैसी जरूरी चीज़ों तक पहुंच रोककर ‘सामाजिक बहिष्कार’ लागू करना न केवल प्रतिगामी है, बल्कि यह उत्पीड़न का एक रूप है, जिसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।”
लोगों का दावा है कि सामाजिक बहिष्कार का यह फैसला गांव के आठ जोड़ों द्वारा पिछले छह महीनों में भागकर शादी करने के बाद लिया गया।
उक्त वीडियो में एक व्यक्ति यह घोषणा करते हुए दिखाई देता है कि जो युवा लड़के-लड़कियां प्रेम विवाह के लिए भागकर शादी करेंगे, उनका और उनके परिवारों का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा और उन्हें किसी भी कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया जाएगा। उसने आगे कहा कि ऐसे लोगों की मदद करने वालों को भी यही कार्रवाई झेलनी पड़ेगी। वीडियो में घोषित अन्य कार्रवाइयों में ऐसे जोड़ों को रोजगार और दूध जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजें न देना शामिल है। वीडियो में वह व्यक्ति यह भी कहता है कि “पुजारी, नाई और अन्य सेवा प्रदाता उनके घरों में नहीं जाएंगे” और आगे घोषणा करता है कि “जो कोई भी जोड़े की मदद करेगा, उन्हें आश्रय देगा, शादी का गवाह बनेगा या किसी भी तरह से उनका समर्थन करेगा, उसका भी सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।”
NDTV हिंदी और द ट्रिब्यून की रिपोर्टों के बाद, कलेक्टर मीशा सिंह ने सोमवार, गणतंत्र दिवस के दिन, कहा कि वीडियो में दिख रहे लोगों की पहचान कर ली गई है और पुलिस को इस संबंध में कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने आगे कहा, “हमारी जांच में यह सामने आया है कि प्रेम विवाह के खिलाफ यह फैसला ग्राम सभा ने नहीं, बल्कि कुछ ग्रामीणों ने लिया था।”
इसके अलावा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) विवेक कुमार लाल ने भी मीडिया को बताया कि इन लोगों को “बाउंड ओवर” किया जा रहा है—अर्थात उन्हें अच्छे आचरण बनाए रखने और शांति भंग न करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य किया जा रहा है। लाल ने कहा कि विस्तृत जांच के बाद आगे की कार्रवाई भी की जाएगी।
पिछले छह–आठ वर्षों में इंटर-कम्युनिटी और इंटर-कास्ट शादियों के मुद्दे पर एक बढ़ता हुआ उन्माद देखा गया है, जो एक ऐसे अतार्किक चरम पर पहुंच गया है कि सबसे रूढ़िवादी और कट्टर सामाजिक प्रवृत्तियां मजबूत होती जा रही हैं। इस तरह की बयानबाजी और कानून इन्हें और बढ़ावा दे रहे हैं। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, कर्नाटक, झारखंड और हरियाणा सहित कई राज्यों ने पहले ही ऐसे कठोर, आज़ादी-विरोधी और व्यक्तिगत पसंद व स्वायत्तता के खिलाफ कानून बनाए हैं, जो मौजूदा स्पेशल मैरिज एक्ट, 1951 के प्रभाव को कमजोर करते हैं।
इन राज्य कानूनों को सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (cjp.org.in) ने संवैधानिक चुनौती दी है और यह मामला 2020 से भारत के सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस मामले की अगली सुनवाई बुधवार, 28 जनवरी, 2026 को निर्धारित है।
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अन्य सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाएं तीखी रही हैं। एक यूज़र ने कहा, “रतलाम के एक गांव द्वारा प्रेम विवाह को लेकर परिवारों का सामाजिक बहिष्कार करने का फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों का सरासर उल्लंघन है। एक लोकतांत्रिक समाज में जीवनसाथी चुनने का अधिकार एक मौलिक स्वतंत्रता है। दूध और किराने जैसी जरूरी चीज़ों तक पहुंच रोककर ‘सामाजिक बहिष्कार’ लागू करना न केवल प्रतिगामी है, बल्कि यह उत्पीड़न का एक रूप है, जिसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।”
लोगों का दावा है कि सामाजिक बहिष्कार का यह फैसला गांव के आठ जोड़ों द्वारा पिछले छह महीनों में भागकर शादी करने के बाद लिया गया।
उक्त वीडियो में एक व्यक्ति यह घोषणा करते हुए दिखाई देता है कि जो युवा लड़के-लड़कियां प्रेम विवाह के लिए भागकर शादी करेंगे, उनका और उनके परिवारों का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा और उन्हें किसी भी कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया जाएगा। उसने आगे कहा कि ऐसे लोगों की मदद करने वालों को भी यही कार्रवाई झेलनी पड़ेगी। वीडियो में घोषित अन्य कार्रवाइयों में ऐसे जोड़ों को रोजगार और दूध जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजें न देना शामिल है। वीडियो में वह व्यक्ति यह भी कहता है कि “पुजारी, नाई और अन्य सेवा प्रदाता उनके घरों में नहीं जाएंगे” और आगे घोषणा करता है कि “जो कोई भी जोड़े की मदद करेगा, उन्हें आश्रय देगा, शादी का गवाह बनेगा या किसी भी तरह से उनका समर्थन करेगा, उसका भी सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।”
NDTV हिंदी और द ट्रिब्यून की रिपोर्टों के बाद, कलेक्टर मीशा सिंह ने सोमवार, गणतंत्र दिवस के दिन, कहा कि वीडियो में दिख रहे लोगों की पहचान कर ली गई है और पुलिस को इस संबंध में कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने आगे कहा, “हमारी जांच में यह सामने आया है कि प्रेम विवाह के खिलाफ यह फैसला ग्राम सभा ने नहीं, बल्कि कुछ ग्रामीणों ने लिया था।”
इसके अलावा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) विवेक कुमार लाल ने भी मीडिया को बताया कि इन लोगों को “बाउंड ओवर” किया जा रहा है—अर्थात उन्हें अच्छे आचरण बनाए रखने और शांति भंग न करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य किया जा रहा है। लाल ने कहा कि विस्तृत जांच के बाद आगे की कार्रवाई भी की जाएगी।
पिछले छह–आठ वर्षों में इंटर-कम्युनिटी और इंटर-कास्ट शादियों के मुद्दे पर एक बढ़ता हुआ उन्माद देखा गया है, जो एक ऐसे अतार्किक चरम पर पहुंच गया है कि सबसे रूढ़िवादी और कट्टर सामाजिक प्रवृत्तियां मजबूत होती जा रही हैं। इस तरह की बयानबाजी और कानून इन्हें और बढ़ावा दे रहे हैं। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, कर्नाटक, झारखंड और हरियाणा सहित कई राज्यों ने पहले ही ऐसे कठोर, आज़ादी-विरोधी और व्यक्तिगत पसंद व स्वायत्तता के खिलाफ कानून बनाए हैं, जो मौजूदा स्पेशल मैरिज एक्ट, 1951 के प्रभाव को कमजोर करते हैं।
इन राज्य कानूनों को सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (cjp.org.in) ने संवैधानिक चुनौती दी है और यह मामला 2020 से भारत के सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस मामले की अगली सुनवाई बुधवार, 28 जनवरी, 2026 को निर्धारित है।
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