भोपाल साहित्य उत्सव: बाबर संबंधी पुस्तक पर परिचर्चा दक्षिणपंथी विरोध की आशंका के चलते रद्द

Written by sabrang india | Published on: January 15, 2026
“भोपाल साहित्य उत्सव 2026 में मेरी नई किताब ‘बाबर: द क्वेस्ट फॉर हिंदुस्तान’ पर प्रस्तावित सत्र अख़बार स्वदेश द्वारा मेरे खिलाफ झूठी और मानहानिकारक खबरें प्रकाशित किए जाने के बाद रद्द कर दिया गया।”



मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित साहित्य और कला उत्सव के दौरान मुगल सम्राट बाबर को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। कार्यक्रम के आयोजकों ने बाबर पर लिखी गई एक नई पुस्तक पर प्रस्तावित परिचर्चा को पुलिस द्वारा संभावित विरोध प्रदर्शनों की चेतावनी दिए जाने के बाद रद्द कर दिया।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, पुस्तक का शीर्षक ‘बाबर: द क्वेस्ट फॉर हिंदुस्तान’ है, जिसे आभास मालदहियार ने लिखा है। इस किताब पर शनिवार (10 जनवरी) को भारत भवन में चर्चा प्रस्तावित थी, लेकिन हिंदू संगठनों के विरोध और संस्कृति विभाग की आपत्ति के चलते सत्र रद्द कर दिया गया।

इस मामले में लेखक ने बताया कि आयोजकों ने कार्यक्रम रद्द करने के पीछे प्रशासनिक दबाव का हवाला दिया, हालांकि इसके अलावा कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया।

मालदहियार ने अख़बार से कहा, “भोपाल साहित्य उत्सव 2026 में मेरी नई किताब ‘बाबर: द क्वेस्ट फॉर हिंदुस्तान’ पर प्रस्तावित सत्र अख़बार स्वदेश द्वारा मेरे खिलाफ झूठी और मानहानिकारक खबरें प्रकाशित किए जाने के बाद रद्द कर दिया गया।”

उन्होंने आगे कहा, “इन खबरों में यह आरोप लगाया गया कि मेरा उद्देश्य बाबर का महिमामंडन करना है। इन निराधार दावों के बाद कुछ कथित हिंदू संगठनों की ओर से मुझे धमकियां मिलीं, जिनमें मेरी किताब जलाने और पुस्तक दुकानों में तोड़फोड़ करने की चेतावनियां भी शामिल थीं।”

लेखक के हवाले से द वायर ने लिखा कि सबसे अधिक चिंताजनक पहलू यह था कि मध्य प्रदेश के संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने किताब का एक भी पन्ना पढ़े बिना ही इस सत्र की सार्वजनिक रूप से निंदा कर दी। लेखक के अनुसार, इससे प्रदेश के संस्कृति मंत्रालय की कार्यप्रणाली और बौद्धिक निष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं, क्योंकि साहित्यिक कृतियों का मूल्यांकन बिना पढ़े ही किया जा रहा है।

मालदहियार ने मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक विकास दवे की भी आलोचना की और कहा कि उन्होंने केवल अफवाहों के आधार पर ही इस पुस्तक को खारिज कर दिया।

वहीं, आयोजकों का कहना है कि यह निर्णय उन्होंने स्वेच्छा से नहीं लिया। साहित्यिक उत्सव के सह-संस्थापक अभिलाष खांडेकर ने अख़बार को बताया कि पुलिस ने दक्षिणपंथी समूहों द्वारा कार्यक्रम में व्यवधान की आशंका जताई थी।

उन्होंने कहा, “10 जनवरी को प्रस्तावित एक सत्र इसलिए रद्द किया गया, क्योंकि पुलिस ने चेतावनी दी थी कि एक अख़बार की रिपोर्ट के आधार पर दक्षिणपंथी समूह कार्यक्रम स्थल पर आकर तोड़फोड़ कर सकते हैं।”

खांडेकर ने आगे कहा, “लेखक ने अपनी रचना में बाबर का आलोचनात्मक विश्लेषण किया है और कोई भी इसे तर्क के आधार पर चुनौती दे सकता था। लेकिन पूरे आयोजन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हमें यह सत्र रद्द करना पड़ा।”

उन्होंने यह भी कहा कि आयोजकों को आशंका थी कि इस विवाद का असर तीन दिवसीय साहित्य उत्सव पर पड़ सकता है। खांडेकर के अनुसार, “हमने भोपाल और लेखक की छवि की सुरक्षा तथा कार्यक्रम की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए यह फैसला लिया।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि आपत्ति जताने वाले अधिकांश लोगों ने पुस्तक पढ़ी ही नहीं है।

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