राम मंदिर आंदोलन के समय से भाजपा का गढ़ बनी काशी के आठ विधानसभा क्षेत्रों में वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा ने अपने सहयोगी दलों के साथ क्लीन स्वीप किया था। मोदी लहर में हुए पिछले चुनाव में प्रधानमंत्री का जादू जमकर चला था और विपक्षी दलों को एक भी सीट नहीं नसीब हुई थी। यहां की शहर दक्षिणी विभानसभा में वर्ष 1989 से तो कैंट विधानसभा में 1991 से भाजपा का कब्जा है। वहीं, शहर उत्तरी विधानसभा 2012 के चुनाव से भाजपा के पास है। काशी की सियासत पर गहराई से नजर रखने वालों का कहना है कि इस बार आठ में से 3 सीटों पर भाजपा को एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है।

अंतिम चरण के चुनाव से पहले भाजपा सांसद रीता बहुगुणा जोशी के बेटे मयंक जोशी ने सपा का दामन थाम लिया है। कि इसकी अटकलें कई दिनों से थीं, जिसपर शनिवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विराम लगाते हुए अपने चुनावी मंच से ही इसकी घोषणा कर दी।
आजमगढ़ में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने मयंक जोशी के सपा में शामिल होने की घोषणा की। इस घोषणा से पहले भी दोनों की बीच मुलाकात हो चुकी थी। बताया जाता है कि रीता बहुगुणा जोशी ने अपने बेटे को टिकट दिलाने के लिए काफी कोशिशें की थीं, लेकिन वो नाकाम रहीं।
अखिलेश ने मयंक को सपा में शामिल करते हुए कहा- “आज रीता बहुगुणा जोशी जी के बेटे मयंक जोशी जी भी हमारे साथ आ गए हैं। ये हमारे बहुत बड़े नेता बहुगुणा जी को जानते होंगे, रीता बहुगुणा जी को जानते हैं आप, उसी परिवार से आज मयंक जोशी समाजवादी पार्टी में आ गए हैं। इनका भी धन्यवाद और बधाई देता हूं। इनके आने से पार्टी का मनोबल बढ़ेगा।”
पिछले महीने, मयंक जोशी ने अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। तब इसे एक औपचारिक मुलाकात कहा गया था। मयंक को जब भाजपा से टिकट नहीं मिला, तब से ही उनके नाराज होने की खबर थी और कहा जा रहा था कि वो समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं। हालांकि तब रीता बहुगुणा ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा था कि उनके बेटे के पार्टी छोड़ने की खबर सिर्फ अफवाह है।
रीता बहुगुणा जोशी प्रयागराज से लोकसभा सांसद हैं और लखनऊ छावनी विधानसभा सीट से अपने बेटे को टिकट दिलाने की कोशिश कर रही थीं। हालांकि बीजेपी ने उत्तर प्रदेश के मंत्री बृजेश पाठक को यहां से टिकट दे दिया, जिसके बाद मयंक जोशी भाजपा से नाराज हो गए थे।
बता दें कि रीता बहुगुणा जोशी 2012 में कांग्रेस के टिकट पर लखनऊ छावनी से विधायक चुनी गईं थीं। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और सपा संरक्षक मुलायम सिंह की यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव को हराया था। इसके बाद प्रयागराज से सांसद बनीं।

अंतिम चरण के चुनाव से पहले भाजपा सांसद रीता बहुगुणा जोशी के बेटे मयंक जोशी ने सपा का दामन थाम लिया है। कि इसकी अटकलें कई दिनों से थीं, जिसपर शनिवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विराम लगाते हुए अपने चुनावी मंच से ही इसकी घोषणा कर दी।
आजमगढ़ में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने मयंक जोशी के सपा में शामिल होने की घोषणा की। इस घोषणा से पहले भी दोनों की बीच मुलाकात हो चुकी थी। बताया जाता है कि रीता बहुगुणा जोशी ने अपने बेटे को टिकट दिलाने के लिए काफी कोशिशें की थीं, लेकिन वो नाकाम रहीं।
अखिलेश ने मयंक को सपा में शामिल करते हुए कहा- “आज रीता बहुगुणा जोशी जी के बेटे मयंक जोशी जी भी हमारे साथ आ गए हैं। ये हमारे बहुत बड़े नेता बहुगुणा जी को जानते होंगे, रीता बहुगुणा जी को जानते हैं आप, उसी परिवार से आज मयंक जोशी समाजवादी पार्टी में आ गए हैं। इनका भी धन्यवाद और बधाई देता हूं। इनके आने से पार्टी का मनोबल बढ़ेगा।”
पिछले महीने, मयंक जोशी ने अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। तब इसे एक औपचारिक मुलाकात कहा गया था। मयंक को जब भाजपा से टिकट नहीं मिला, तब से ही उनके नाराज होने की खबर थी और कहा जा रहा था कि वो समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं। हालांकि तब रीता बहुगुणा ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा था कि उनके बेटे के पार्टी छोड़ने की खबर सिर्फ अफवाह है।
रीता बहुगुणा जोशी प्रयागराज से लोकसभा सांसद हैं और लखनऊ छावनी विधानसभा सीट से अपने बेटे को टिकट दिलाने की कोशिश कर रही थीं। हालांकि बीजेपी ने उत्तर प्रदेश के मंत्री बृजेश पाठक को यहां से टिकट दे दिया, जिसके बाद मयंक जोशी भाजपा से नाराज हो गए थे।
बता दें कि रीता बहुगुणा जोशी 2012 में कांग्रेस के टिकट पर लखनऊ छावनी से विधायक चुनी गईं थीं। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और सपा संरक्षक मुलायम सिंह की यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव को हराया था। इसके बाद प्रयागराज से सांसद बनीं।