PM मोदी ने किया कृषि कानून वापस लेने का ऐलान, टिकैत बोले- तत्‍काल वापस नहीं होगा आंदोलन

Written by Sabrangindia Staff | Published on: November 19, 2021
पिछले साल कोरोना वायरस संक्रमण के बीच 17 सितंबर को लोकसभा और 20  सितंबर को राज्यसभा ने भारी हंगामे के बीच तीनों कानूनों को पास कर दिया था। इसके बाद 27 सितंबर को राष्ट्रपति ने इस पर दस्तखत कर दिए थे।



केंद्र सरकार ने तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को रद्द करने का फैसला किया है, जिसके खिलाफ पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान एक साल से अधिक समय से विरोध कर रहे हैं। इसी 26 नवंबर को अपने एक साल पूरे करने जा रहे इस आंदोलन की यह सबसे बड़ी जीत है। 

गुरु नानक देव के प्रकाश पर्व के अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने का फैसला किया है और इसके लिए प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इस महीने के अंत से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

इस बीच किसान नेता राकेश टिकैत ने स्‍पष्‍ट कर दिया है कि किसान आंदोलन तत्‍काल वापस नहीं होगा। भारतीय किसान यूनियन प्रवक्‍ता टिकैत ने एक ट्वीट में यह बात कही। उन्‍होंने ट्वीट में लिखा, 'आंदोलन तत्काल वापस नहीं होगा, हम उस दिन का इंतजार करेंगे जब कृषि कानूनों को संसद में रद्द किया जाएगा। सरकार न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य के साथ-साथ किसानों के दूसरे मुद्दों पर भी बातचीत करे।'



तीन कानूनों, किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम 2020 का समझौता, किसान उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम और आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन को भी सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी, 2021 को कृषि कानूनों के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने सभी पक्षों और हितधारकों को सुनने और उसी के बारे में अदालत को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए एक समिति के गठन का भी आदेश दिया था। समिति ने बाद में मार्च में अपनी रिपोर्ट शीर्ष अदालत को सौंप दी थी।

कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं के अलावा दिल्ली के बाहर सड़क जाम करने वाले किसानों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं भी हैं। ये याचिकाएं उन नागरिकों द्वारा दायर की गई हैं, जिनका राष्ट्रीय राजधानी में आवागमन सड़क जाम के कारण प्रभावित हुआ था।

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